पशुपालन को कम पूंजी में फायदे का सौदा बनाना चाहते हैं, तो बकरी पालन एक मजबूत विकल्प हो सकता है। सरकार इसे बढ़ावा देने के लिए पशुपालकों को सीधे आर्थिक मदद दे रही है, जिसके चलते बहुत कम खर्च में अपनी इकाई खड़ी की जा सकती है। योजना के तहत एक इकाई पर कुल 60,000 रुपये का प्रावधान है, और इसमें बड़ा हिस्सा सरकार खुद वहन करती है।
कितनी बकरियां, कितना खर्च
इस योजना के अंतर्गत एक इकाई में 5 मादा बकरी और 1 नर बकरा रखा जाता है। एक इकाई स्थापित करने की कुल लागत 60,000 रुपये तय है। इसमें से सिर्फ 10 प्रतिशत यानी करीब 6,000 रुपये लाभार्थी को अपनी जेब से लगाने होते हैं, जबकि बाकी 54,000 रुपये पशुपालन विभाग सब्सिडी के रूप में देता है। यानी लागत पर पूरे 90 प्रतिशत का अनुदान मिलता है।
अधिकारी ने क्या बताया
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सी.पी. सिंह कुशवाहा ने TrendKia को बताया कि प्रदेश सरकार बकरी पालन के लिए दो इकाइयां स्थापित करने की योजना चला रही है। इसके तहत अनुदान संख्या 15 और अनुदान संख्या 83 संचालित हो रही हैं, जिनमें क्रमशः 14 और 10 व्यक्तियों का चयन किया जाना है। प्रत्येक लाभार्थी को एक इकाई में 5 मादा बकरी और 1 नर बकरा स्थापित करना होगा।
उन्होंने बताया कि अनुदान 14 के तहत कोई भी पात्र लाभार्थी आवेदन कर सकता है, जिसे 60,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसमें लागत का 10 प्रतिशत खुद लगाना होगा और शेष 90 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में मिलेगा।
किसके लिए है यह योजना
प्रदेश के अनुसूचित जाति वर्ग के भूमिहीन एवं गरीब पशुपालकों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से बकरी पालन योजना (अनुदान संख्या-83) चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत जनपद मऊ में कुल 14 लाभार्थियों का चयन किया जाएगा।
योजना में जनपद के 18 वर्ष से अधिक आयु के अनुसूचित जाति वर्ग के बेरोजगार महिला एवं पुरुष पशुपालक आवेदन कर सकते हैं। शर्त यह है कि आवेदक के पास बकरियों के रख-रखाव के लिए उपयुक्त स्थान और जरूरी संसाधन मौजूद हों। बकरियों की खरीद राज्य सरकार द्वारा अधिकृत बकरी प्रक्षेत्रों से या उपलब्धता के अनुसार स्थानीय बाजार से की जा सकेगी।
किन्हें मिलेगी प्राथमिकता
डॉ. कुशवाहा के अनुसार, शेड एवं बकरी पालन प्रशिक्षण केन्द्र, इटावा तथा केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, मथुरा से प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को चयन में वरीयता दी जाएगी। इसके साथ ही विधवा एवं निराश्रित महिलाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। उपलब्धता के आधार पर चयन प्रक्रिया में 3 प्रतिशत दिव्यांगजनों को भी शामिल किया जाएगा।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
लाभार्थी चयन के लिए आवेदन पत्र के साथ कुछ दस्तावेज अनिवार्य रूप से लगाने होंगे:
- आधार कार्ड
- अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र
- ग्राम प्रधान द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र
- बैंक पासबुक की छायाप्रति
- बकरी पालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध हो)
- बकरी इकाई को कम से कम तीन वर्ष तक चलाने संबंधी 10 रुपये के स्टाम्प पर शपथ पत्र
आवेदन कहां से लें
इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन पत्र मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, मऊ अथवा अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से प्राप्त कर सकते हैं और इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।













