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बंजर खेत को सोना उगलने वाला बनाएगी यह हरी फसल, यूरिया-डीएपी का खर्च होगा आधाव्यापार
14 जून 2026, 1:55 pm (90 दिन पहले)· 0

बंजर खेत को सोना उगलने वाला बनाएगी यह हरी फसल, यूरिया-डीएपी का खर्च होगा आधा

ढैंचा की खेती हरे खाद के रूप में मिट्टी में प्राकृतिक नाइट्रोजन भर देती है और रासायनिक खाद का खर्च आधा कर देती है। गया के किसान श्रीनिवास कुमार पांच साल से करीब 4 एकड़ में यह तकनीक अपना रहे हैं।

खेती की बढ़ती लागत और गिरती उपज से जूझ रहे किसानों के लिए ढैंचा एक ऐसी फसल है जो खेत में ही पलटकर मिट्टी को नया जीवन दे देती है। इसे हरी खाद के तौर पर उगाया जाता है और फूल आने पर खेत में ही दबा दिया जाता है, जिससे जमीन को इतना प्राकृतिक पोषण मिल जाता है कि बंजर खेत भी सोना उगलने लगता है।

रासायनिक खाद की मार और एक प्राकृतिक उपाय

लगातार और बेतहाशा रासायनिक खाद डालने से खेतों की उर्वरकता धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है, और यही बात किसानों की सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। ऐसे में ढैंचा की फसल मिट्टी के लिए किसी बूस्टर डोज़ से कम नहीं है। यह वातावरण की प्राकृतिक नाइट्रोजन को भारी मात्रा में खेत में जोड़ देती है और जमीन को दोबारा उपजाऊ बना देती है। फसल तैयार होने के बाद खेत में ट्रैक्टर चलाकर इसे वहीं पलट दिया जाता है, यानी पूरी हरी फसल को मिट्टी में ही मिला दिया जाता है। यही अनोखा तरीका मिट्टी की सेहत को पूरी तरह दुरुस्त कर देता है।

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गया के किसान का पांच साल का तजुर्बा

बिहार के गया जिले के बगदाहा गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान श्रीनिवास कुमार ने करीब 4 एकड़ में ढैंचा की खेती की है। वे पिछले पांच साल से इस फसल को उगा रहे हैं और इसका दोहरा फायदा ले रहे हैं — एक तो बीज उत्पादन और दूसरा हरी खाद के रूप में इसका इस्तेमाल। श्रीनिवास के मुताबिक ढैंचा एक हरी खाद वाली फसल है जो वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन को अपनी जड़ों के जरिए मिट्टी में स्थिर कर देती है। इससे खेत में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधि तेज हो जाती है और पौधों को पोषक तत्व आसानी से मिलने लगते हैं। साथ ही मिट्टी की संरचना सुधरती है और उसकी जलधारण क्षमता भी बढ़ जाती है।

खेत में सड़कर बनती है कुदरती कंपोस्ट

जब इस हरी फसल को खेत में ही सड़ने दिया जाता है तो मिट्टी को भारी मात्रा में नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक कार्बन मिलता है। इसका असर यह होता है कि जमीन की नमी सोखने की क्षमता बहुत बढ़ जाती है और मिट्टी एकदम भुरभुरी हो जाती है। पानी के संपर्क में आते ही दबी हुई हरी फसल खेत के भीतर ही सड़कर बेहतरीन कंपोस्ट खाद में बदल जाती है।

कैसे और कब उगाएं ढैंचा

ढैंचा की सबसे खास बात यह है कि इसे उगाने में न तो ज्यादा पानी लगता है और न ही कोई खास मेहनत करनी पड़ती है। आमतौर पर इसे अप्रैल से जून के महीने में खाली पड़े खेतों में बो दिया जाता है और यह महज 40 से 50 दिनों में अच्छी-खासी ऊंचाई पर तैयार हो जाती है। जैसे ही फसल में फूल आने लगते हैं, ठीक उसी वक्त खेत में रोटावेटर चलाकर इसे मिट्टी में दबा दिया जाता है।

आधी हो जाती है खेती की लागत

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा अगली मुख्य फसल पर दिखता है। धान या गेहूं की बुआई के समय किसान को बाजार से महंगा यूरिया और डीएपी खरीदने की जरूरत ही नहीं रह जाती, क्योंकि जरूरी पोषण खेत को पहले ही मिल चुका होता है। नतीजा यह कि खेती की लागत सीधे आधी रह जाती है और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है।

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