भरतपुर में खेती-किसानी से जुड़े काम को आसान बनाने और उर्वरक वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी करने के लिए कृषि विभाग की ओर से एक नई डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। इस नई पहल के तहत अब किसानों को खाद की उपलब्धता का पता लगाने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान के धक्के खाने या लंबी लाइनों में खड़े होने से राहत मिल जाएगी। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल यानी एफएफएस सिस्टम के जरिए अब अन्नदाता घर बैठे ही अपनी जरूरत के हिसाब से खाद की एडवांस बुकिंग कर सकेंगे।
कैसे काम करता है एफएफएस ऐप और क्या है प्रक्रिया
कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक राधेश्याम मीणा ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि किसान अपने स्मार्टफोन में एफएफएस ऐप डाउनलोड करके अपनी फार्मर्स आईडी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद ऐप के सिस्टम में उनकी जमीन और खेत से जुड़ी सारी जानकारी अपने आप सामने आ जाएगी। किसान अपनी बोई गई फसल का चयन करने के बाद अपनी आवश्यकता के अनुसार खाद का चुनाव कर सकता है। इस डिजिटल सिस्टम में लगभग 400 तरह की फसलों का पूरा विवरण दर्ज किया गया है। उदाहरण के लिए, यदि कोई किसान सरसों की खेती कर रहा है, तो वह अपनी जरूरत के मुताबिक डीएपी, यूरिया, सिंगल सुपर फॉस्फेट या फिर अमोनियम सल्फेट जैसे उर्वरकों का आसानी से विकल्प चुन सकता है।
स्टॉक और डीलरों की मिलेगी सटीक जानकारी
इस आधुनिक ऐप के माध्यम से किसानों को उनके आस-पास के इलाके में उपलब्ध स्टॉक और रजिस्टर्ड डीलरों की पूरी जानकारी मिल जाएगी। इसके बाद किसान अपनी सहूलियत के आधार पर किसी भी डीलर का चुनाव कर सकता है। सबसे खास बात यह है कि यदि अलग-अलग तरह का खाद अलग-अलग दुकानों पर उपलब्ध है, तो किसान एक से ज्यादा डीलरों को भी चुन सकता है। बुकिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसान के मोबाइल फोन पर एक क्यूआर कोड जनरेट होकर आ जाएगा। इसी यूनिक कोड को दिखाकर डीलर से आसानी से उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा। खाद लेने के लिए किसान खुद दुकान जा सकता है, या यदि वह किसी वजह से जाने में असमर्थ है, तो अपने परिवार के किसी सदस्य या फिर किसी अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए भी खाद उठवा सकता है।
बायोमेट्रिक सत्यापन और ओटीपी की अनिवार्यता
यदि किसान की जगह उसका कोई प्रतिनिधि खाद लेने जाता है, तो उसे आधार कार्ड पर आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और किसान के मोबाइल नंबर पर भेजे जाने वाले ओटीपी की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। एफएफएस ऐप की यह सुविधा केवल पास की दुकानों तक ही सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि किसान चाहें तो अपनी जरूरत के मुताबिक अपनी तहसील या फिर जिला स्तर पर मौजूद किसी भी डीलर का चयन कर सकते हैं। जिन किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं है, वे निराश होने के बजाय ई-मित्र या फिर कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए अपनी बुकिंग करवा सकते हैं। एक बार बुकिंग हो जाने के बाद किसान को खाद लेने के लिए कुल 48 घंटे का समय मिलता है। यदि तय समय सीमा के भीतर खाद नहीं ली जाती है, तो बुकिंग अपने आप रद्द हो जाएगी और किसान दोबारा से बुकिंग करने के लिए स्वतंत्र होगा।
डिजिटल रिकॉर्ड से रुकेगी कालाबाजारी
फार्मर्स आईडी और भूमि रिकॉर्ड को आपस में जोड़ने वाली इस पारदर्शी व्यवस्था से किसानों द्वारा की गई खरीद का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इसके तहत खरीफ, रबी और जायद सीजन में खरीदी गई खाद की मात्रा का पूरा हिसाब-किताब दर्ज रहेगा। साथ ही यह सिस्टम यह भी सुनिश्चित करेगा कि किसान अपनी जरूरत के तय कोटे से अधिक उर्वरक न खरीद पाए। इस डिजिटल पहल के लागू होने से न केवल उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कालाबाजारी और unauthorized खरीद पर लगाम कसने में भी बहुत मदद मिलेगी।



















