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बोकारो के बजरंगी ने बताया, कैसे 50 हजार रुपये में इडली डोसा वड़ा का बिजनेस देगा 35 हजार महीनाव्यापार
2 जुल॰ 2026, 11:00 am (45 दिन पहले)· 0

बोकारो के बजरंगी ने बताया, कैसे 50 हजार रुपये में इडली डोसा वड़ा का बिजनेस देगा 35 हजार महीना

बोकारो में पांच साल से साउथ इंडियन स्टॉल चला रहे बजरंगी के मुताबिक सिर्फ 50 हजार रुपये के निवेश और सही रणनीति से डोसा, इडली, वड़ा का बिजनेस हर महीने अच्छी कमाई दे सकता है.

अगर आप कम पैसों में अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो डोसा, इडली और वड़ा जैसी साउथ इंडियन डिशेज का स्टॉल आपके लिए फायदे का सौदा बन सकता है. देशभर में इन डिशेज की डिमांड लगातार बढ़ रही है और लगभग हर शहर में लोग इन्हें चाव से खाना पसंद करने लगे हैं. झारखंड के बोकारो में पिछले पांच साल से अपना साउथ इंडियन स्टॉल चला रहे बजरंगी के मुताबिक सही प्लानिंग और मेहनत के दम पर यह बिजनेस सिर्फ करीब 50 हजार रुपये में खड़ा किया जा सकता है.

50 हजार में कैसे बंटता है पूरा निवेश

बजरंगी बताते हैं कि छोटे शहर में दुकान का किराया लगभग 5 हजार रुपये पड़ता है, या फिर करीब 10 हजार रुपये में एक छोटी फूड गाड़ी भी खरीदी जा सकती है. किचन सेटअप तैयार करने में करीब 10 हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि तवा, चूल्हा और दूसरे जरूरी बर्तनों पर भी करीब 10 हजार रुपये का इंतजाम करना पड़ता है. इसके अलावा शुरुआती रॉ मटेरियल के लिए 5 हजार रुपये, दुकान की साज-सज्जा यानी इंटीरियर के लिए 5 हजार रुपये और मिक्सर जैसी जरूरी मशीन के लिए करीब 3 हजार रुपये अलग से रखने होते हैं. इस तरह पूरा हिसाब जोड़ें तो लगभग 50 हजार रुपये में यह स्टॉल तैयार हो जाता है.

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रोजाना का खर्च और मुनाफे का गणित

स्टॉल शुरू करने के बाद रोजाना का खर्च भी समझना जरूरी है. बजरंगी के अनुसार शुरुआती दिनों में हर दिन करीब 2,000 से 2,500 रुपये तक रॉ मटेरियल पर खर्च होते हैं, जिसमें ताजी सब्जियां, डोसा का घोल यानी बैटर, मसाले, तेल और प्लेट जैसी दूसरी जरूरी चीजें शामिल रहती हैं. दाम की बात करें तो आमतौर पर एक डोसा 50 रुपये में, इडली 10 रुपये प्रति पीस और वड़ा 15 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बेचा जाता है. अगर रोजाना करीब 50 प्लेट डोसा, 100 इडली और 100 वड़ा बिक जाएं, तो शुरुआती दौर में ही रोज 1,000 से 1,800 रुपये तक की कमाई आसानी से हो जाती है. इस हिसाब से हर महीने 30 हजार से 50 हजार रुपये तक कमाना मुमकिन है.

सफाई, स्वाद और ऑनलाइन ऐप्स से साझेदारी बनी सफलता का राज

बजरंगी का कहना है कि इस बिजनेस में सबसे ज्यादा जरूरी है साफ-सफाई का ध्यान रखना, हमेशा ताजी सब्जियां इस्तेमाल करना और खाने के स्वाद की गुणवत्ता बनाए रखना. ग्राहक हमेशा साफ-सुथरे और स्वादिष्ट खाने को ही पसंद करते हैं, इसलिए क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए. इसके साथ ही ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स से जुड़कर बिक्री को और बढ़ाया जा सकता है, जिससे हर महीने की कमाई में भी इजाफा होता है.

बिना अनुभव भी शुरू कर सकते हैं यह बिजनेस

अगर आपके हाथ में स्वाद है, साउथ इंडियन खाने की जानकारी है और कुकिंग का शौक है, तो थोड़ी सी ट्रेनिंग लेकर इसे अपना पेशा बनाया जा सकता है. खाने-पीने के कारोबार में हाथ आजमाना चाहने वालों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है. जिन्हें कुकिंग नहीं आती, वे चाहें तो एक कारीगर तलाश सकते हैं और खुद सिर्फ निवेश करके देखरेख का काम संभाल सकते हैं. ऐसी सूरत में कारीगर को तय सैलरी देनी होती है, जबकि बाकी सारा कामकाज मालिक खुद संभाल सकता है.

सवाल-जवाब

बजरंगी अपना साउथ इंडियन फूड स्टॉल कहां चलाते हैं?
वे झारखंड के बोकारो में पिछले पांच साल से यह स्टॉल चला रहे हैं.
इस बिजनेस को शुरू करने में कुल कितना निवेश लगता है?
सही योजना के साथ यह बिजनेस करीब 50 हजार रुपये में शुरू किया जा सकता है.
रोजाना का रॉ मटेरियल खर्च कितना आता है?
शुरुआती दिनों में रोजाना करीब 2,000 से 2,500 रुपये का रॉ मटेरियल इस्तेमाल होता है.
डोसा, इडली और वड़ा की कीमत क्या है?
डोसा 50 रुपये, इडली 10 रुपये प्रति पीस और वड़ा 15 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बेचा जाता है.
हर महीने कितनी कमाई हो सकती है?
रोजाना करीब 1,000 से 1,800 रुपये के मुनाफे के हिसाब से महीने में 30 हजार से 50 हजार रुपये तक कमाए जा सकते हैं.
बिजनेस में सफलता के लिए सबसे जरूरी बात क्या है?
बजरंगी के मुताबिक साफ-सफाई, ताजी सब्जियों का इस्तेमाल और खाने के स्वाद की गुणवत्ता बनाए रखना सबसे जरूरी है.
ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स से क्या फायदा होता है?
इनसे जुड़कर बिक्री बढ़ाई जा सकती है और हर महीने की कमाई में इजाफा होता है.
अगर कुकिंग नहीं आती तो क्या यह बिजनेस शुरू किया जा सकता है?
हां, ऐसे में एक कारीगर रखा जा सकता है जिसे तय सैलरी दी जाए, जबकि मालिक सिर्फ निवेश और देखरेख का काम संभाले.
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