भारतीय शेयर बाजार में चालू वित्त वर्ष की तिमाहियों के कॉर्पोरेट नतीजों का सिलसिला समाप्त होने के बाद अब निवेशकों का पूरा ध्यान अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर टिक गया है। आने वाले कारोबारी सप्ताह में घरेलू बाजार की दिशा मुख्य रूप से मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीतिगत संकेतों से तय होगी। विश्लेषकों के अनुसार आर्थिक आंकड़ों की दृष्टि से अगला सप्ताह अपेक्षाकृत शांत रहने वाला है, इसलिए विदेशी निवेशकों का रुख और वैश्विक मौद्रिक नीतियां बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रमुख कारण बनेंगी।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव
मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बना हुआ है। रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रमों पर दुनिया भर के बाजारों की नजर बनी हुई है। रिलायंस ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजित मिश्रा के मुताबिक, निकट भविष्य में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की परिस्थितियां और ब्रेंट क्रूड के दाम घरेलू शेयर बाजार की चाल के सबसे अहम निर्धारक साबित होंगे।
इसी मुद्दे पर बजाज ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि निवेशक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में होने वाले बदलावों और अमेरिका व ईरान के बीच चल रही तनातनी पर अपनी सतर्क नजर बनाए रखेंगे। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने भी सहमति जताते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय तनाव बाजार के निवेशकों की धारणा को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
19 अगस्त को आने वाला है FOMC बैठक का ब्योरा
वैश्विक अर्थव्यवस्था और मौद्रिक नीति के लिहाज से 19 अगस्त का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की पिछली बैठक का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक किया जाएगा। इस रिपोर्ट से अमेरिका के फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भावी रणनीति और दृष्टिकोण का पता चलेगा।
यदि FOMC के मिनट्स में फेडरल रिजर्व का रुख अपेक्षा से अधिक कड़ा या आक्रामक नजर आता है, तो इससे भारतीय बाजार सहित अन्य उभरते बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा पूंजी निकासी में तेजी आ सकती है। विदेशी पूंजी के बाहर जाने से भारतीय इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ेगा और सूचकांकों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
चीन के आर्थिक आंकड़े और एफआईआई की गतिविधि
एशियाई बाजारों के संदर्भ में चीन से जारी होने वाले आर्थिक आंकड़े भी इस सप्ताह काफी मायने रखेंगे। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने बताया कि कच्चा तेल, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, FOMC बैठक का ब्योरा और चीन के आर्थिक आंकड़े मिलकर आने वाले दिनों में बाजार की भावी राह तय करेंगे। इन आंकड़ों से वैश्विक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सोच को स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलेगी। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की जाने वाली खरीदारी और बिकवाली की गतिविधियों पर भी भारतीय सूचकांक निर्भर करेंगे।
पिछले सप्ताह बाजार में देखी गई थी बड़ी गिरावट
इससे पूर्व बीते कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ था। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 489.92 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की कमजोरी के साथ सिमटा था। इसी तरह एनएसई निफ्टी भी 204.65 अंक यानी 0.83 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ था। घरेलू स्तर पर कंपनियों के नतीजों का समर्थन खत्म होने के कारण अब पूरा बाजार अंतरराष्ट्रीय मोर्चे से मिलने वाले संकेतों के अनुसार ही अपनी दिशा तय करेगा।


















