पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हस्तिनापुर की ऐतिहासिक भूमि अपने आंचल में महाभारत काल के अनेक अनसुलझे रहस्य छुपाए हुए है। हस्तिनापुर में स्थित प्रसिद्ध पांडेश्वर मंदिर के समीप बना पांडव टीला इस प्राचीन सभ्यता का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, महाभारत कालीन दौर में कुरु वंश के आलीशान और भव्य महल इसी विशाल टीले के स्थान पर स्थापित थे। हालांकि, उस समय आई एक विनाशकारी बाढ़ के कारण ये सभी भव्य राजमहल ज़मीन और मिट्टी की परतों के नीचे समा गए। आज यह पांडव टीला महाभारत काल की अनमोल विरासत और कुरु साम्राज्य के वैभवशाली अतीत के प्रतीक के रूप में विद्यमान है।
पांडव टीले पर पुरातत्व विभाग का सर्वेक्षण और उत्खनन
असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती, जो पिछले कई वर्षों से महाभारत कालीन विभिन्न पहलुओं और स्थलों पर निरंतर शोध कर रहे हैं, उनके अनुसार यह टीला हस्तिनापुर की प्राचीन विरासत का अत्यंत महत्त्वपूर्ण केंद्र है। पांडव टीले के ऐतिहासिक महत्त्व को समझने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण समय-समय पर यहां वैज्ञानिक सर्वेक्षण और उत्खनन कार्य आयोजित करवाता रहता है। पुरातत्वविदों द्वारा कराई गई खुदाई में मिट्टी के कई रोचक और अनोखे बर्तन मिले हैं। ये अवशेष न केवल महाभारत काल के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं, बल्कि इस क्षेत्र में पनपी अन्य प्राचीन सभ्यताओं के विवरण भी उपलब्ध कराते हैं। यह ऐतिहासिक स्थल पांडवों तथा कुरु राजवंश की गौरवशाली परंपरा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
1950 से 1952 के बीच बी बी लाल की ऐतिहासिक खुदाई
हस्तिनापुर के इस ऐतिहासिक पांडव टीले की पुरातात्विक यात्रा में वर्ष 1950 से 1952 का समय अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा है। उस समय प्रसिद्ध पुरातत्वविद बी बी लाल के कुशल नेतृत्व में यहां व्यापक सर्वेक्षण के बाद प्रामाणिक खुदाई कराई गई थी। इस उत्खनन के दौरान विभिन्न प्राचीन संस्कृतियों के स्तर सामने आए, जिनमें विशेष रूप से चित्रित मुद्र्ण संस्कृति यानी 'पेंटेड ग्रे वेयर' के अत्यंत महत्त्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए थे। इन चित्रित बर्तनों और कलाकृतियों ने हस्तिनापुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धता को दुनिया के सामने लाकर प्रस्तुत किया। इस खुदाई से यह सिद्ध हुआ कि हस्तिनापुर का यह क्षेत्र हजारों वर्षों से समृद्ध मानवीय बस्तियों और स्थापत्य कला का केंद्र रहा है।
राजा निचक्षु के शासनकाल में आई विनाशकारी बाढ़ और राजधानी का स्थानांतरण
पांडव टीले पर हुई पुरातात्विक खुदाई की परतों के अध्ययन से एक और ऐतिहासिक घटना का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। उत्खनन के सांस्कृतिक स्तर के अंत में एक विशाल बाढ़ के साक्ष्य पाए गए हैं। ऐतिहासिक दस्तावेजों और उत्खनन साक्ष्यों के अनुसार, यह भीषण बाढ़ कुरु वंश के राजा निचक्षु के शासनकाल के दौरान आई थी। इस प्रलयंकारी बाढ़ के कारण हस्तिनापुर बुरी तरह प्रभावित हुआ था और शहर में स्थित सभी राजमहल और संरचनाएं मिट्टी तथा जल में समाहित होकर नष्ट हो गई थीं। हस्तिनापुर में हुए इस भारी विनाश के बाद, कुरु वंश के राजा निचक्षु द्वारा राजधानी को हस्तिनापुर से स्थानांतरित करके कौशांबी ले जाने का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
पांडव टीले से मिले हजारों वर्ष पुराने ऐतिहासिक अवशेष
पांडव टीले में अब तक की गई विभिन्न खुदाइयों के दौरान प्राचीन स्थापत्य और दैनिक जीवन से जुड़े अनेक अनमोल अवशेष प्राप्त हो चुके हैं। पुरातत्व विभाग को इस स्थान से प्राचीन सभ्यताओं की पकी हुई ईंटों की सुंदर रचनाएं, तांबे के ऐतिहासिक सिक्के तथा मिट्टी के विभिन्न प्रकार के बर्तन मिले हैं। ये सभी अवशेष हजारों वर्ष पुराने हैं और प्राचीन काल के शिल्प कौशल, व्यापारिक गतिविधियों और निर्माण तकनीकों को दर्शाते हैं। मिट्टी के बर्तनों की बनावट और तांबे के सिक्कों की मौजूदगी यह साबित करती है कि हस्तिनापुर अपने दौर में एक बड़ा प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र हुआ करता था।
हस्तिनापुर और आसपास के प्रमुख ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल
यदि कोई श्रद्धालु या पर्यटक वर्तमान समय में हस्तिनापुर की यात्रा करता है, तो उसे पांडव टीले के अलावा कई अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल देखने का अवसर मिलता है। हस्तिनापुर परिसर में पांडेश्वर मंदिर, महाराज कर्ण मंदिर, द्रौपदेश्वर मंदिर और द्रौपदी मंदिर जैसे प्राचीन मंदिर स्थित हैं। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में महाभारत कालीन बूढ़ी गंगा का भी उल्लेख मिलता है, जिसे उस युग में धार्मिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता था। हस्तिनापुर के निकट ही किला परीक्षितगढ़ का ऐतिहासिक क्षेत्र भी स्थित है, जहां राजा परीक्षित का शासन हुआ करता था और जिसे कलयुग के आरंभ से जुड़े विविध ऐतिहासिक उल्लेखों के लिए जाना जाता है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की नई पहल
हस्तिनापुर के इस महान महाभारत कालीन इतिहास और पुरातात्विक महत्त्व को देश-विदेश के लोगों तक पहुंचाने के लिए पर्यटन विभाग विशेष कदम उठा रहा है। पर्यटन विभाग द्वारा हस्तिनापुर और किला परीक्षितगढ़ से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों, पुरातात्विक खोजों और धार्मिक स्थलों की जानकारी को व्यवस्थित रूप से प्रचारित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि देशभर से आने वाले पर्यटक और शोधकर्ता हस्तिनापुर की गौरवशाली विरासत को करीब से जान सकें और महाभारत काल की इस पौराणिक धरती के रहस्यों को समझ सकें।


















