यदि आप यह आलेख पढ़ रहे हैं तो इस बात की पूरी संभावना है कि आप कर स्लैब के दायरे में आते होंगे और अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते होंगे। आप में से बहुत से लोग अपने कागजात तैयार करने और रिटर्न भरने के लिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट की सहायता लेते होंगे। वित्तीय योजना बनाते समय एक पेशेवर के पास कर बचाने के कई अवसर होते हैं, क्योंकि वह सही जगह पर खर्च करने, निवेश करने और बचत करने की सलाह दे सकता है। ये सभी सुझाव कर बचाने की रणनीति का हिस्सा होते हैं। हालांकि, कई पेशेवर कर रिटर्न दाखिल करते समय भी भारी-भरकम राशि बचाने का दावा करते हैं।
कई बार यह दावा पचास प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इस बात की गहराई को समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि रिटर्न दाखिल करते समय एक पेशेवर वास्तव में क्या-क्या कार्य कर सकता है। इस दौरान उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में ये शामिल होती हैं
- मौजूदा नियमों के तहत सभी वैध कटौतियों और छूट का दावा करना।
- यदि नियम अनुमति देते हैं, तो सही कर व्यवस्था का चयन करना।
- यह सुनिश्चित करना कि कोई भी वैध टैक्स क्रेडिट छूटे न।
तो क्या इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए रिटर्न भरते समय आधी राशि बचाना कोई सरल कार्य है? इस विषय को विस्तार से समझने के लिए कर विशेषज्ञ मनीष गुप्ता से बात की गई। मनीष के अनुसार, कुछ विशेष मामलों में करदाता के दस्तावेजों को देखकर पेशेवर को यह लग सकता है कि वह कानूनी तरीकों से कुछ रकम बचा लेगा। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि वे कर बचाने के लिए गैरकानूनी रास्तों का सुझाव देते हैं। उदाहरण के तौर पर, दान की फर्जी रसीदें संलग्न करना, राजनीतिक दलों को चंदा दिखाना या झूठे किराए के समझौते लगाना इसमें शामिल हैं।
अब प्रश्न यह उठता है कि यदि रिटर्न दाखिल हो रहा है और करदाता की रकम बच रही है, तो इसमें असल समस्या क्या है? इस बारे में मनीष गुप्ता का कहना है कि जब आप पूरी तरह से कानूनी तरीके से कर का भुगतान करते हैं, तो आपको केवल उतनी ही राशि चुकानी होती है जितनी आपकी देनदारी बनती है। लेकिन यदि आप गलत तरीकों से कर बचाने की कोशिश करते हैं और कर अधिकारियों की नजर में पकड़े जाते हैं, तो आपको मूल कर राशि के साथ-साथ भारी जुर्माना और ब्याज भी भरना पड़ेगा। मनीष आगे सलाह देते हैं कि जो भी व्यक्ति इस तरह के बड़े और लुभावने दावे करता है, उससे हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए।



















