रसोई के सामान से लेकर बाथरूम के रोजमर्रा के उत्पादों तक, आम उपभोक्ताओं की जेब पर महंगाई का बोझ एक बार फिर बढ़ने वाला है। देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) ने सितंबर तिमाही के दौरान अपने कई उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी करने के संकेत दिए हैं। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही की तुलना में चालू तिमाही में विभिन्न उत्पाद श्रेणियों के दाम 2 फीसदी से लेकर 5 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। इससे पहले दिग्गज कंपनी टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने भी उत्पादन लागत बढ़ने के कारण अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने का ऐलान किया था।
चरणबद्ध तरीके से होगी दाम में बढ़ोतरी, वॉल्यूम ग्रोथ पर रहेगा ध्यान
हिंदुस्तान यूनिलीवर के लिए यह लगातार दूसरी तिमाही होगी जब वह अपने सामान महंगे कर रही है। इससे पहले कंपनी ने जून तिमाही में भी अपने उत्पादों की कीमतों में 2 से 5 फीसदी तक की वृद्धि की थी। तिमाही नतीजों के बाद कंपनी की रणनीति स्पष्ट करते हुए एचयूएल की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक प्रिया नायर ने बताया कि कंपनी चालू तिमाही में संतुलित और चरणबद्ध तरीके से मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। उनका कहना था कि मूल्य वृद्धि के दौरान भी कंपनी का मुख्य ध्यान मात्रा आधारित वृद्धि (वॉल्यूम ग्रोथ) को सुरक्षित रखने पर ही केंद्रित रहेगा।
ग्राहकों पर महंगाई का सीधा असर कम करने और बाजार में मांग बनाए रखने के लिए कंपनी ने एक विशेष योजना तैयार की है। इसके तहत सबसे पहले बड़े आकार वाले उत्पादों (लार्ज पैक्स) की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी, जबकि छोटे पैक्स के दाम बाद में बढ़ाए जाएंगे। इस रणनीति के जरिए कंपनी का उद्देश्य आम परिवारों के दैनिक बजट को अचानक झटका देने से बचाना है।
कंपनी पर बढ़ा लागत का दबाव, निरंजन गुप्ता ने दी जानकारी
मूल्य वृद्धि के पीछे के वित्तीय कारणों को स्पष्ट करते हुए एचयूएल के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) निरंजन गुप्ता ने कहा कि जून तिमाही के दौरान कंपनी ने बढ़ती महंगाई का केवल आधा बोझ ही ग्राहकों पर डाला था। इसके कारण उत्पादन लागत का एक बड़ा हिस्सा कंपनी को खुद वहन करना पड़ा था, जिससे उसके परिचालन पर दबाव बना हुआ है।
निरंजन गुप्ता के मुताबिक, चालू सितंबर तिमाही में भी महंगाई का दबाव जारी रहने की संभावना है। जैसे-जैसे इनपुट कॉस्ट और मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ेगी, वैसे-वैसे कंपनी की उत्पादन लागत में इजाफा होगा। ऐसी स्थिति में लागत के इस बढ़ते बोझ को संतुलित करने के लिए अंततः कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना मजबूरी बन गया है।
पश्चिम एशिया संकट और मौसम की अनिश्चितता का असर
बाजार की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए प्रिया नायर ने बताया कि वैश्विक और घरेलू स्तर पर परिस्थितियां काफी अस्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के साथ-साथ मानसून की स्थिति और अल नीनो का प्रभाव कंपनी की लागत को प्रभावित कर रहा है। कंपनी इन सभी अंतरराष्ट्रीय और मौसम संबंधी कारकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
प्रिया नायर का मानना है कि सितंबर तिमाही में महंगाई के और बढ़ने की उम्मीद है, जिसका सीधा प्रभाव कंपनी की उत्पादन लागत पर पड़ेगा। इन परिस्थितियों से निपटने और अपने परिचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में चरणबद्ध मूल्य वृद्धि करना आवश्यक हो गया है।
टाटा कंज्यूमर के बाद एचयूएल का फैसला, बढ़ेगा रसोई का बजट
हिंदुस्तान यूनिलीवर से पहले टाटा कंज्यूमर लिमिटेड ने भी अपने सामान महंगे करने की घोषणा की थी। टाटा कंज्यूमर ने अपने बयान में कहा था कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत लगातार बढ़ रही है। टाटा कंज्यूमर नमक से लेकर चाय और अन्य दैनिक उपभोग की चीजें बनाती है, जिनका सीधा असर आम नागरिक के बजट पर पड़ता है। अब एचयूएल द्वारा भी 2 से 5 प्रतिशत तक दाम बढ़ाने के संकेतों के बाद रसोई से लेकर बाथरूम तक इस्तेमाल होने वाले साबुन, सर्फ, शैंपू और खाद्य पदार्थों के महंगे होने का रास्ता साफ हो गया है।



















