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चिप निर्माण में वैश्विक केंद्र बन सकता है भारत, एन चंद्रशेखरन ने समझाई रणनीतिव्यापार
14 अक्तू॰ 2026, 9:12 pm (13 दिन पहले)· 0

चिप निर्माण में वैश्विक केंद्र बन सकता है भारत, एन चंद्रशेखरन ने समझाई रणनीति

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के अनुसार कुशल प्रतिभा और विशाल घरेलू बाजार के बल पर भारत दुनिया की सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अहम जगह बना सकता है।

आधुनिक दौर में स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के संचालन के लिए सेमीकंडक्टर चिप अनिवार्य घटक बन चुकी हैं। भविष्य में विभिन्न उद्योगों के डिजिटलीकरण के साथ इन सूक्ष्म चिप्स की आवश्यकता में तेजी से बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इस वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत के लिए विनिर्माण और आपूर्ति के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने का एक बड़ा अवसर तैयार हो रहा है। 2026 ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान मंगलवार को अपनी बात रखते हुए टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत घरेलू बाजार, कुशल पेशेवरों की मौजूदगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक साझेदारी के सहयोग से भारत सेमीकंडक्टर की वैश्विक सप्लाई चेन का एक प्रमुख स्तंभ बन सकता है।

लंबी अवधि की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर केंद्रित निवेश

एन चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया कि चिप उद्योग में कदम रखना देश के भविष्य की बुनियाद को सशक्त करने जैसा है। उन्होंने कहा कि टाटा समूह द्वारा सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में किए जा रहे विशाल पूंजीगत निवेश को केवल दो या तीन वर्षों के अल्पकालिक वित्तीय मुनाफे के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह संपूर्ण पहल देश की दूरगामी रणनीतिक जरूरतों, औद्योगिक आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भर सप्लाई चेन स्थापित करने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर की जा रही है।

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वैश्विक साझेदारियों और घरेलू बाजार की ताकत

भारत की क्षमताओं का विश्लेषण करते हुए चंद्रशेखरन ने उल्लेख किया कि देश के पास तकनीकी रूप से दक्ष प्रतिभाओं का बड़ा आधार और तेजी से बढ़ता विशाल घरेलू उपभोक्ता बाजार मौजूद है। हालांकि, केवल इन दो कारकों के दम पर संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित नहीं हो सकता, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ तालमेल बिठाना बेहद आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और विनिर्माण प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली आधुनिक तकनीक और निर्बाध स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करना भी इस मिशन की सफलता के लिए अनिवार्य शर्त होगी।

गुजरात और असम में जमीनी स्तर पर परियोजनाओं का विस्तार

टाटा समूह देश में चिप निर्माण के बुनियादी ढांचे को आकार देने के लिए पहले ही ठोस कदम उठा चुका है। इस दिशा में समूह की अनुषंगी कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन यानी PSMC के साथ मिलकर एक अत्याधुनिक चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने पर काम कर रही है। करीब 91,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना में बनने वाली चिप्स का उपयोग वाहनों, मोबाइल उपकरणों, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और व्यापक औद्योगिक प्रणालियों में किया जाएगा। इसके साथ ही, पूर्वोत्तर क्षेत्र में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को गति देने के उद्देश्य से असम में लगभग 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा तैयार की जा रही है।

अंधी तकनीकी दौड़ के बजाय व्यावहारिक व्यापार मॉडल पर जोर

उद्योग के भविष्य पर चर्चा करते हुए चंद्रशेखरन ने आगाह किया कि भारत को बाजार की मांग और वाणिज्यिक व्यवहार्यता की वास्तविक पड़ताल किए बिना केवल दुनिया की सबसे जटिल या आधुनिक चिप बनाने की अंधी दौड़ में शामिल नहीं होना चाहिए। उनका स्पष्ट मानना है कि इस क्षेत्र में पूंजी का आवंटन ऐसा होना चाहिए जो व्यावसायिक रूप से टिकाऊ साबित हो, आर्थिक दृष्टि से व्यवहार्य रहे और लंबे समय तक देश के भीतर गुणवत्तापूर्ण रोजगार के नए अवसर पैदा करने में सक्षम हो।

सवाल-जवाब

एन चंद्रशेखरन ने भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कुशल प्रतिभा, बड़े घरेलू बाजार और वैश्विक साझेदारियों के सहारे भारत सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का अहम केंद्र बन सकता है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में किस कंपनी के साथ प्लांट लगा रही है?
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन यानी PSMC के साथ मिलकर यह प्लांट स्थापित कर रही है।
गुजरात में सेमीकंडक्टर प्लांट पर कितना निवेश किया जा रहा है?
गुजरात के धोलेरा स्थित चिप निर्माण संयंत्र में करीब 91,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
असम में सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट के लिए कितनी पूंजी आवंटित की गई है?
असम में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा विकसित करने के लिए लगभग 27,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
धोलेरा संयंत्र में बनने वाली चिप्स का उपयोग किन क्षेत्रों में होगा?
यहां बनने वाली चिप्स का उपयोग ऑटोमोबाइल, मोबाइल फोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और व्यापक औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाएगा।
चंद्रशेखरन ने चिप निर्माण को लेकर क्या चेतावनी दी?
उन्होंने आगाह किया कि भारत को बाजार की मांग और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन किए बिना केवल सबसे आधुनिक चिप बनाने की दौड़ में नहीं पड़ना चाहिए।
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