ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और आजीविका के नए रास्ते खोलने के मकसद से स्वरोजगार के छोटे मॉडल्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में अमेठी जिले के भीतर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और स्थानीय बेरोजगार युवाओं को मोमबत्ती निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण मुहैया कराया जा रहा है। आरसेटी संस्थान की ओर से संचालित इस विशेष कार्यक्रम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें हिस्सा लेने के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना पड़ता। बहुत कम पूंजी लगाकर घर से ही लघु उद्योग स्थापित करने की चाह रखने वालों के लिए यह एक मुफीद विकल्प बनकर उभरा है।
निर्माण की सरल विधि और जरूरी कच्चा माल
मोमबत्ती निर्माण की पूरी कार्यप्रणाली बेहद सुगम और सीधी है। स्वयं सहायता समूह की सदस्य पिंकी के अनुसार, इस काम की शुरुआत के लिए सबसे पहले कच्चा मोम जुटाना होता है। इस मोम को एक निश्चित तापमान पर गर्म करके पिघलाया जाता है। इसके समानांतर मोमबत्ती तैयार करने वाले सांचों की विधिवत सफाई की जाती है, ताकि तैयार उत्पाद की बनावट एकदम साफ और आकर्षक निकले। सांचे में बत्ती के लिए धागा व्यवस्थित करने के बाद पिघला हुआ गर्म मोम उसमें उड़ेल दिया जाता है। मोम डालने के बाद लगभग 10 से 15 मिनट तक उसे ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है, जिसके बाद सांचे से ठोस मोमबत्ती बाहर निकाल ली जाती है।
बाजार में सामान्य उपयोग के लिए बनने वाली मोमबत्तियों के निर्माण में पैराफिन मोम का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है। इसके उत्पादन के लिए मोम के अलावा मजबूत धागा, अलग-अलग डिजाइन के सांचे और कुछ बुनियादी उपकरणों की जरूरत पड़ती है। यह सारा कच्चा माल नजदीकी औद्योगिक केंद्र कानपुर से आसानी से खरीदा जा सकता है। लागत के गणित को समझें तो एक किलोग्राम मोम का बाजार भाव लगभग 180 रुपये पड़ता है, जिससे तकरीबन 100 सामान्य मोमबत्तियां बनकर तैयार हो जाती हैं। यदि मोम को पिघलाते वक्त उसमें विभिन्न रंग मिला दिए जाएं, तो बाजार की मांग के अनुसार रंग-बिरंगी और आकर्षक मोमबत्तियां भी बनाई जा सकती हैं। समूह की सदस्य अर्चना कुमारी का मानना है कि इस विधा को सीखकर महिलाएं न्यूनतम लागत में अपनी गृहस्थी संभालते हुए निजी आमदनी के ठोस रास्ते तैयार कर सकती हैं।
लागत का आकलन और दाखिला प्रक्रिया
संस्थान की मास्टर ट्रेनर और फैकल्टी महिमा के मुताबिक, समय की मांग और बाजार के मिजाज को देखते हुए इस तरह के हुनर सिखाए जा रहे हैं। खासकर दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान मोमबत्तियों की मांग कई गुना बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने वालों को तगड़ा मुनाफा कमाने का मौका मिलता है। पूरे सेटअप को खड़ा करने के लिए महज 8 से 10 हजार रुपये की शुरुआती कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है।
इस निशुल्क प्रशिक्षण का हिस्सा बनने के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को अपना आधार कार्ड, पासपोर्ट आकार की फोटो और सक्रिय मोबाइल नंबर संस्थान में दर्ज कराना आवश्यक है। यह प्रशिक्षण केंद्र अमेठी स्थित विकास भवन के निकट स्थापित है। संस्थान केवल मुख्यालय तक सीमित न रहकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक भी अपनी पहुंच बना रहा है, जहां जाकर महिलाओं को सीधे तौर पर हुनरमंद बनाया जा सके ताकि वे स्वावलंबन की राह पर तेजी से आगे बढ़ सकें।

















