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दबाव को दरकिनार कर भारत ने रूस से तेल खरीद में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड, जून में पहुंचे नए शिखर परव्यापार
20 जून 2026, 11:35 am (130 दिन पहले)· 3

दबाव को दरकिनार कर भारत ने रूस से तेल खरीद में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड, जून में पहुंचे नए शिखर पर

डोनाल्ड ट्रंप के दबाव और वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने जून में रूस से रिकॉर्ड 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया है, जो देश के कुल तेल आयात का आधा से अधिक है।

दुनिया भर के भू-राजनीतिक दबावों को दरकिनार करते हुए भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जब से डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आए हैं, भारत पर रूस के साथ व्यापारिक रिश्ते खत्म करने का चौतरफा दबाव बनाया जा रहा था। इसके लिए कई तरह के टैरिफ, पेनाल्टी और रणनीतिक दबावों का सहारा भी लिया गया। लेकिन इन सब बाधाओं के बावजूद भारत ने न केवल रूसी तेल की खरीद जारी रखी, बल्कि जून के महीने में इसे अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया।

ट्रेंडकिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का आयात अब एक सर्वकालिक रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। हाल ही में अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीद को लेकर कुछ ढील दी गई थी, जिसका फायदा उठाकर भारतीय रिफाइनरियों ने अपने शिपमेंट काफी बढ़ा दिए। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए रूस से आने वाला तेल ईंधन का सबसे प्रमुख जरिया बना रहेगा।

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जून के महीने में दर्ज हुई रिकॉर्ड तोड़ आपूर्ति

कमोडिटी मार्केट का विश्लेषण करने वाली संस्था केपलर के आंकड़ों से पता चलता है कि जून में भारत ने रूस से रिकॉर्ड तेल की खरीद की है। यह आंकड़ा 26 लाख बैरल प्रतिदिन से ऊपर पहुंच गया, जो जून के दौरान भारत द्वारा आयात किए गए कुल तेल का लगभग 53.5 फीसदी हिस्सा है। केपलर का आकलन है कि यदि भारत का दैनिक तेल आयात 23.5 लाख बैरल से अधिक रहता है, तो इसे ऐतिहासिक स्तर माना जाता है। इससे पहले भारत ने मई 2023 में एक महीने के भीतर सबसे अधिक 22 लाख बैरल प्रतिदिन का आयात दर्ज किया था।

केपलर के रिफाइनिंग मैनेजर सुमित रितोलिया ने इस पर रोशनी डालते हुए बताया कि भारत के तेल आयात में जून के दौरान आई यह भारी तेजी मुख्य रूप से रूसी तेल पर मिले आकर्षक डिस्काउंट और घरेलू रिफाइनरियों की मजबूत मांग की वजह से है। उनका मानना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की स्थिति चाहे जो भी रहे, भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का आयात काफी मजबूत स्थिति में बना रहेगा। भले ही यह हर बार नए रिकॉर्ड स्तर पर न पहुंचे, लेकिन एक सम्मानजनक और बड़े स्तर पर यह खरीद जारी रहने वाली है।

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और भारत की रणनीतिक चाल

भारत ने अपनी कच्चे तेल की रणनीति में बड़ा बदलाव मार्च के महीने से करना शुरू किया था। उस दौरान ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर था, जिसके कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज का मार्ग बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। इस वैश्विक संकट की वजह से कच्चे तेल को ले जाने वाले मालवाहक जहाजों के किराए में भारी बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे नाजुक समय में भारत ने रूसी तेल का रुख किया और अपने घरेलू आयात के लक्ष्यों को सुरक्षित रखा। खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति घटने के बाद भारत ने वेनेजुएला और उत्तरी अमेरिका से भी कच्चे तेल का आयात शुरू किया था, लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा रूस से ही आता रहा।

महीने-दर-महीने आयात के आंकड़ों का सफर

भारत की रूसी तेल खरीद के मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें उतार-चढ़ाव साफ देखा जा सकता है:

  • नवंबर 2025: 18.4 लाख बैरल प्रतिदिन
  • दिसंबर: 12.4 लाख बैरल प्रतिदिन
  • जनवरी 2026: 10.9 लाख बैरल प्रतिदिन
  • फरवरी: 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन
  • मार्च: 19.9 लाख बैरल प्रतिदिन
  • अप्रैल: 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन
  • मई 2026: 19.1 लाख बैरल प्रतिदिन
  • जून: यह आंकड़ा रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचकर 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन दर्ज किया गया।

सवाल-जवाब

जून में भारत ने रूस से कितना कच्चा तेल आयात किया?
जून में भारत ने रूस से रिकॉर्ड 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया है।
कुल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी कितनी रही?
जून के दौरान भारत द्वारा आयात किए गए कुल कच्चे तेल का लगभग 53.5 प्रतिशत हिस्सा रूस से आया था।
भारत को रूसी तेल आयात बढ़ाने का अवसर कैसे मिला?
अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीद को लेकर दी गई छूट और रूस द्वारा मिलने वाले भारी डिस्काउंट के कारण भारत को आयात बढ़ाने का अवसर मिला।
होर्मुज संकट का भारत की तेल खरीद नीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
ईरान-अमेरिका विवाद के बाद होर्मुज का मार्ग प्रभावित होने और मालभाड़ा बढ़ने के बाद भारत ने गल्फ देशों से आयात कम कर रूस से अपनी आपूर्ति बढ़ा दी थी।
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