पड़ोसी राज्य कर्नाटक में वाहन ईंधन के भीतर इथेनॉल की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक होने के विवाद के बीच अब केरलम प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। राज्य के नागरिक आपूर्ति विभाग ने विभिन्न पेट्रोल पंपों पर बेचे जा रहे ई20 ईंधन की गुणवत्ता परखने का निर्णय लिया है। नागरिक आपूर्ति मंत्री अनूप जैकब ने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन के साथ उच्च स्तरीय विमर्श के बाद खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के आयुक्त को तत्काल निरीक्षण अभियान शुरू करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
चार जिलों के फ्यूल स्टेशनों से एकत्र किए जाएंगे ईंधन के नमूने
प्रशासन की योजना के अनुसार जांच अभियान के पहले चरण में चार प्रमुख राजस्व क्षेत्रों को शामिल किया गया है। तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, कोझिकोड और कन्नूर के विभिन्न इलाकों में स्थित खुदरा ईंधन बिक्री केंद्रों से पेट्रोल के सैंपल जुटाए जाएंगे। इन सभी नमूनों को अधिकृत प्रयोगशालाओं में रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मिश्रण बीस प्रतिशत के कानूनी दायरे में ही सीमित है। नागरिक आपूर्ति मंत्री के कार्यालय से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि केरलम के भीतर अब तक सीमा से अधिक बायो-फ्यूल मिलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। राज्य सरकार ने यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया है ताकि पड़ोसी राज्य के घटनाक्रम का कोई अनुचित असर स्थानीय उपभोक्ताओं पर न पड़े।
कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल और सख्त कार्रवाई की चेतावनी
ईंधन की शुद्धता और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए अधिकारियों को व्यापक कानूनी अधिकार दिए गए हैं। मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (सप्लाई और वितरण विनियमन एवं कदाचार निवारण) आदेश 2005 के अंतर्गत वर्ष 2014 में जारी राज्य अधिसूचना का हवाला देते हुए मंत्री ने विभागीय मशीनरी को सक्रिय किया है। इस विधिक व्यवस्था के तहत उपभोक्ता मामलों के आयुक्त से लेकर तालुका स्तर के आपूर्ति अधिकारियों तक को औचक निरीक्षण करने, भंडार की जांच करने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर अभियोजन शुरू करने की पूरी छूट हासिल है। अनूप जैकब ने चेतावनी दी कि यदि जांच प्रक्रिया के दौरान किसी भी पंप पर तय मानकों की अवहेलना अथवा मिलावटखोरी पाई गई, तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
कर्नाटक का दावा और तेल कंपनियों का रुख
केरलम का यह फैसला उस समय सामने आया है जब कर्नाटक सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्नाटक प्रशासन का दावा था कि कुछ खुदरा केंद्रों पर आपूर्ति किए जाने वाले पेट्रोल में निर्धारित बीस प्रतिशत के स्थान पर 31.2 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया गया था। इस कथित अनियमितता को लेकर कर्नाटक ने पेट्रोलियम कंपनियों पर जवाबदेही तय करने की मांग उठाई थी। हालांकि, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने शुक्रवार को ही इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि वितरण श्रृंखला में कहीं भी मानकों का उल्लंघन नहीं हुआ है।
देशभर के परीक्षणों में मानकों पर खरा उतरा ई20 फ्यूल
केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी शनिवार को स्पष्ट आंकड़े प्रस्तुत करते हुए ईंधन की गुणवत्ता को प्रमाणित किया। मंत्रालय के अनुसार कर्नाटक से लिए गए 56 सैंपलों सहित कुल 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 893 नमूने एकत्रित किए गए थे। इन सभी नमूनों के विस्तृत प्रयोगशाला विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकला कि बाजार में उपलब्ध ई20 पेट्रोल पूरी तरह से निर्धारित राष्ट्रीय मानकों और गुणवत्ता नियमों के अनुकूल है।


















