त्योहारी सीजन में घरों को सजाने के लिए लोग हमेशा कुछ नया और अनोखा तलाशते हैं, और इस बार उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बाजारों में एक बेहद दिलचस्प उत्पाद ने खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शहर के प्रमुख कारोबारी इलाकों में ऐसी मोमबत्तियां बिक रही हैं, जो पहली नजर में किसी मशहूर हलवाई की दुकान पर सजी ताजी मिठाइयों जैसी नजर आती हैं। इन मोमबत्तियों की बनावट और रंग-रूप इतना सजीव है कि कोई भी व्यक्ति धोखा खा सकता है। रसगुल्ला, घेवर, पेठा, इमरती और जलेबी के आकार में ढाली गई ये स्वीट कैंडल्स इस समय स्थानीय बाजारों में जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
कारीगरी ऐसी कि असली और मोम में फर्क करना मुश्किल
बाजार में बिक रही इन मोमबत्तियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी बारीक कारीगरी है। कारीगरों ने इन्हें इतनी सफाई से तैयार किया है कि देखने में यह पहचानना नामुमकिन हो जाता है कि यह खाने वाली मिठाई है या सजावटी मोमबत्ती। उदाहरण के लिए, लड्डू के आकार में बनाई गई कैंडल के ऊपर असली मिठाई की तरह चांदी का वर्क लगाया गया है, जो रोशनी पड़ते ही चमक उठता है। वहीं काजू कतली और सफेद पेठे जैसी दिखने वाली कैंडल्स का टेक्सचर भी एकदम हूबहू बनाया गया है। जलेबी और इमरती के घुमावदार डिजाइन और उनके गहरे नारंगी-पीले रंगों को भी बड़ी सटीकता से मोम पर उतारा गया है। दुकानों पर इन्हें साधारण तरीके से रखने के बजाय आकर्षक पारदर्शी गिफ्ट बॉक्स में पैक किया गया है, जिन पर 'हैप्पी दीवाली' और 'प्रीमियम कैंडल्स' जैसे संदेश लिखे हैं, जिससे यह उपहार देने के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प बन गई हैं।
बच्चों की जिद और बड़ों की पहली पसंद
दुकानों पर खरीदारी के लिए पहुंच रहे परिवारों में इन कैंडल्स को लेकर अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। कई बार छोटे बच्चे इन खूबसूरत मोमबत्तियों को असली मिठाई समझ बैठते हैं और उन्हें तुरंत खाने की जिद करने लगते हैं, जिसके बाद माता-पिता को उन्हें समझाना पड़ता है कि यह सजावट के लिए हैं। वहीं बड़े खरीदार कारीगरों की इस रचनात्मक सोच और हुनर की दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं। बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोगों का कहना है कि उन्होंने दीवाली के मौके पर पहले कभी इस तरह का प्रयोग नहीं देखा था, और यह इस त्योहारी सीजन का सबसे अनूठा उत्पाद साबित हो रहा है। लोग अपने घरों के ड्रॉइंग रूम, डाइनिंग टेबल और पूजा की थाली को खास लुक देने के लिए इन्हें हाथों-हाथ खरीद रहे हैं।
बिक्री में जोरदार उछाल और किफायती दाम
देहरादून के प्रसिद्ध धामावाला बाजार में दुकान चलाने वाले शंकर ने बताया कि त्योहारी सीजन में ग्राहक हर बार कुछ नया और हटकर मांगते हैं। पिछले सालों तक दुकानों पर केवल मिट्टी के पारंपरिक दीये या साधारण सफेद और रंगीन मोमबत्तियां ही बिका करती थीं, लेकिन इस बार मिठाई के स्वरूप वाली कैंडल्स की मांग सबसे अधिक बनी हुई है। शंकर के अनुसार, यह दीवाली की सजावट के लिए बेहद आकर्षक और सुरक्षित विकल्प बनकर उभरी हैं। इन कैंडल्स की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें जलाने पर घर में हल्की मीठी खुशबू फैल जाती है, जिससे वातावरण खुशनुमा हो जाता है। साथ ही, यह सामान्य दीयों की तुलना में ज्यादा समय तक जलती हैं और इनसे किसी तरह के तेल छलकने का डर भी नहीं रहता।
कीमत के मामले में भी इन्हें आम परिवारों के बजट को ध्यान में रखकर तय किया गया है। बाजार में चार कैंडल्स वाला एक पूरा सेट 150 रुपये से लेकर 250 रुपये के बीच आसानी से उपलब्ध है। यदि कोई ग्राहक केवल एक सिंगल लड्डू कैंडल खरीदना चाहता है, तो वह 50 रुपये में मिल रही है। किफायती दाम होने की वजह से लोग सिर्फ एक डिब्बा लेने के बजाय दो से तीन बॉक्स एक साथ खरीद रहे हैं ताकि रिश्तेदारों और दोस्तों को उपहार में भी दे सकें।
देहरादून के किन प्रमुख बाजारों में मिल रही हैं ये कैंडल्स
अगर आप भी इस बार पारंपरिक सजावट से अलग कुछ नया जोड़ना चाहते हैं, तो देहरादून के पारंपरिक बाजारों में इनके कई विकल्प मिल रहे हैं। शहर के पलटन बाजार, धामावाला बाजार, झंडा बाजार और पीपल मंडी के इलाकों में इन स्वीट कैंडल्स की कई दुकानें सजी हुई हैं। इन सभी बाजारों में 150 रुपये की शुरुआती कीमत पर मिठाई वाली मोमबत्तियों के सुंदर सेट खरीदे जा सकते हैं। इसके अलावा इन दुकानों पर विभिन्न रंगों और आकारों में जेल कैंडल्स भी किफायती दरों पर मिल रही हैं। दुकानदारों का मानना है कि जिस रफ्तार से इनकी बिक्री हो रही है, त्योहार से पहले ही सारा स्टॉक खत्म होने की पूरी संभावना है।



















