बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक और लोकप्रिय महंगू होटल अपने मांसाहारी व्यंजनों के अनूठे स्वाद के लिए पूरे क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखता है। करीब 150 साल से भी अधिक पुराना यह भोजनालय आज के आधुनिक दौर में भी अपनी पुरानी और पारंपरिक शैली को पूरी तरह से जीवंत रखे हुए है। इस पुराने होटल की रसोई में तैयार होने वाली सरसों वाली मछली खाने के शौकीनों के बीच हमेशा से चर्चा का केंद्र रही है। इस खास व्यंजन की खूबी यह है कि इसका स्वाद किसी आधुनिक या पैकेटबंद मसाले की वजह से नहीं, बल्कि लगभग डेढ़ सदी पुरानी उस पारंपरिक शैली से आता है जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
सालों पुराना अनुभव और खानदानी तरीका
इस प्रतिष्ठित होटल में पिछले लगभग 30 से 35 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे प्रदीप बताते हैं कि यहाँ मछली पकाने की तकनीक और तौर-तरीके उनके दादा और पिता के समय से ही चले आ रहे हैं। आधुनिकता की दौड़ में भागने के बजाय इस जगह पर आज भी उन्हीं पुरानी सामग्रियों और विधियों का पालन किया जाता है जो शुरुआती दिनों में हुआ करती थीं। यहाँ सबसे पहले बाजार से ताजी और जिंदा रोहू मछली मंगाई जाती है ताकि स्वाद में किसी भी तरह का समझौता न हो। इसके अलावा, इस्तेमाल होने वाला सरसों का तेल भी सीधे सरसों के दाने पिलवाकर तैयार करवाया जाता है, जिससे उसकी शुद्धता और महक बरकरार रहती है।
हाथ से पिसे मसाले और पारंपरिक तैयारी
महंगू होटल की रसोई में मसालों को तैयार करने का तरीका भी बेहद पारंपरिक और अनूठा है। आज के मिक्सी और ग्राइंडर के दौर में भी यहाँ सरसों को पत्थर की सिलौटी पर हाथ से पीसकर उसका पेस्ट तैयार किया जाता है। इसके साथ ही, मछली में पड़ने वाली हल्दी और लाल मिर्च का पाउडर भी बाजार से लाने के बजाय घर पर ही तैयार किया जाता है। जब ये सभी सामग्रियां पूरी तरह से शुद्ध और पारंपरिक रूप से तैयार होती हैं, तभी असली और सोंधा स्वाद निकलकर सामने आता है जो खाने वालों को अपनी ओर खींचता है।
मछली को डीप फ्राई करने की प्रक्रिया
होटल में प्रसिद्ध ड्राई मछली बनाने की शुरुआत ताजी रोहू मछली की सफाई से होती है। मछली को अच्छी तरह धोने के बाद उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित किया जाता है। इसके बाद इन टुकड़ों पर लाल मिर्च, हल्दी और लहसुन का ताजा तैयार किया हुआ पेस्ट अच्छी तरह मिलाया जाता है। मसालों को मछली के हर एक टुकड़े पर करीने से लगाया जाता है ताकि तलने के बाद हर एक बाइट में मसाले का पूरा जायका मिले। इसके बाद कड़ाही में शुद्ध सरसों का तेल अच्छी तरह गर्म किया जाता है और इन टुकड़ों को एक-एक करके तेल में डाला जाता है।
कुरकुरी ड्राई मछली का स्वाद
तेल में जाने के बाद मछली के पकने का असली दौर शुरू होता है। इन टुकड़ों को लगभग 10 मिनट तक मध्यम से तेज आंच पर डीप फ्राई किया जाता है। जब मछली के टुकड़े बाहर से पूरी तरह लाल और करारे हो जाते हैं, तब उन्हें तेल से बाहर निकाल लिया जाता है। इस प्रकार महंगू होटल की मशहूर ड्राई मछली बनकर तैयार हो जाती है, जिसे खास चटनी के साथ ग्राहकों को परोसा जाता है। ऊपर से बेहद कुरकुरी और भीतर से मसालों से भरपूर यह मछली खाने वालों को एक अलग ही स्तर का स्वाद प्रदान करती है।
सरसों की गाढ़ी करी वाली मछली
महंगू होटल में केवल सूखी तली हुई मछली ही नहीं, बल्कि इसी फ्राई की गई मछली से सरसों वाली स्वादिष्ट करी भी तैयार की जाती है। इस ग्रेवी को बनाने के लिए सबसे पहले कड़ाही में सिलौटी पर पिसी हुई सरसों का पेस्ट डाला जाता है। इसमें हल्दी, लाल मिर्च और कुछ गुप्त मसाले मिलाकर उन्हें धीमी आंच पर अच्छी तरह भुना जाता है। मसाले अच्छी तरह भुन जाने के बाद इसमें जरूरत के मुताबिक पानी और नमक मिलाया जाता है। इस मिश्रण को कुछ देर तक पकने दिया जाता है जिससे सरसों की सोंधी खुशबू और मसालों का अर्क मिलकर एक गाढ़ी और समृद्ध करी तैयार करते हैं।
करी में मछली का घुलना
जब करी पूरी तरह से तैयार हो जाती है, तब इसमें पहले से डीप फ्राई करके रखे गए मछली के टुकड़ों को मिला दिया जाता है। इसके बाद मछली को इस गाढ़ी करी के साथ कुछ देर और पकाया जाता है ताकि मसाले और सरसों का रस मछली के भीतर तक समा जाए। कुछ ही देर में मछली करी के स्वाद में पूरी तरह घुल-मिल जाती है और इस तरह महंगू होटल की खास सरसों वाली करी मछली परोसने के लिए तैयार हो जाती है।
पीढ़ियों से संजोई गई विरासत
इस होटल की सफलता का सबसे बड़ा रहस्य केवल इसकी रेसिपी नहीं है, बल्कि वह निष्ठा है जिसके साथ इसके कारीगर पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं। प्रदीप का कहना है कि उनके पूर्वजों के जमाने में जिस तरह मसालों की पिसाई और चयन होता था, आज भी उसी प्रक्रिया को पूरी ईमानदारी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सिलौटी पर हाथ से सरसों पीसना और घर पर ही मसालों को कूटना-पीसना आज के समय में भले ही कठिन लगे, लेकिन यही वह कड़ी है जो इस डेढ़ सौ साल पुराने होटल के स्वाद को आज भी वैसा ही बनाए हुए है जैसा वह दशकों पहले हुआ करता था।


















