अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं के भाव में जारी भारी फेरबदल के कारण खुदरा खरीदार और आम निवेशक पीली धातु से दूरी बनाते दिख रहे हैं। जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के दौरान वैश्विक स्तर पर आभूषण निर्माण के लिए सोने के उठाव में वार्षिक आधार पर 19 फीसदी का तेज संकुचन दर्ज किया गया है। इसी समयावधि में व्यक्तिगत पूंजी लगाने वालों की ओर से भी रुझान धीमा पड़ा, जिसके चलते कुल निवेश मांग में 14 फीसदी की गिरावट सामने आई है।
खुदरा आभूषण और व्यक्तिगत निवेश के आंकड़े
साल 2026 की तीसरी तिमाही के भीतर पूरी दुनिया में आभूषणों के मद में महज 340.1 टन धातु की खपत हुई। इसके विपरीत बीते वर्ष के इसी तीन महीनों में यह स्तर 420 टन पर दर्ज किया गया था, जिसका सीधा अर्थ है कि सालाना पैमाने पर जेवराती खरीदारी में 79.9 टन की शुद्ध कमी आई है।
बचत और वित्तीय लाभ के उद्देश्य से होने वाले निवेश पर भी दबाव साफ दिखाई दिया। आलोच्य तिमाही में विभिन्न निवेश माध्यमों के जरिए 479 टन धातु खरीदी गई, जो पिछले साल की इसी अवधि के 554.3 टन के मुकाबले 14 प्रतिशत कम है।
सिक्कों, बार और ईटीएफ की बिक्री में गिरावट
भौतिक रूप से सुरक्षित परिसंपत्ति रखने वाले छोटे निवेशकों का रुझान भी मंदा पड़ा है। जुलाई से सितंबर के दौरान बार और सिक्कों की कुल बिक्री 19 फीसदी गिरकर 267.8 टन पर आ गई, जो गत वर्ष समान अंतराल में 328.6 टन दर्ज की गई थी। इसके अलावा पेपर गोल्ड यानी गोल्ड ETF की खरीदारी भी सुस्त रही। इस माध्यम में सोने की आमद बीते वर्ष के 225.7 टन से 6 प्रतिशत फिसलकर 211.2 टन के स्तर पर सिमट गई।
केंद्रीय बैंकों की ओर से रिकॉर्ड उठाव
आम जनता और खुदरा निवेशकों की हिचकिचाहट के उलट वैश्विक मौद्रिक प्राधिकरणों ने अपने भंडार को मजबूत करने की गति तेज रखी है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों ने मिलकर 2026 की तीसरी तिमाही में 321.2 टन धातु अपने खजाने में जोड़ी। बीते साल की इसी तिमाही में यह खरीदारी 226.3 टन रही थी। इस प्रकार संस्थागत और सरकारी खरीद में सालाना आधार पर 42 फीसदी की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
कुल वैश्विक मांग और खदानों से उत्पादन की स्थिति
जेवरात और खुदरा पूंजी प्रवाह में दोहरे अंकों की गिरावट के बावजूद केंद्रीय बैंकों के भारी समर्थन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल खपत संतुलन के करीब बनी रही। जुलाई से सितंबर 2026 में विश्व भर की समग्र मांग 1,368.6 टन रही, जो पिछले साल की समान अवधि के 1,383.2 टन से केवल 1 फीसदी कम है।
आपूर्ति पक्ष की बात करें तो जमीन से धातु निकालने की रफ्तार में तेजी आई है। चालू वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान खदानों से 1,070.9 टन धातु निकाली गई, जबकि 2025 की समान अवधि में यह आंकड़ा 1,040.7 टन था। इस तरह खनन उत्पादन में 3 प्रतिशत का वार्षिक इजाफा दर्ज किया गया है।














