अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है, जहां शुक्रवार को कीमती धातु 3.7 प्रतिशत टूटकर 3,870 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर पर आ गई। यह गिरावट सोने को एक साल से भी अधिक समय के सबसे निचले स्तर पर ले आई। अक्टूबर के महीने में सोने में लगभग 7 प्रतिशत का भारी नुकसान दर्ज किया गया, जो सितंबर में दर्ज की गई गिरावट से भी थोड़ा अधिक रहा। हालांकि मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान एक्सएयू/यूएसडी में 0.93 प्रतिशत की नरमी देखी गई और यह 3,909 डॉलर के करीब कारोबार करता नजर आया। विश्लेषकों का मानना है कि सोने की कीमतों में आई यह भारी गिरावट अत्यधिक और गैर-जरूरी है, क्योंकि धातु में मजबूती के पक्ष में दिए जाने वाले मूल तर्क अब भी अपनी जगह पूरी तरह कायम हैं।
ब्याज दरों का दबाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का गणित
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य से काफी ऊपर बने रहने के कारण दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद से बॉन्ड यील्ड और वास्तविक ब्याज दरों में इजाफा होता है। जब सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है, तो सोना जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति को अपने पास रखने की अवसर लागत यानी अपॉरचुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे निवेशकों के बीच सोने का आकर्षण कम होने लगता है।
हालांकि बाजार के जानकारों का कहना है कि यह कारक सोने में आई ताजा गिरावट की वजह को बेहद सीमित दायरे में ही स्पष्ट करता है। फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक में ब्याज दरों को उम्मीद के अनुरूप स्थिर रखा गया था। उस बैठक के बाद नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की आक्रामक उम्मीदें कुछ नरम पड़ी थीं, जिसके चलते नॉमिनल और वास्तविक बॉन्ड यील्ड दोनों में बाद में गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बावजूद सोने में आई तेज बिकवाली को बाजार के मूलभूत आर्थिक संकेतकों के आधार पर पूरी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।
कर्ज का भारी बोझ और राष्ट्रपति ट्रंप का रुख
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे कर्ज चुकाने की लागत में बहुत भारी बढ़ोतरी होगी। यही प्रमुख कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ब्याज दरों को निचले स्तर पर रखने की इच्छा जताते रहे हैं। हालांकि फेडरल रिजर्व ने अब तक इस दबाव का सामना किया है, लेकिन भारी भरकम कर्ज की समस्या को देखते हुए केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों को उस स्तर तक बढ़ा पाना बेहद मुश्किल लगता है, जो उच्च मुद्रास्फीति से निपटने के लिए वास्तव में आवश्यक है। कर्ज के इस गहराते संकट और केंद्रीय बैंक की संभावित विवशता का यह परिदृश्य अंततः सोने की कीमतों में बढ़ोतरी का ही समर्थन करता है।
ईरान पर हमले की खबर और कच्चे तेल में उछाल
भू-राजनीतिक मोर्चे पर ताजा तनाव ने भी परिसंपत्ति बाजारों को प्रभावित किया है। ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले की रिपोर्ट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से सुधार देखने को मिला। कच्चे तेल के संभलने के बीच मंगलवार को सोने की गति थोड़ी धीमी पड़ गई और यह 3,909 डॉलर के आसपास फिसल गया। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के महंगे होने से अमेरिकी डॉलर को कुछ सहारा जरूर मिला है, लेकिन घरेलू राजनीतिक अनिश्चितताओं ने मुद्रा की बढ़त को थामे रखा है।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन
विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (एयूडी/यूएसडी) मंगलवार को लगातार दूसरे दिन फिसलते हुए एशियाई सत्र के दौरान दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा ब्याज दरों में बहुप्रतीक्षित 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी किए जाने के बाद आई। आरबीए का यह निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मत नहीं था, क्योंकि तीन सदस्यों ने दरों को 4.60 प्रतिशत पर ही बरकरार रखने का पक्ष लिया था। इस विभाजित फैसले ने आगे मौद्रिक सख्ती की संभावनाओं को कमजोर कर दिया, जिससे अमेरिकी डॉलर की मामूली मजबूती के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बढ़ गया।
दूसरी ओर, यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र के दौरान मंगलवार को थोड़ा नीचे खिसका और 158.00 के स्तर से पिछले दिन की बढ़त को कुछ हद तक गंवा बैठा। ईरान से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी डॉलर में सुस्ती बनी हुई है। जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित करेंसी हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को सहारा दिया है, हालांकि बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा अगली दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता ने लाभ को सीमित रखा है। इसके चलते यह मुद्रा जोड़ी एक जाने-पहचाने दायरे में फंसी हुई है। इस बीच यूएस डॉलर इंडेक्स अपने निचले स्तरों से थोड़ा संभला जरूर है, लेकिन यह 102.00 के नीचे ही बना हुआ है।
क्रिप्टो बाजार में मंदी: बिटकॉइन छह सप्ताह के निचले स्तर पर
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी बिकवाली का दबाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। मंगलवार को बिटकॉइन गिरकर 76,566 डॉलर पर आ गया, जहां यह छह सप्ताह के अपने सबसे निचले स्तर का परीक्षण कर रहा है। इथेरियम भी बिटकॉइन की तरह ही दबाव में है और एक संकीर्ण सपोर्ट रेंज के भीतर स्थिर होने की कोशिश कर रहा है। वहीं रिपल 1.25 डॉलर के स्तर से मामूली ऊपर कारोबार करता हुआ देखा जा रहा है। समग्र वित्तीय परिदृश्य में निवेशक ब्याज दरों, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक घटनाओं के बीच बेहद सतर्कता के साथ अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं।


















