अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कागजी आंकड़ों पर नजर डालें तो आर्थिक विकास स्थिर दिखता है, रोजगार बाजार मजबूत बना हुआ है और उपभोक्ता खर्च भी थमता नजर नहीं आ रहा है। इसके बावजूद आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ती महंगाई ने गहरी चिंताएं खड़ी कर दी हैं। परिवारों के बजट पर रहन-सहन का भारी खर्च लगातार दबाव बना रहा है, जिससे आगामी मध्यावधि चुनाव में सियासी समीकरण बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। निचले तबके के कामगारों की कमजोर वेतन वृद्धि और आवास के महंगे होते खर्च ने वास्तविक क्रय शक्ति को बुरी तरह घटा दिया है, जिससे चुनावी नतीजों के बाद भी नीति निर्माताओं के पास तुरंत राहत देने के सीमित साधन ही उपलब्ध होंगे।
संसद पर नियंत्रण और नीतिगत सीमाओं की पेचीदगी
आर्थिक संकेतकों के सतही तौर पर अनुकूल दिखने के बाद भी राजनीतिक स्तर पर रिपब्लिकन पार्टी संसद पर अपनी पकड़ गंवा सकती है। मैक्रो स्तर के समग्र आंकड़े जिस सहजता को दर्शाते हैं, जमीनी हकीकत में घरेलू खर्च उससे कहीं ज्यादा भारी पड़ रहा है। चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा जनता की सामर्थ्य यानी अफोर्डेबिलिटी रहने की संभावना है, लेकिन संसद में जीत दर्ज करने वाले किसी भी दल के लिए इस संकट से निपटना आसान नहीं होगा। भविष्य में मुद्रास्फीति किस दिशा में जाएगी, वह मुख्य रूप से दो बातों पर टिकी है: ईरान से जुड़ा ताजा संघर्ष किस तरह आगे बढ़ता है और मौद्रिक नीति का असर कितना प्रभावी साबित होता है।
ईरान संकट और ऊर्जा कीमतों में उछाल से सोने पर दबाव
वैश्विक कमोडिटी बाजार में भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर देखने को मिल रहा है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लौटने के साथ ही सोने की रफ्तार धीमी पड़ गई। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान के कश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हुई। इस उथल-पुथल के बीच पीली धातु अंतरराष्ट्रीय बाजार में 0.93 प्रतिशत टूटकर 3,909 डॉलर के आसपास कारोबार करती देखी गई। तेल के भाव चढ़ने से मुद्रास्फीति के लंबे समय तक बने रहने का डर फिर ताजा हो गया है।
डॉलर सूचकांक और प्रमुख मुद्रा जोड़ियों का मिजाज
अमेरिकी डॉलर सूचकांक अपने कारोबारी सत्र के निचले स्तरों से कुछ सुधरता नजर आया, हालांकि यह 102.00 के दायरे से नीचे ही बना रहा। कच्चे तेल के चढ़ते दाम और पश्चिम एशिया में जारी तनाव डॉलर को सहारा दे रहे हैं, लेकिन मध्यावधि चुनाव से जुड़ी घरेलू राजनीतिक अनिश्चितता इसके लाभ को सीमित कर रही है। दूसरी तरफ, येन के मुकाबले डॉलर एशियाई सत्र में नरम पड़कर 158.00 के पिछले स्तरों से थोड़ा पीछे खिसक गया। डॉलर में यह नरमी कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों और मध्यावधि मतदान के इंतजार के चलते आई है। जापानी मुद्रा को संभावित सरकारी दखल के जोखिम से समर्थन मिल रहा है, जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के अनिश्चित समय ने इसकी बढ़त को सीमित दायरे में बांध रखा है।
ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक का दर फैसला और दबाव
करेंसी बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मंगलवार को लगातार दूसरे दिन कमजोर रहा। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की बहुप्रतीक्षित बढ़ोतरी किए जाने के बाद भी यह एशियाई सत्र के दौरान दो सप्ताह के निचले स्तर पर लुढ़क गया। इस दर वृद्धि पर बैंक बोर्ड पूरी तरह एकमत नहीं था, क्योंकि तीन सदस्य ब्याज दर को 4.60 प्रतिशत पर ही अपरिवर्तित रखने के पक्ष में थे। इस बंटे हुए फैसले ने नीतिगत सख्ती के भविष्य के कदमों पर विराम लगने की धारणा को मजबूत किया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बढ़ गया।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में मंदी का रुख
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी मंगलवार को भारी दबाव नजर आया। प्रमुख डिजिटल टोकन बिटकॉइन फिसलकर 76,566 डॉलर पर आ गया, जहां यह पिछले छह हफ्तों के निचले स्तर का परीक्षण कर रहा था। इसी तरह इथेरियम भी सीमित समर्थन स्तर के बीच भारी दबाव में जूझता रहा। वहीं रिपल मामूली बढ़त के साथ 1.25 डॉलर के ठीक ऊपर टिका रहा। समग्र वित्तीय परिदृश्य में भू-राजनीतिक टकराव, केंद्रीय बैंकों के कदम और अमेरिकी चुनाव की अनिश्चितता एक साथ मिलकर परिसंपत्ति वर्गों को गहरे उतार-चढ़ाव में धकेल रहे हैं।


















