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गौतम अडानी के खिलाफ केस बंद करने पर अमेरिकी न्याय विभाग अड़ा, अदालत से बोला- यह मुकदमा शुरू ही नहीं होना चाहिए थाव्यापार
2 घंटे पहले· 4

गौतम अडानी के खिलाफ केस बंद करने पर अमेरिकी न्याय विभाग अड़ा, अदालत से बोला- यह मुकदमा शुरू ही नहीं होना चाहिए था

अमेरिका के न्याय विभाग ने संघीय अदालत में गौतम अडानी और सात अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज करने के अपने फैसले का जोरदार बचाव किया और इसे कानूनी रूप से कमजोर तथा राजनयिक रूप से नुकसानदेह बताया।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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अमेरिका के न्याय विभाग (डीओजे) ने संघीय अदालत के सामने साफ कर दिया है कि भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और सात अन्य लोगों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को बंद करने का उसका फैसला पूरी तरह सही है। विभाग ने एक संघीय न्यायाधीश से दो टूक कहा कि यह मुकदमा कानूनी आधार पर कमजोर था, राजनयिक लिहाज से भारत के साथ रिश्तों के लिए नुकसानदेह था और ट्रंप प्रशासन की प्रवर्तन प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाता था।

10 पन्नों के एक तीखे हलफनामे में डीओजे ने लिखा कि इस मामले को तो एक साल पहले ही खत्म कर देना चाहिए था, या फिर इसे शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था। विभाग का तर्क है कि जब आरोप पूरी तरह हटाने का फैसला लिया जा चुका है, तो उसकी समीक्षा में अदालत की भूमिका बहुत सीमित रह जाती है।

यह हलफनामा अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गराउफिस के आदेश के बाद दाखिल हुआ। न्यायाधीश ने विभाग से पूछा था कि वह इस आरोपपत्र को हमेशा के लिए क्यों खारिज करना चाहता है। इससे पहले विभाग ने जो आवेदन दिया था, उसे न्यायाधीश ने संक्षिप्त, नीरस और बिना किसी ठोस निष्कर्ष वाला करार दिया था।

क्या था पूरा मामला

साल 2024 में बाइडन प्रशासन के दौरान न्याय विभाग ने अडानी और अन्य पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि इन लोगों ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई और निवेशकों से अरबों डॉलर जुटाने के लिए झूठ बोला। बताया गया कि इसी कथित योजना के दौरान अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने अमेरिकी निवेशकों से कम से कम 17.5 करोड़ डॉलर जुटाए थे।

बहस हुई तो बढ़ेगा दबाव

न्याय विभाग ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर अभियोजकों को मामले वापस लेने के फैसलों को सार्वजनिक रूप से सही ठहराने के लिए मजबूर किया गया, तो आगे चलकर मामलों को खारिज करने की पूरी प्रक्रिया ही हतोत्साहित होगी। इससे विभाग के भीतर होने वाली गोपनीय चर्चाएं खुलकर सामने आ जाएंगी और आरोप तय करने के मामले में कार्यपालिका के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा।

प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल आर. ट्रेंट मैककॉटर ने अपने हलफनामे में लिखा कि मामले को वापस लेने के आधारों को लेकर अगर अदालत सवाल-जवाब करेगी, तो विभाग के अंदर की गोपनीय आंतरिक बातचीत उजागर हो जाएगी।

सुनवाई न्याय के हित में नहीं

मैककॉटर ने आगे कहा कि ऐसी मांग से खुद प्रतिवादियों को भी नुकसान होता है। वजह यह है कि इससे विभाग उन आपराधिक आरोपों को हटाने से हिचकिचाने लगेगा, जिन्हें वह न्याय के हित में सही नहीं मानता। उन्होंने बताया कि सिर्फ इसी मामले में गोपनीयता के अधिकार को एक तरफ रखते हुए उन्होंने अभियोग वापस लेने का फैसला किया। यह फैसला बचाव पक्ष के वकीलों के साथ महीनों तक चली बैठकों, सैकड़ों पन्नों के दस्तावेजों की जांच और अपने खुद के कानूनी विश्लेषण के बाद लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला ऐसे भारतीय नागरिकों से जुड़ा है, जो भारत में ही रहकर भारत सरकार के अनुबंध हासिल करने के लिए काम कर रहे थे।

इसका आप पर असर

  • निवेशकों के लिए: अमेरिकी न्याय विभाग का मामला खारिज करने पर अड़ा रहना अडानी समूह के शेयरधारकों के लिए राहत की खबर है, क्योंकि इससे कानूनी अनिश्चितता घटती है।
  • भारत में: यह मामला भारत और अमेरिका के कारोबारी और राजनयिक रिश्तों से जुड़ा है, इसलिए इसका असर दोनों देशों के आर्थिक भरोसे पर पड़ सकता है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में क्या कहा?
विभाग ने कहा कि अडानी और सात अन्य के खिलाफ मामला कानूनी रूप से कमजोर, राजनयिक रूप से नुकसानदेह था और इसे शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था।
यह मामला कब और किसके शासन में दर्ज हुआ था?
यह मामला साल 2024 में बाइडन प्रशासन के दौरान न्याय विभाग ने दर्ज किया था।
अडानी और अन्य पर क्या आरोप लगे थे?
आरोप था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई और निवेशकों से अरबों डॉलर जुटाने के लिए झूठ बोला।
अडानी ग्रीन एनर्जी ने कितनी रकम जुटाई थी?
कथित योजना के दौरान अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने अमेरिकी निवेशकों से कम से कम 17.5 करोड़ डॉलर जुटाए थे।
इस मामले में न्यायाधीश कौन हैं?
अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गराउफिस इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं, जिन्होंने विभाग से खारिज करने का कारण पूछा था।
मैककॉटर ने खारिज करने का फैसला किस आधार पर लिया?
आर. ट्रेंट मैककॉटर ने बताया कि यह फैसला बचाव पक्ष के वकीलों के साथ महीनों की बैठकों, सैकड़ों पन्नों के दस्तावेजों की जांच और अपने कानूनी विश्लेषण के बाद लिया गया।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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