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गौतम अडानी के खिलाफ केस बंद करने पर अमेरिकी न्याय विभाग अड़ा, अदालत से बोला- यह मुकदमा शुरू ही नहीं होना चाहिए थाव्यापार
5 जुल॰ 2026, 12:01 am (45 दिन पहले)· 4

गौतम अडानी के खिलाफ केस बंद करने पर अमेरिकी न्याय विभाग अड़ा, अदालत से बोला- यह मुकदमा शुरू ही नहीं होना चाहिए था

अमेरिका के न्याय विभाग ने संघीय अदालत में गौतम अडानी और सात अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज करने के अपने फैसले का जोरदार बचाव किया और इसे कानूनी रूप से कमजोर तथा राजनयिक रूप से नुकसानदेह बताया।

अमेरिका के न्याय विभाग (डीओजे) ने संघीय अदालत के सामने साफ कर दिया है कि भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और सात अन्य लोगों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को बंद करने का उसका फैसला पूरी तरह सही है। विभाग ने एक संघीय न्यायाधीश से दो टूक कहा कि यह मुकदमा कानूनी आधार पर कमजोर था, राजनयिक लिहाज से भारत के साथ रिश्तों के लिए नुकसानदेह था और ट्रंप प्रशासन की प्रवर्तन प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाता था।

10 पन्नों के एक तीखे हलफनामे में डीओजे ने लिखा कि इस मामले को तो एक साल पहले ही खत्म कर देना चाहिए था, या फिर इसे शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था। विभाग का तर्क है कि जब आरोप पूरी तरह हटाने का फैसला लिया जा चुका है, तो उसकी समीक्षा में अदालत की भूमिका बहुत सीमित रह जाती है।

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यह हलफनामा अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गराउफिस के आदेश के बाद दाखिल हुआ। न्यायाधीश ने विभाग से पूछा था कि वह इस आरोपपत्र को हमेशा के लिए क्यों खारिज करना चाहता है। इससे पहले विभाग ने जो आवेदन दिया था, उसे न्यायाधीश ने संक्षिप्त, नीरस और बिना किसी ठोस निष्कर्ष वाला करार दिया था।

क्या था पूरा मामला

साल 2024 में बाइडन प्रशासन के दौरान न्याय विभाग ने अडानी और अन्य पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि इन लोगों ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई और निवेशकों से अरबों डॉलर जुटाने के लिए झूठ बोला। बताया गया कि इसी कथित योजना के दौरान अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने अमेरिकी निवेशकों से कम से कम 17.5 करोड़ डॉलर जुटाए थे।

बहस हुई तो बढ़ेगा दबाव

न्याय विभाग ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर अभियोजकों को मामले वापस लेने के फैसलों को सार्वजनिक रूप से सही ठहराने के लिए मजबूर किया गया, तो आगे चलकर मामलों को खारिज करने की पूरी प्रक्रिया ही हतोत्साहित होगी। इससे विभाग के भीतर होने वाली गोपनीय चर्चाएं खुलकर सामने आ जाएंगी और आरोप तय करने के मामले में कार्यपालिका के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा।

प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल आर. ट्रेंट मैककॉटर ने अपने हलफनामे में लिखा कि मामले को वापस लेने के आधारों को लेकर अगर अदालत सवाल-जवाब करेगी, तो विभाग के अंदर की गोपनीय आंतरिक बातचीत उजागर हो जाएगी।

सुनवाई न्याय के हित में नहीं

मैककॉटर ने आगे कहा कि ऐसी मांग से खुद प्रतिवादियों को भी नुकसान होता है। वजह यह है कि इससे विभाग उन आपराधिक आरोपों को हटाने से हिचकिचाने लगेगा, जिन्हें वह न्याय के हित में सही नहीं मानता। उन्होंने बताया कि सिर्फ इसी मामले में गोपनीयता के अधिकार को एक तरफ रखते हुए उन्होंने अभियोग वापस लेने का फैसला किया। यह फैसला बचाव पक्ष के वकीलों के साथ महीनों तक चली बैठकों, सैकड़ों पन्नों के दस्तावेजों की जांच और अपने खुद के कानूनी विश्लेषण के बाद लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला ऐसे भारतीय नागरिकों से जुड़ा है, जो भारत में ही रहकर भारत सरकार के अनुबंध हासिल करने के लिए काम कर रहे थे।

सवाल-जवाब

अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में क्या कहा?
विभाग ने कहा कि अडानी और सात अन्य के खिलाफ मामला कानूनी रूप से कमजोर, राजनयिक रूप से नुकसानदेह था और इसे शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था।
यह मामला कब और किसके शासन में दर्ज हुआ था?
यह मामला साल 2024 में बाइडन प्रशासन के दौरान न्याय विभाग ने दर्ज किया था।
अडानी और अन्य पर क्या आरोप लगे थे?
आरोप था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई और निवेशकों से अरबों डॉलर जुटाने के लिए झूठ बोला।
अडानी ग्रीन एनर्जी ने कितनी रकम जुटाई थी?
कथित योजना के दौरान अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने अमेरिकी निवेशकों से कम से कम 17.5 करोड़ डॉलर जुटाए थे।
इस मामले में न्यायाधीश कौन हैं?
अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गराउफिस इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं, जिन्होंने विभाग से खारिज करने का कारण पूछा था।
मैककॉटर ने खारिज करने का फैसला किस आधार पर लिया?
आर. ट्रेंट मैककॉटर ने बताया कि यह फैसला बचाव पक्ष के वकीलों के साथ महीनों की बैठकों, सैकड़ों पन्नों के दस्तावेजों की जांच और अपने कानूनी विश्लेषण के बाद लिया गया।
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