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गाय-भैंस से लखपति बनेंगी ग्रामीण महिलाएं, मध्य प्रदेश की इस नई स्कीम में बिना पैसा लगाए होगी मोटी कमाईव्यापार
29 जून 2026, 12:08 am (45 दिन पहले)· 3

गाय-भैंस से लखपति बनेंगी ग्रामीण महिलाएं, मध्य प्रदेश की इस नई स्कीम में बिना पैसा लगाए होगी मोटी कमाई

मध्य प्रदेश सरकार की 'लखपति गौ-पालक दीदी' योजना में बिना पूंजी लगाए महिलाएं उन्नत नस्ल के पशु तैयार कर सालाना 10 लाख रुपये तक कमा सकती हैं।

खेती हो या पशुपालन, गांव की महिलाओं के बिना यह काम अधूरा रहता है। धान की रोपाई से लेकर निराई-गुड़ाई और कटाई तक, हर छोटे-बड़े काम में महिलाओं की मेहनत लगी होती है। यही वजह है कि अब सरकारी योजनाएं भी इन्हीं महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई जा रही हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने 'लखपति गौ-पालक दीदी' योजना शुरू की है, जिसका मकसद महिलाओं की आमदनी बढ़ाना है। आइए समझते हैं कि यह योजना है क्या और किन महिलाओं को इसका सीधा फायदा मिलने वाला है।

इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि इसमें महिलाओं को अपनी जेब से एक रुपया भी नहीं लगाना पड़ता। शून्य पूंजीगत निवेश के साथ इसमें आनुवंशिक और आर्थिक, दोनों तरह का अधिकतम फायदा मिलता है। तरीका सीधा है, अवर्णित यानी सामान्य नस्ल की गाय और भैंसों का उच्च नस्ल के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता है, जिससे उन्नत नस्ल की बछिया और पड़िया तैयार होती हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने यह योजना दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य से शुरू की है।

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कैसे पहुंचेगी कमाई 10 लाख के पार

बालाघाट के पशु चिकित्सक पंकज पुसाम ने इस पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझाया। उनके मुताबिक, सामान्य पशु में उन्नत नस्ल के पशु का वीर्य डालकर कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता है और इससे उन्नत नस्ल की पड़िया या बछिया जन्म लेती है। फायदा यह है कि उन्नत नस्ल के पशु से दूध का उत्पादन ढाई गुना तक बढ़ सकता है।

पंकज पुसाम बताते हैं कि उन्नत नस्ल की एक बछिया या पड़िया अपने पूरे जीवनकाल में पांच से 8 बार बच्चे को जन्म देती है। इस हिसाब से एक पशु से ही पशुपालक तीन से चार लाख रुपये तक कमा सकते हैं। अगर किसी महिला के पास ऐसे तीन से चार पशु हों, तो वह आसानी से 10 लाख रुपये तक की कमाई कर सकती है।

कृत्रिम गर्भाधान में बालाघाट सबसे आगे

इस मामले में बालाघाट जिले ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। जिले ने अवर्णित पशुओं में 58 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान कर बाजी मार ली है। इसके साथ ही कुल कृत्रिम गर्भाधान में 67 प्रतिशत की उपलब्धि भी दर्ज की गई है।

जिले की उपलब्धियों की सूची यहीं नहीं रुकती। अक्रियाशील मैत्री गौ सेवकों से 66 कीटों की वापसी कराई गई, 1756 सेक्स सॉर्टेड सीमन स्ट्रॉ का इस्तेमाल हुआ, AVFO के जरिए 96 कृत्रिम गर्भाधान किए गए और क्षीरधारा ग्रामों में 277 शिविर लगाए गए। इसके अलावा एफएमडी टीकाकरण अभियान के सातवें चरण में जिले ने 67.51 प्रतिशत टीकाकरण भी पूरा किया।

सवाल-जवाब

'लखपति गौ-पालक दीदी' योजना क्या है?
यह मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की योजना है, जिसमें बिना पूंजी लगाए महिलाएं उन्नत नस्ल के पशु तैयार कर कमाई कर सकती हैं। इसका मकसद दुग्ध उत्पादन को दोगुना करना है।
इस योजना में महिलाएं कितनी कमाई कर सकती हैं?
एक उन्नत नस्ल के पशु से तीन से चार लाख रुपये तक कमाई हो सकती है, और तीन से चार पशु होने पर आसानी से 10 लाख रुपये तक कमाए जा सकते हैं।
योजना में पशुपालन का तरीका क्या है?
अवर्णित यानी सामान्य नस्ल की गाय और भैंसों का उच्च नस्ल के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता है, जिससे उन्नत नस्ल की बछिया और पड़िया तैयार होती हैं।
उन्नत नस्ल के पशु से कितना फायदा होता है?
उन्नत नस्ल के पशु से दूध का उत्पादन ढाई गुना तक बढ़ सकता है और ऐसी एक बछिया या पड़िया अपने जीवनकाल में पांच से 8 बार बच्चे को जन्म देती है।
क्या इस योजना में पैसा लगाना पड़ता है?
नहीं, यह शून्य पूंजीगत निवेश वाली योजना है, यानी महिलाओं को अपनी जेब से निवेश नहीं करना पड़ता।
कृत्रिम गर्भाधान में बालाघाट जिले की क्या उपलब्धि है?
बालाघाट ने अवर्णित पशुओं में 58 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है और कुल कृत्रिम गर्भाधान में 67 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है।
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