गोंडा जिले के ग्रामीण इलाकों में मछली पालन किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक बेहतरीन माध्यम बनता जा रहा है। हालांकि इस व्यवसाय में बंपर मुनाफा कमाने के लिए केवल तालाब में जीरे या बीच डालना ही पर्याप्त नहीं होता है। इसके लिए जल स्त्रोत की नियमित देखभाल और सटीक प्रबंधन पर भी पूरा जोर देना पड़ता है। जब तालाब का पानी साफ-सुथरा और पूरी तरह संतुलित रहता है, तब जलीय जीवों का शारीरिक विकास बहुत तेजी से होता है और किसानों को उम्मीद से बेहतर पैदावार हासिल होती है।
तालाब की साफ-सफाई और खरपतवार नियंत्रण
विशेषज्ञों के मुताबिक तालाब के अंदर उग आने वाली अनावश्यक घास, कचरा और विभिन्न प्रकार के जलीय खरपतवारों को वक्त-वक्त पर बाहर निकालते रहना बहुत जरूरी होता है। यदि तालाब में जरूरत से ज्यादा गंदगी और खरपतवार जमा हो जाएं, तो इससे पानी की आंतरिक गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होने लगती है। इसका सीधा और बुरा असर मछलियों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके विकास की गति पर भी पड़ता है।
पानी की गुणवत्ता और ऑक्सीजन स्तर की निगरानी
मछली पालकों को हमेशा तालाब के पानी के रंग, उसकी गंध और मछलियों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। यदि मछलियां बार-बार पानी की ऊपरी सतह पर आकर अपना मुंह खोलती हुई दिखाई दें, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत होता है कि पानी के भीतर ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है। ऐसी आपात स्थिति पैदा होने पर बिना किसी देरी के किसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए और तुरंत उचित कदम उठाने चाहिए।
मछलियों को उनकी संख्या के हिसाब से दें चारा
मछलियों को हमेशा उनकी कुल संख्या और शारीरिक आकार को ध्यान में रखकर ही सही मात्रा में आहार देना चाहिए। तालाब में जरूरत से ज्यादा दाना डाल देने पर जो बचा हुआ चारा होता है, वह पानी में सड़ने लगता है। सड़े हुए चारे की वजह से पानी की गुणवत्ता तेजी से खराब होने का खतरा पैदा हो जाता है, इसलिए हमेशा उतनी ही मात्रा में चारा डालना समझदारी है जितनी मछलियों को वास्तव में जरूरत हो।
क्षमता से अधिक मछलियां पालने से बचें
किसी भी तालाब में उसकी निर्धारित क्षमता से ज्यादा मछलियां कभी नहीं छोड़नी चाहिए। क्षमता से अधिक मछलियां होने पर भोजन और ऑक्सीजन के लिए उनके बीच आपसी प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ जाती है, जिससे उनका विकास रुक जाता है। इसलिए हमेशा तालाब के कुल आकार और उसकी जल धारण क्षमता के आधार पर ही मछलियों की संख्या तय करनी चाहिए। यदि मछलियां सुस्त नजर आने लगें, तालाब के किनारों के पास ज्यादा समय बिताएं या उनके शरीर पर किसी भी प्रकार के असामान्य निशान दिखाई दें, तो इसे भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी किसी भी परिस्थिति में तुरंत मत्स्य विभाग के अधिकारियों या मान्यता प्राप्त विशेषज्ञों से संपर्क करके समय पर उचित कदम उठाना चाहिए।
प्रबंधन को दुरुस्त कर कम करें नुकसान का जोखिम
मछली पालन के कारोबार में तालाब का वैज्ञानिक और सटीक प्रबंधन ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। पानी की गुणवत्ता, छोड़ी गई मछलियों की संख्या, सही दाने की मात्रा और साफ-सफाई पर लगातार नजर रखने से मछलियों को स्वस्थ रखने में बहुत मदद मिलती है। किसान भाई अगर नियमित रूप से अपने तालाब की स्थिति की मॉनिटरिंग करते रहें और किसी भी बीमारी या समस्या के शुरुआती लक्षण दिखते ही विशेषज्ञों से परामर्श लें, तो व्यवसाय में होने वाले नुकसान के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।



















