1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी दिवंगत कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के विषय में सामने आए एक कथित बयान को लेकर हरियाणा कांग्रेस की राजनीति में घमासान मच गया है। इस विवाद के केंद्र में रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा आ गए हैं, जिनका अपनी ही पार्टी के भीतर कड़ा विरोध शुरू हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ पार्टी नेता कुलदीप शर्मा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजकर हुड्डा के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाने की अपील की है। दूसरी ओर, विवाद को शांत करने के प्रयास में दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण जारी करते हुए सिख समुदाय से खेद व्यक्त किया है।
कुलदीप शर्मा का पत्र और सीडब्ल्यूसी से हटाने की मांग
हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेजे अपने पत्र में काफी आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से अनुरोध किया है कि दीपेंद्र सिंह हुड्डा को तुरंत कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के पद से मुक्त कर दिया जाए। कुलदीप शर्मा का तर्क है कि सज्जन कुमार जैसे विवादित नेता की प्रशंसा करने या उन्हें एक तरह का रोल मॉडल बताने वाले कथित बयान से देशभर के सिख समुदाय में भारी असंतोष और निराशा फैली है।
अपने पत्र के माध्यम से शर्मा ने याद दिलाया कि किसान आंदोलन के दौरान सिख समाज ने मजबूती से कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया था। ऐसे में इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना बयानों से समुदाय की भावनाएं गहरी चोट खाती हैं और विरोधी राजनीतिक दलों को हमला करने का मौका मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समाज के जख्मों पर मरहम लगाने और संगठन की साख बनाए रखने के लिए हुड्डा को CWC से हटाया जाना बेहद जरूरी है।
दीपेंद्र हुड्डा की सफाई और सोशल मीडिया पर माफी
मामला तूल पकड़ते ही रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और उसमें एक ऐसा अंग्रेजी शब्द जोड़ा गया है जो उन्होंने कभी बोला ही नहीं था। हुड्डा ने स्पष्ट किया कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी जिससे किसी भी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
दीपेंद्र हुड्डा ने सिख समाज के साथ अपने पारिवारिक संबंधों का हवाला देते हुए कहा, "अगर किसी भाई की भावनाओं को ठेस लगी है तो मैं आपका भाई हूं, मैं खेद प्रकट करता हूं।" उन्होंने यह भी कहा कि सिख समाज उनके अपने परिवार की तरह है और वे कभी उनका दिल दुखाने की सोच भी नहीं सकते।
पारिवारिक इतिहास और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने अपने परिवार और सिख समुदाय के बीच के ऐतिहासिक ताने-बाने को रेखांकित किया। उन्होंने 1908 के प्रसिद्ध पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन का जिक्र किया, जहां उनके परदादा चौधरी मातूराम ने शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह के साथ मिलकर संघर्ष किया था और दोनों को काले पानी की सजा सुनाई गई थी।
इसके अलावा, उन्होंने हाल के वर्षों में हुए किसान आंदोलन का उदाहरण भी पेश किया। हुड्डा ने कहा कि जब किसान सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे, तब वे सबसे पहले सिख किसान भाइयों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए थे। उन्होंने दोहराया कि उनका मकसद कभी भी किसी का दिल दुखाना नहीं था।




















