सुल्तानपुर में हल्दी की खेती करने वाले किसान इस समय फसल को तना छेदक कीट से बचाने को लेकर परेशान हैं। भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र है, जहां आजादी के बाद से वैज्ञानिक शोधों के चलते खेती के तौर-तरीकों में आधुनिक बदलाव आए हैं। हल्दी भी इसी महत्वपूर्ण फसल चक्र का एक मुख्य हिस्सा है, लेकिन बारिश का मौसम आने पर इस पर कीटों और बीमारियों का हमला बढ़ जाता है। इन सभी में तना छेदक कीट सबसे विनाशकारी माना जाता है, जो पत्तियों को काटकर गिराने लगता है और पूरी पैदावार को प्रभावित कर सकता है। यदि हल्दी के खेतों में ऐसे संकेत मिल रहे हैं, तो किसानों को तत्काल सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि यह न केवल पत्तों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि कुल उत्पादन में भी बड़ी गिरावट ला सकता है।
कीट का प्रभाव और पहचान
कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह के अनुसार, खरीफ सीजन में लगाई गई हल्दी की फसल पर अभी इस कीट का जबरदस्त प्रकोप दिखाई दे रहा है। यह कीट पत्तियों के मुख्य भाग पर हमला करता है, जिससे पौधे में जड़ों से पोषक तत्वों का संचार रुक जाता है। यह स्थिति अंततः पौधे को डेड हार्ट जैसी समस्या में धकेल देती है, जहां पौधा पूरी तरह सूख जाता है। फसल को बचाने के लिए अब बाजार में कई प्रकार के कीटनाशक मौजूद हैं, जिनका समय रहते इस्तेमाल करना जरूरी है।
उपचार और कीटनाशकों का प्रयोग
फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल आधारित कीटनाशकों के छिड़काव का सुझाव दिया है। विशेषज्ञ का कहना है कि बेहतर परिणाम के लिए 10 से 15 दिनों के अंतराल पर दोबारा दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए। इसके अलावा डाइमेथोएट और थायमेथोक्साम का भी उपयोग किया जा सकता है। विकल्प के तौर पर कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत दानेदार कीटनाशक का प्रयोग करना भी फायदेमंद रहता है। साथ ही मोनोक्रोटोफॉस 36 ईसी का छिड़काव करके तना छेदक कीट को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे किसानों को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
निगरानी और सुरक्षा के उपाय
डॉ. ए.के. सिंह का सुझाव है कि किसान अपनी फसलों की नियमित निगरानी करें और खेतों में खरपतवार या सड़ने-गलने वाली सामग्री बिल्कुल न रहने दें। सुरक्षा के लिए सही समय बहुत महत्वपूर्ण है। यदि कीटनाशकों का छिड़काव शुरुआती अवस्था में ही, यानी कीट के प्रकोप से पहले 15 से 20 दिनों के भीतर कर दिया जाए, तो काफी बेहतर नतीजे मिल सकते हैं। लगातार सतर्कता और उचित कीटनाशक का छिड़काव ही हल्दी की फसल को सुरक्षित रखने का एकमात्र रास्ता है।











