आम के पेड़ों की घटती पैदावार, कमजोर होती टहनियां, पीली पड़ती पत्तियां या विकास का रुक जाना बागवानों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। यदि खाद और पानी देने के बावजूद पेड़ में सुधार नहीं दिख रहा है, तो समस्या जड़ों में हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ की सेहत सुधारने के लिए केवल ऊपरी देखभाल काफी नहीं है, बल्कि जड़ों का उपचार करना सबसे प्रभावी समाधान है। सही तकनीक से गड्ढा खोदकर जड़ों को उपचारित करने से न केवल पेड़ का स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि नई जड़ों का संचार होकर फलों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
जड़ों की देखभाल का सही तरीका
भोजपुर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास के अनुसार, उपचार के लिए पेड़ की छाया के विस्तार के बराबर एक गोलाकार गड्ढा तैयार करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि गड्ढा 8 से 10 इंच से अधिक गहरा न हो, ताकि मुख्य जड़ों को कोई नुकसान न पहुंचे। खुदाई के बाद, पेड़ की सूखी, काली या रोगग्रस्त जड़ों को सावधानीपूर्वक काटकर हटा दें। जड़ों की सफाई करने से फफूंद और अन्य बीमारियों का खतरा टल जाता है। इसके साथ ही, मिट्टी को अच्छी तरह उलट-पलट कर भुरभुरी करने से जड़ों तक हवा का प्रवाह बेहतर होता है, जो उनके तेजी से विकास में मददगार साबित होता है।
पोषक तत्वों और खाद का मिश्रण
गड्ढा तैयार होने के बाद उसमें पोषक तत्वों का सही संतुलन भरना आवश्यक है। इसमें अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और नीम खली का मिश्रण डालें। यदि बाग की मिट्टी सख्त है, तो इसमें थोड़ी मात्रा में रेत और जैविक खाद का मेल किया जा सकता है। यह मिश्रण न केवल मिट्टी की उर्वरता में सुधार करता है, बल्कि सूक्ष्म जीवों की सक्रियता भी बढ़ाता है। नीम खली का उपयोग दीमक और हानिकारक कीड़ों से सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जबकि वर्मी कम्पोस्ट जड़ों को आवश्यक पोषण देकर पेड़ की समग्र वृद्धि को गति प्रदान करता है।
उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार
डॉ. विकास के मुताबिक, यह तकनीक उन पेड़ों के लिए जीवनदान जैसी है जिनकी प्रगति रुक चुकी है या जिनमें फलों की संख्या कम हो गई है। एक बार उपचार प्रक्रिया पूरी होने के बाद समय पर सिंचाई करें, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि पेड़ के आसपास पानी जमा न हो। जल निकासी बेहतर रहने से जड़ें स्वस्थ रहती हैं और पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से सोख पाती हैं। परिणामस्वरुप, पेड़ में नई शाखाओं का विकास होता है, फूलों की संख्या बढ़ती है और आगामी सीजन में फलों के आकार और गुणवत्ता में सुधार दिखाई देता है।
लंबे समय तक लाभ
यदि किसान साल में एक बार इस विधि को अपनाते हैं और नियमित रूप से जैविक खाद का प्रयोग करते हैं, तो आम के बाग लंबे समय तक स्वस्थ और फलदायी बने रहते हैं। यह तरीका न केवल रासायनिक खादों पर निर्भरता को कम करता है, बल्कि लगातार पैदावार में सुधार के द्वार भी खोलता है। यदि आपके बाग में भी पेड़ अपनी पुरानी चमक खो रहे हैं, तो इस वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग करना एक समझदारी भरा निर्णय होगा। यह उपचार पेड़ को नई ऊर्जा से भर देगा और आने वाले कई सालों तक गुणवत्तापूर्ण आम की फसल सुनिश्चित करने में मदद करेगा।













