वैश्विक रियल एस्टेट बाजार में भारत का दबदबा लगातार मजबूत होता जा रहा है। हाल ही में जारी हुई नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जून तिमाही में देश की वित्तीय राजधानी मुंबई ने दुनिया भर के 46 प्रमुख शहरों के बीच आठवां स्थान हासिल किया है। इस अवधि के दौरान मुंबई में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में सालाना आधार पर 6.2 फीसदी की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। अगर वैश्विक स्तर पर बात की जाए तो इस तिमाही में दुनिया भर की प्रमुख आवासीय संपत्तियों की कीमतों में औसतन 2.6 फीसदी की सालाना तेजी देखने को मिली है। साथ ही, इस पूरी सूची में शामिल कुल 46 शहरों में से 32 ऐसे शहर रहे हैं जहां संपत्तियों की कीमतों में ऊपर की ओर रुझान दर्ज किया गया है।
भारत के तीन शहर वैश्विक मानचित्र पर
नाइट फ्रैंक इंडिया की इस रिपोर्ट में देश के अन्य प्रमुख महानगरों को भी स्थान मिला है। बैंगलुरु ने इस लिस्ट में 4.5 फीसदी की सालाना वृद्धि हासिल करते हुए 12वां स्थान प्राप्त किया है, जबकि नई दिल्ली 3.9 फीसदी की वृद्धि के साथ 17वें पायदान पर रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया के शीर्ष 46 शहरों की इस प्रतिष्ठित सूची में भारत के केवल तीन ही शहर अपनी जगह बना पाने में कामयाब रहे हैं। इनमें से भी दुनिया के टॉप 10 शहरों में शुमार होने वाला इकलौता भारतीय शहर केवल मुंबई ही है।
टोक्यो में सबसे तेज उछाल
दुनिया भर में इस समय सबसे तेजी से प्रॉपर्टी के दाम जापान की राजधानी टोक्यो में बढ़ रहे हैं। जून तिमाही में इस शहर की आवासीय संपत्तियों की कीमतों में 50.7 फीसदी का भारी उछाल आ चुका है। टोक्यो की जनसंख्या लगभग 1.4 करोड़ है और यह दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। शहर के भीतर सीमित जमीन और उसकी लगातार बढ़ती मांग के कारण कीमतों में यह रिकॉर्ड तेजी आई है। इसके अलावा, जापान में होम लोन पर मिलने वाली कम ब्याज दरें और वहां की मुद्रा के कमजोर होने की वजह से विदेशी निवेशक भी टोक्यो के रियल एस्टेट बाजार में बड़े पैमाने पर पैसा लगा रहे हैं।
मनीला और दुबई का हाल
इस सूची में फिलीपींस की राजधानी मनीला दूसरे नंबर पर काबिज है। पिछली तिमाही के दौरान मनीला में प्रॉपर्टी की कीमतें 14.6 फीसदी बढ़ी हैं। इस शहर की आबादी भी करीब 1.5 करोड़ के आसपास है। यहां तेजी से बढ़ती जनसंख्या और जमीन की भारी मांग के कारण लगातार महंगाई बढ़ रही है। मनीला समुद्र के किनारे बसा हुआ एक ऐसा शहर है जहां विकास कार्यों के लिए जमीनों की काफी कमी है, जिसके चलते मांग बढ़ने पर कीमतें आसमान छूने लगती हैं। मध्य पूर्व का प्रमुख केंद्र दुबई इस फेहरिस्त में 10.9 फीसदी की ग्रोथ के साथ तीसरे पायदान पर आता है। दुबई की आबादी भी 50 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है और दुनिया भर से लोग यहां रोजगार की तलाश में आते हैं। विदेशी निवेशकों ने इस शहर में जमकर पूंजी निवेश किया है। चूंकि यह क्षेत्र समुद्र और रेगिस्तान से घिरा हुआ है, इसलिए यहां नए विकास के लिए जमीन की उपलब्धता काफी सीमित है। दुबई अब वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हड़्डा बन चुका है जहां कई देशों की दिग्गज कंपनियों ने अपने कार्यालय स्थापित किए हैं।
सिंगापुर और नैरोबी की स्थिति
सिंगापुर में बीते वित्त वर्ष के दौरान प्रॉपर्टी के दाम लगभग 9.5 फीसदी तक बढ़े हैं। सिंगापुर की जनसंख्या भी लगभग 62 लाख तक पहुंच चुकी है और यह एक छोटा द्वीप देश है जहां बुनियादी विकास के लिए जमीनों का दायरा बहुत सीमित है। दुनिया भर की बड़ी कंपनियां यहां निवेश के लिए आती हैं जिसके कारण रियल एस्टेट की मांग हमेशा बनी रहती है। यही वजह है कि इस शहर में थोड़े ही समय में संपत्तियों के दाम तेजी से ऊपर चले गए हैं। केन्या की राजधानी नैरोबी में आबादी 56 लाख से ज्यादा हो चुकी है। यहां भी रियल एस्टेट की मांग और विकास लगातार बढ़ रहा है। पिछली तिमाही में नैरोबी में प्रॉपर्टी की कीमतें एक साल के मुकाबले 8.5 फीसदी बढ़ीं और यह शहर पांचवें पायदान पर रहा। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां संपत्तियों के दामों में 32 फीसदी का उछाल आ चुका है। नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र के कई महत्वपूर्ण कार्यालय स्थित हैं और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थान भी वहां तेजी से आकार ले रहे हैं। बेहतर बुनियादी ढांचे के कारण वैश्विक कंपनियों का इस शहर में आना लगातार बढ़ रहा है।
क्राइस्टचर्च और सियोल में भी तेजी
न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में भी प्रॉपर्टी के दाम 6.9 फीसदी की दर से ऊपर चढ़े हैं। यहां की आबादी बढ़कर करीब 5.5 लाख हो चुकी है, लेकिन सीमित जगह और बढ़ती मांग के कारण कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। न्यूजीलैंड के अन्य महंगे शहरों जैसे ऑकलैंड आदि को छोड़कर लोग अब यहां बसने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसके कारण यहां जमीनों के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं। दक्षिण कोरिया का शहर सियोल भी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले रियल एस्टेट बाजारों की सूची में शामिल हो गया है। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इस साल की जून तिमाही में सियोल में 6.4 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने इस बारे में अपने विचार रखते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर आवासीय संपत्तियों की कीमतों में अपेक्षाकृत धीमी गति से हो रही वृद्धि के बीच मुंबई का दुनिया के शीर्ष 10 प्रमुख आवासीय बाजारों में जगह बनाना एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुंबई में 6.2 फीसदी की सालाना ग्रोथ देखी गई है जो यह साबित करती है कि निवेशकों और खरीदारों के लिए यह महानगर लंबी अवधि में बेहद आकर्षक और बेहतर रिटर्न दिलाने वाला साबित हो सकता है।



















