आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक को लगातार अधिक शक्तिशाली और उन्नत प्रोसेसर की आवश्यकता होती है। हालांकि, इन अत्याधुनिक चिप्स को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद जटिल, महंगी और लंबी होती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता खुद ही इस निर्माण कार्य का एक हिस्सा अपने हाथ में ले सकती है?
चिप डिजाइनिंग की प्रक्रिया को तेज करना
यही वह मुख्य विचार है जिसके आधार पर रिकर्सिव इंटेलिजेंस की नींव रखी गई है। यह नया स्टार्टअप ऐसा सॉफ्टवेयर और तकनीक विकसित कर रहा है जो खुद चिप्स के डिजाइन तैयार कर सके, हर प्रक्रिया से सीख सके और अगले प्रोजेक्ट को और बेहतर ढंग से बना सके। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो भविष्य में हार्डवेयर निर्माण की रफ्तार कई गुना बढ़ सकती है और एआई सिस्टम्स का विकास भी तेजी से हो सकेगा।
मौजूदा समय में किसी एक चिप को पूरी तरह डिजाइन करने में दो से तीन साल का लंबा समय लग जाता है। लेकिन रिकर्सिव इंटेलिजेंस इस समयसीमा को घटाकर मात्र कुछ हफ्तों तक लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिससे तकनीक बाजार में बदलाव की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी।
संस्थापकों का पुराना और मजबूत अनुभव
अन्ना गोल्डी और अजलिया मिर्होसेनी पहले ही यह साबित कर चुकी हैं कि चिप निर्माण में एआई एक बड़ी और निर्णायक भूमिका निभा सकता है। रिकर्सिव इंटेलिजेंस की स्थापना करने से पहले दोनों ने गूगल में अल्फाचिप का सह-नेतृत्व किया था। यह एक ऐसा एआई सिस्टम था जो कुछ ही घंटों में चिप लेआउट तैयार कर सकता था, जबकि इंसानी डिजाइनरों को इसमें बहुत अधिक समय लगता था। उनके उस काम की मदद से गूगल के टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स की कई पीढ़ियों को डिजाइन करने में मदद मिली थी।
दोनों ने गूगल की एमएल फॉर सिस्टम्स टीम की भी सह-स्थापना की थी। इसके अलावा, दोनों एंथ्रोपिक में शुरुआती कर्मचारियों के रूप में जुड़ी रही हैं और गूगल डीपमाइंड में सीनियर स्टाफ रिसर्च साइंटिस्ट के पद पर काम कर चुकी हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और स्टार्टअप की शुरुआत
अन्ना गोल्डी रिकर्सिव की फाउंडर और सीईओ हैं। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की है और उन्हें एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू की 35 इनोवेटर्स अंडर 35 सूची में भी शामिल किया जा चुका है। वहीं, अजलिया मिर्होसेनी कंपनी की फाउंडर और सीटीओ हैं। वह स्टैनफोर्ड में कंप्यूटर साइंस की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और वहां स्केलिंग इंटेलिजेंस लैब की संस्थापक भी हैं।
इन दोनों ने मिलकर साल 2025 के अंत में इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। बाजार के निवेशकों ने इस विचार पर बहुत तेजी से भरोसा जताया और कंपनी ने महज चार महीने के भीतर 4 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर 33.5 करोड़ डॉलर जुटा लिए, जिसमें 30 करोड़ डॉलर की सीरीज ए फंडिंग भी शामिल है। इस निवेश दौर में एनवीडिया भी एक प्रमुख निवेशक के रूप में शामिल है।
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का अनूठा चक्र
रिकर्सिव का मकसद चिप डिजाइनिंग के हर चरण को स्वचालित बनाना है, जिसमें कंपोनेंट प्लेसमेंट से लेकर डिजाइन वेरिफिकेशन तक के सभी काम शामिल हैं। इसके साथ ही यह सिस्टम विभिन्न चिप्स पर काम करते हुए सीखता है ताकि एक चिप के अनुभव से दूसरे को और बेहतर बनाया जा सके।
यह एक ऐसा चक्र तैयार करता है जहां बेहतर एआई अधिक उन्नत हार्डवेयर बनाने में मदद करता है और वह बेहतर हार्डवेयर आगे की और शक्तिशाली एआई प्रणालियों को विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करता है। अन्ना गोल्डी और अजलिया मिर्होसेनी का मानना है कि इस प्रक्रिया के तेज होने से नए चिप आर्किटेक्चर के द्वार खुलेंगे और अंततः अधिक सक्षम तथा ऊर्जा-कुशल एआई का विकास संभव हो सकेगा।



















