अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में हलचल और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात के बीच केंद्र सरकार ने तेल शोधन कंपनियों को बड़ी रियायत दी है। केंद्र ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विशेष लेवी में संशोधन करते हुए डीजल और विमान ईंधन यानी एटीएफ की दरों को काफी नीचे ला दिया है। यह नई व्यवस्था आज से प्रभावी मानी जाएगी, जिससे विदेशी बाजारों में ईंधन बेचने वाले रिफाइनर्स का मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर मोटर स्पिरिट यानी पेट्रोल पर लागू स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में किसी भी तरह का फेरबदल नहीं किया गया है।
संशोधित निर्यात दरों का पूरा ब्योरा
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के तहत आगामी पखवाड़े के लिए निर्यात शुल्कों की नई सूची तय की गई है। इसके तहत डीजल के बाहरी लदान पर देय स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और सेस के योग को 20 रुपये प्रति लीटर से कम करके 16 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है, जिसका सीधा मतलब कंपनियों के लिए 4 रुपये प्रति लीटर की बचत है।
हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले जेट ईंधन यानी एटीएफ के विदेशी शिपमेंट पर लगने वाले शुल्क को पूर्व के 15 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस समायोजन के जरिए एयर टरबाइन फ्यूल निर्यातकों को प्रति लीटर 4.5 रुपये की स्पष्ट राहत प्राप्त हुई है। पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह पहले की तरह 0.5 रुपये यानी 50 पैसे प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है।
घरेलू खुदरा बाजार और उपभोक्ताओं पर प्रभाव
निर्यात शुल्क में हुई इस कमी का भारत के भीतर आम गाड़ियों में डलने वाले तेल की कीमतों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह फेरबदल केवल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार भेजे जाने वाले कार्गो पर लागू होता है। देश के आंतरिक ईंधन पंपों पर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह अपरिवर्तित है। इसलिए आम नागरिकों को मिलने वाले खुदरा दामों में इसके चलते कोई प्रतिकूल वृद्धि या बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।
विंडफॉल टैक्स लगाने की वजह और प्रक्रिया
यह विशेष निर्यात शुल्क मूल रूप से उस समय अस्तित्व में आया था जब वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया के संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतें अचानक चढ़ गई थीं। उस दौर में घरेलू रिफाइनरियां स्थानीय जरूरतों की अनदेखी कर विदेशी मंडियों में तेल बेचकर अप्रत्याशित मुनाफा कमाने लगी थीं। आंतरिक आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने और कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे को संतुलित करने के लिए सरकार ने 27 मार्च को डीजल व एटीएफ पर और 16 मई से पेट्रोल पर यह टैक्स शुरू किया था। केंद्र सरकार हर 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय ईंधन बेंचमार्क की समीक्षा करती है और उसी आधार पर इन दरों को नियमित रूप से घटाती या बढ़ाती रहती है।

















