क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनएक्स ने गुरुवार को उन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया, जिनमें कहा गया था कि सेशेल्स में रजिस्टर्ड इस प्लेटफॉर्म ने जानबूझकर ईरान के अरबों डॉलर के प्रतिबंधित फंड को आगे पहुंचाने का जरिया बनकर काम किया। एक्सचेंज ने उस रिपोर्ट का जोरदार खंडन किया, जो काफी हद तक क्रिप्टो एनालिटिक्स फर्म टीआरएम लैब्स के विश्लेषण पर टिकी थी।
टीआरएम लैब्स ने एक ब्लॉग पोस्ट में कॉइनएक्स को ईरान के 60 से ज्यादा प्लेटफॉर्म से जोड़ा है। इनमें नोबिटेक्स भी शामिल है, जिस पर इसी महीने अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए। आरोप है कि नोबिटेक्स ने आतंकी फंडिंग, प्रतिबंधों से बचने और रैनसमवेयर भुगतान में मदद की।
एक्सचेंज और 'ईरान के सबसे बड़े' प्लेटफॉर्म का रिश्ता
टीआरएम के मुताबिक, कई सालों से कॉइनएक्स का ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज के तौर पर पहचाने जाने वाले इस प्लेटफॉर्म से करीबी नाता रहा है। इस दौरान एक्सचेंज को ईरानी सैन्य इकाइयों के साथ ऑन-चेन एक्सपोजर मिला और वह नोबिटेक्स का सबसे बड़ा बाहरी काउंटरपार्टी भी बना रहा।
कॉइनएक्स ने अपना बचाव अपनी निष्पक्षता के आधार पर किया है। एक्सचेंज का कहना है कि वह एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म है, जो दुनियाभर के आम यूजर्स को सेवाएं देता है और ईरानी अधिकारियों या प्रतिबंधित इकाइयों से उसका कोई आधिकारिक संबंध नहीं है।
एक्सचेंज ने एक्स पर लिखी पोस्ट में कहा,
हम किसी भी ऐसे नैरेटिव को सख्ती से खारिज करते हैं जो आम यूजर की गतिविधि को राज्य-स्तर पर प्रतिबंधों से बचने की कोशिश के साथ मिला देता है, और किसी भी ऐसे अनुमान को भी जो ऑन-चेन फंड के प्रवाह को प्लेटफॉर्म की किसी अवैध गतिविधि की जानकारी, समर्थन या उसमें भागीदारी के बराबर मान लेता है।
3.84 अरब डॉलर का लेन-देन
टीआरएम का दावा है कि उसके डेटा के अनुसार पिछले सात सालों में कॉइनएक्स और उसकी पैरेंट कंपनी वायाबीटीसी के मालिकाना हक वाले एक माइनिंग पूल के बीच 3.84 अरब डॉलर से ज्यादा का लेन-देन हुआ है। फर्म ने कॉइनएक्स को ईरान के क्रिप्टोकरेंसी इकोसिस्टम की सबसे बड़ी जीवनरेखा बताया है।
कॉइनएक्स की शुरुआत करीब एक दशक पहले हांगकांग में हुई थी। टीआरएम का तर्क है कि एक्सचेंज का ईरान में काम कर रहीं 60 से ज्यादा इकाइयों के साथ ट्रांजैक्शन एक्सपोजर है, और इतना जुड़ाव शायद कोई स्वतंत्र बाजार व्यवहार नहीं हो सकता।
इसके अलावा टीआरएम ने यह भी आरोप लगाया कि कॉइनएक्स का प्लेटफॉर्म साल भर चली एक मनी लॉन्ड्रिंग योजना का हिस्सा रहा, जो इसी महीने खत्म हुई। इस दौरान एक्सचेंज को ईरान के केंद्रीय बैंक से जुड़े 6.7 करोड़ डॉलर मिले, जो कई ब्लॉकचेन में फैले ट्रांसफर के एक जाल के जरिए पहुंचे।
एक्सचेंज ने उठाए कदम
कॉइनएक्स ने एक्स पर बताया कि नोबिटेक्स पर प्रतिबंध लगते ही उसने तेजी से कदम उठाए। एक्सचेंज ने ईरानी यूजर्स की पहचान को और पुख्ता किया, व्यापक जियो-फेंसिंग लागू की, संदिग्ध लेन-देन का पता लगाने की व्यवस्था की और प्लेटफॉर्म का अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने वाले अकाउंट्स पर कार्रवाई तेज कर दी।
अमेरिका ने जब्त किया 1 अरब डॉलर का क्रिप्टो
हाल की खबरों में यह कहा जा रहा है कि ईरान सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के बदले बिटकॉइन में भुगतान स्वीकार किया है। इसी रास्ते से कभी दुनिया की 20% तेल आपूर्ति होकर गुजरती थी। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, इस मामले में अमेरिका सरकार सक्रिय रही है।
नोबिटेक्स और तीन अन्य एक्सचेंजों पर प्रतिबंध लगने से कुछ दिन पहले बेसेंट ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान से जुड़ी इकाइयों से 1 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की है। उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि हो सकता है कुछ लोगों को इस बात का अंदाजा ही न हो कि उनका वॉलेट जब्त कर लिया गया है।













