भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के साथ ही भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए नए रास्ते खुल गए हैं। उद्योग जगत के विश्लेषकों का मानना है कि इस नए व्यापारिक माहौल में भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाला कुल निर्यात आने वाले समय में एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है। दोनों देशों के बीच हुए इस द्विपक्षीय समझौते को 15 जुलाई से प्रभावी कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, आने वाले केवल चार वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार का मौजूदा स्तर दोगुना होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधा और बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा।
आर्थिक अनुमान और रोजगार के नए अवसर
भारतीय उद्योग संगठन एसोचैम के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच कुल कारोबार लगभग 58 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापारिक नियमों में ढील मिलने और भारतीय उत्पादों को टैरिफ से मुक्ति मिलने के बाद, साल 2030 तक यह व्यापारिक आंकड़ा बढ़कर 115 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के मिंडा का मानना है कि इस ऐतिहासिक समझौते से भारत के विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को भारी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही, देश में रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ी तेजी आएगी और इससे लगभग 7 से 10 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
भारतीय उत्पादों को मिलेगी शुल्क मुक्त एंट्री
इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके तहत भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले लगभग 99 फीसदी उत्पादों को वहां के बाजारों में शुल्क मुक्त यानी फ्री एंट्री दी जाएगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता काफी बढ़ जाएगी। इस डील से विशेष रूप से कपड़ा उद्योग, चमड़ा और फुटवियर, जेम्स एंड ज्वैलरी, ऑटो कंपोनेंट, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, समुद्री उत्पाद, चाय, कॉफी, मसाले, प्रोसेस्ड फूड और सिरेमिक जैसे प्रमुख क्षेत्रों को बहुत बड़ा निर्यात बाजार मिलेगा। इसके अलावा, भारत के लघु और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई को भी ब्रिटेन जैसे विकसित बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का एक बड़ा अवसर मिलेगा।
पेशेवरों और बड़ी कंपनियों को सीधा फायदा
आईटी और फाइनेंशियल सर्विसेज के क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए भी यह समझौता बेहद लाभकारी साबित होने वाला है। इसके लागू होने से उन्हें ब्रिटेन में नई नौकरियां ढूंढने में बहुत मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त, वहां काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को अब दोहरी सोशल सिक्योरिटी राशि जमा करने की बाध्यता से मुक्ति मिल जाएगी, जिससे उनकी परिचालन लागत में काफी कमी आएगी।
कॉरपोरेट स्तर पर, इस समझौते से कपड़ा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों जैसे वेलस्पन इंडिया, अरविंद लिमिटेड और ट्राईडेंट को सीधा फायदा पहुंचेगा। इसके साथ ही जेम्स एंड ज्वैलरी क्षेत्र से टाइटन और कल्याण ज्वैलर्स; ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र से भारत फोर्ज और मदरसन; फार्मास्युटिकल सेक्टर से सन फार्मा, डॉ रेड्डीज और ल्यूपिन; तथा आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल टेक और विप्रो को अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी।



















