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खरगोन में खरीफ की तैयारी तेज, जून में इन सब्जियों की बुवाई से किसानों की जेब होगी मजबूतव्यापार
16 जून 2026, 9:51 am (47 दिन पहले)· 0

खरगोन में खरीफ की तैयारी तेज, जून में इन सब्जियों की बुवाई से किसानों की जेब होगी मजबूत

खरगोन जिले में खरीफ सीजन शुरू होते ही किसान कपास और सोयाबीन के साथ कम अवधि वाली सब्जियों की ओर बढ़ रहे हैं, जो 60-90 दिन में तैयार होकर अच्छी कमाई दे सकती हैं।

खरगोन जिले में खरीफ सीजन की हलचल अब खेतों तक पहुंच चुकी है। यहां के किसान सिर्फ कपास और सोयाबीन तक सीमित नहीं रह रहे, बल्कि साथ में सब्जियों की खेती को भी कमाई का दूसरा रास्ता बना रहे हैं। कृषि जानकारों का मानना है कि जून का महीना सब्जियों के लिए सबसे मुफीद रहता है, क्योंकि इस दौरान तापमान और हवा में मौजूद नमी, दोनों मिलकर पौधों की बढ़वार को रफ्तार देते हैं।

कम समय में तैयार, बाजार में टिकी मांग

इन सब्जियों की सबसे बड़ी खूबी यही है कि ये पारंपरिक फसलों के मुकाबले जल्दी हाथ में पैसा देती हैं। आमतौर पर ये फसलें 60 से 90 दिन के भीतर तैयार हो जाती हैं और इन्हें उगाने में बहुत ज्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती।

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भिंडी और करेला, मुनाफे की पक्की जोड़ी

भिंडी को किसानों के लिहाज से सबसे फायदेमंद फसल माना जाता है। यह जल्दी पककर तैयार होती है और इसकी मांग बाजार में कभी ठंडी नहीं पड़ती। अगर किसान बढ़िया किस्म का बीज चुनें और सिंचाई का सही ध्यान रखें तो उत्पादन कहीं बेहतर मिल सकता है।

करेला की बुवाई भी जून में खूब बड़े पैमाने पर होती है। बेल वाली यह फसल कम जगह में भी ठीकठाक पैदावार दे देती है। गर्मी और बारिश के दिनों में इसकी मांग चढ़ जाती है, जिसका सीधा फायदा किसानों को अच्छे भाव के रूप में मिलता है।

लौकी और बैंगन में कम लागत, अच्छी आमदनी

लौकी को भी किसान एक भरोसेमंद विकल्प मान रहे हैं। इसमें खर्च ज्यादा नहीं आता और फसल जल्दी तैयार हो जाती है। हर मौसम में इसकी मांग बनी रहने के कारण किसान इससे ठीकठाक कमाई कर लेते हैं।

बैंगन उगाने वाले किसानों के लिए भी जून का वक्त उपयुक्त बताया गया है। इसकी कई उन्नत किस्में कम समय में ही उपज देने लगती हैं। बस सही देखभाल और समय पर दवा का छिड़काव करते रहें तो फसल की सेहत बनी रहती है।

टमाटर की नर्सरी और पालक की हरियाली

टमाटर लगाने का इरादा रखने वाले किसान अभी से नर्सरी तैयार कर सकते हैं। बारिश शुरू होते ही इसकी रोपाई खेतों में की जाती है। शुरुआत में इसमें थोड़ी मेहनत जरूर लगती है, पर बाजार में दाम अच्छे मिलने पर यह मेहनत वसूल हो जाती है।

पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां भी कम वक्त में कमाई का जरिया बन सकती हैं। पालक झटपट तैयार होती है और शहर से लेकर गांव तक हर जगह इसकी खपत रहती है। खास बात यह है कि कम पानी में भी इसे आसानी से उगाया जा सकता है।

विशेषज्ञ की सलाह

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी कहते हैं कि सब्जी उगाते समय किसानों को सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाले बीज चुनने चाहिए। इसके साथ खेत की तैयारी, समय पर सिंचाई और रोग की रोकथाम पर पूरा ध्यान देना जरूरी है। उनके मुताबिक इन बातों का पालन करने से पैदावार बढ़ती है और नुकसान घटता है।

परंपरागत खेती के साथ बढ़ेगी आय

अगर किसान अपनी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों को भी जगह दें तो उनकी कुल आमदनी में अच्छा इजाफा हो सकता है। कम अवधि में तैयार होने वाली ये फसलें न सिर्फ जल्दी पैसा देती हैं, बल्कि इनमें मेहनत भी अपेक्षाकृत कम लगती है। कई बार तो व्यापारी सीधे खेत से ही उपज उठा ले जाते हैं, जिससे किसानों का ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बच जाता है।

सवाल-जवाब

जून में सब्जियों की खेती क्यों फायदेमंद मानी जाती है?
इस महीने तापमान और हवा की नमी, दोनों पौधों की बढ़वार में मदद करते हैं, जिससे फसल अच्छी होती है।
इन सब्जियों की फसल कितने दिन में तैयार हो जाती है?
ये कम अवधि वाली फसलें आमतौर पर 60 से 90 दिन के भीतर तैयार हो जाती हैं।
किसानों के लिए सबसे फायदेमंद सब्जी कौन सी बताई गई है?
भिंडी को सबसे फायदेमंद माना गया है, क्योंकि यह जल्दी तैयार होती है और इसकी मांग लगातार बनी रहती है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी की मुख्य सलाह क्या है?
उन्होंने अच्छी गुणवत्ता वाले बीज चुनने, खेत की सही तैयारी, समय पर सिंचाई और रोग नियंत्रण पर ध्यान देने की सलाह दी है।
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