कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं द्वारा कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित अत्तीबेले बॉर्डर को आज यानी 10 अगस्त को पूरी तरह से जाम कर दिया गया है। कन्नड़ कार्यकर्ता वट्टल नागराज के नेतृत्व में यह प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसका मकसद दोनों राज्यों की सीमाओं पर वाहनों की आवाजाही को रोकना है। इस विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह आगामी 13 अगस्त को प्रस्तावित राज्यव्यापी कर्नाटक बंद से पहले अपनी बात को मजबूती से रखना है। सुबह करीब 11 बजे वट्टल नागराज और अन्य कन्नड़ समर्थक अत्तीबेले बॉर्डर पर एकत्रित हुए और उन्होंने दोनों राज्यों के बीच होने वाले यातायात को बाधित कर दिया।
जल विवादों और Mekedatu प्रोजेक्ट को लेकर गरमाई सियासत
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कई अहम जल विवाद मुख्य रूप से जुड़े हुए हैं। तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहे पानी के मामलों को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। इससे पहले भी 15 जुलाई को कार्यकर्ताओं ने तमिलनाडु द्वारा Mekedatu प्रोजेक्ट के विरोध के खिलाफ अत्तीबेले-हसूर बॉर्डर पर नाकेबंदी की थी। कर्नाटक इस योजना के तहत कावेरी नदी पर एक जलाशय का निर्माण करना चाहता है, लेकिन तमिलनाडु का तर्क है कि इससे उनके हिस्से के पानी के बहाव में भारी कमी आ जाएगी। इसके अलावा, महादायी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और गोवा के बीच भी लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। कर्नाटक इस पानी को मलाप्रभा बेसिन की ओर मोड़ना चाहता है, लेकिन विभिन्न अड़चनों के कारण यह प्रोजेक्ट लगातार पिछड़ता जा रहा है।
किसानों की चिंताएं और संगठनों का समर्थन
इस विरोध प्रदर्शन के पीछे एक और बड़ा कारण कावेरी नदी के पानी का तमिलनाडु की तरफ छोड़ा जाना है। विभिन्न किसान संगठनों और कन्नड़ समर्थक समूहों का कहना है कि इस साल कम बारिश होने के चलते कर्नाटक खुद भयंकर जल संकट से जूझ रहा है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार को अपनी जनता और किसानों की प्यास बुझाने के लिए पानी अपने पास ही सुरक्षित रखना चाहिए। मीडिया से बातचीत करते हुए वट्टल नागराज ने साफ किया कि यह बंद 13 अगस्त को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक प्रभावी रहेगा। उनके अनुसार, 3,000 से अधिक कन्नड़ समर्थक संगठन इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उन्हें बंद वापस लेने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया और आंदोलन को हर हाल में जारी रखने की बात कही।
आम जनजीवन पर क्या होगा असर और किन सेवाओं को मिलेगी छूट
यदि 13 अगस्त का यह प्रस्तावित बंद पूरी तरह लागू होता है, तो राज्य भर के आम नागरिकों को रोजमर्रा की गतिविधियों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान बाजार, दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रह सकते हैं। इसके अलावा, KSRTC और BMTC की बस सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, ऑटो-रिक्शा, टैक्सियां और ऐप-आधारित कैब सेवाएं सीमित रूप से सड़कों पर चल सकती हैं। राहत की बात यह है कि इस दौरान सभी आवश्यक सेवाएं चालू रहेंगी। अस्पतालों, फार्मेसियों, एंबुलेंस सेवाओं, दूध वितरण और फल-सब्जी की आपूर्ति पर बंद का कोई असर नहीं पड़ेगा और वे निर्बाध रूप से जारी रहेंगी।



















