केले के तने से बन रही चमचमाती जींस! चीन की अनोखी तकनीक देख हैरान रह गए कारोबारी हर्ष मारीवालाव्यापार
17 घंटे पहले· 0

केले के तने से बन रही चमचमाती जींस! चीन की अनोखी तकनीक देख हैरान रह गए कारोबारी हर्ष मारीवाला

मैरिको के फाउंडर हर्ष मारीवाला ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें चीन में केले के तने के रेशों से डेनिम जींस बनाई जा रही है। यह तकनीक भारत के किसानों के लिए बड़ा मौका बन सकती है।

क्या आपने कभी कल्पना की है कि जिस केले के पौधे को फल उतारने के बाद किसान फालतू मानकर खेत में ही छोड़ देते हैं, उससे आपकी पसंदीदा डेनिम जींस तैयार हो सकती है? सुनने में भले अजीब लगे, पर यह पूरी तरह सच है। जानी-मानी एफएमसीजी कंपनी मैरिको (Marico) के संस्थापक और चेयरमैन हर्ष मारीवाला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसे देखकर लोग दंग रह गए हैं। इस वीडियो में दिखाया गया है कि चीन में किस तरह केले के तने का उपयोग कर चमचमाती जींस बनाई जा रही है।

हाई-टेक फैक्ट्री में ऐसे तैयार होती है जींस

वीडियो में एक अत्याधुनिक फैक्ट्री नजर आती है, जहां मशीनों की मदद से केले के डंठल को पहले धोया और साफ किया जाता है। इसके बाद उसमें से मजबूत रेशे अलग कर धागा बुना जाता है। फिर इस धागे को नीले रंग में रंगा जाता है और मशीनों से ही काट-छांटकर बेहतरीन जींस की सिलाई की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है, क्योंकि आम कपास के मुकाबले इसमें कहीं कम पानी और रसायनों की जरूरत पड़ती है।

यह देखना वाकई दिलचस्प है कि नवाचार कैसे उस चीज़ को कीमती कच्चे माल में बदल सकता है, जिसे कभी खेती का बेकार कचरा समझा जाता था।

चीन की यह इकाई फिलीपींस में उगाए गए केले के पौधों से प्राप्त अबाका फाइबर को संसाधित कर डेनिम में तब्दील कर रही है।

30 करोड़ टन केले उगाने वाला भारत के लिए मौका

भारत दुनिया में सबसे अधिक केला उगाने वाला देश है। हमारे यहां हर साल 3 करोड़ टन से ज्यादा केले की पैदावार होती है। फल तोड़ लेने के बाद केले के पौधे का बाकी हिस्सा खेतों में ही सड़ता रहता है। अगर भारत में भी इस तकनीक को अपनाया जाए, तो किसानों की आमदनी 20 से 30% तक बढ़ सकती है। जींस बनाने के लिए कपास उगाने में जहां भारी मात्रा में पानी खर्च होता है, वहीं केले के कचरे से कपड़ा तैयार करने में पानी की बड़ी बचत होगी।

भारत के तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में छोटे पैमाने पर केले के रेशों से साड़ियां और बैग पहले से बनाए जा रहे हैं। लेकिन यदि सरकार और बड़े उद्योग घराने इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाएं, तो भारत न केवल कचरे को कंचन में बदल सकता है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में हजारों लोगों को रोजगार भी दे सकता है।

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