गांवों और छोटे कस्बों में अपना खुद का काम शुरू करने की चाह रखने वाले लोगों के लिए डिस्पोजेबल दोना और पत्तल निर्माण एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। इस काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बेहद सीमित पूंजी की दरकार होती है और तैयार उत्पाद की मांग साल के बारहों महीने बनी रहती है। महज 30 से 40 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी जुटाकर कोई भी व्यक्ति इस उत्पादन इकाई को अपने घर या छोटे परिसर में स्थापित कर सकता है। खादी ग्रामोद्योग विभाग से मिलने वाली तकनीकी और वित्तीय सहायता ने इस काम को ग्रामीण युवाओं के लिए और भी सुलभ बना दिया है।
कच्चे माल की उपलब्धता और उत्पादन गणित
इस कारोबार को सुचारू रूप से चलाने के लिए कच्चे माल की नियमित आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उत्तर प्रदेश के अमेठी और आसपास के जिलों में काम करने वाले उद्यमियों को जरूरी पेपर रोल और डाई लखनऊ, कानपुर, सुल्तानपुर तथा प्रयागराज जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से आसानी से मिल जाती हैं। मशीन में लगने वाले कागज के रोल आमतौर पर 28 से 30 किलोग्राम के सेट में आते हैं। इस एक सेट के माध्यम से लगभग 11,000 से 12,000 दोना या पत्तल तैयार किए जा सकते हैं।
बाजार में तैयार माल की बिक्री बंडलों के रूप में की जाती है, जहां प्रति बंडल 200 से 300 रुपये का थोक भाव मिल जाता है। यदि उत्पादन और वितरण की श्रृंखला नियमित रहे, तो तमाम खर्च काटकर एक उद्यमी प्रतिदिन 1,000 से 1,500 रुपये तक की शुद्ध कमाई आसानी से कर सकता है।
मशीन की खरीद और विभागीय अनुदान का गणित
दोना पत्तल तैयार करने वाली स्वचालित और अर्ध-स्वचालित मशीनें खुले बाजार में 40 से 50 हजार रुपये की सीमा में उपलब्ध हैं। जो लोग निजी स्तर पर निवेश करना चाहते हैं, वे नजदीकी शहरों के मशीनरी सप्लायर्स से सीधे खरीदारी कर सकते हैं। दूसरी ओर, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले पात्र लाभार्थियों को यह मशीन जिला खादी ग्रामोद्योग विभाग के माध्यम से पूरी तरह निशुल्क या भारी रियायत पर भी मिल सकती है। सरकारी सहयोग मिलने पर उद्यमी का पूरा ध्यान केवल कच्चे माल की व्यवस्था और तैयार माल की मार्केटिंग पर केंद्रित रहता है।
पात्रता नियम और जरूरी दस्तावेज
विभागीय योजनाओं के तहत आवेदन करने के लिए आवेदक की आयु 18 वर्ष से 50 वर्ष के मध्य होनी आवश्यक है। विभागीय अधिकारी अमरचंद पांडेय के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए लाभार्थी को आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की प्रतिलिपि, सक्रिय मोबाइल नंबर और उद्यम स्थापना से संबंधित निर्धारित प्रोफार्मा फॉर्म भरकर जमा करना होता है। विभाग द्वारा समय-समय पर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर निशुल्क मशीनें आवंटित की जाती हैं। इसके अतिरिक्त बैंकों के माध्यम से 25 से 30 प्रतिशत तक की पूंजीगत सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जाती है।
स्थानीय बाजार में मांग और सफल उदाहरण
दोना पत्तल की खपत केवल ढाबों और चाट की दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि मांगलिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान इसकी बिक्री में भारी उछाल दर्ज किया जाता है। अमेठी जिले के जगदीशपुर क्षेत्र की सुमित्रा देवी, महेश कुमार और मुसाफिरखाना की सलमा जैसे कई छोटे उद्यमी इस व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पादित माल को पास के साप्ताहिक हाटों और किराना दुकानों तक पहुंचाकर ये उद्यमी अपने परिवार का आर्थिक स्तर मजबूत कर रहे हैं।
















