पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए निजी क्षेत्र की ओर से एक व्यापक योजना सामने आई है। कोलकाता के न्यू टाउन क्षेत्र में गुरुवार को 2000 बेड की क्षमता वाले आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल 'अदाणी आरोग्य मंदिर' की आधारशिला रखी गई। इस शिलान्यास समारोह के दौरान अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी तथा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मंच पर मौजूद रहे। इस विशाल स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये की पूंजी लगाई जाएगी, जिससे राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।
स्थानीय युवाओं के लिए 10 हजार नौकरियों का सृजन
इस आधुनिक अस्पताल परियोजना के शुरू होने से पश्चिम बंगाल में रोजगार के बड़े अवसर तैयार होंगे। परियोजना के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10,000 नए रोजगार और नौकरियों के मौके पैदा होने का अनुमान है। भूमि पूजन और संबंधित मंचीय कार्यक्रम में उद्योगपति गौतम अदाणी के साथ उनकी पत्नी प्रीति अदाणी तथा APSEZ के MD एवं उनके पुत्र करण अदाणी भी सम्मिलित हुए। इस औपचारिक आयोजन से पहले गौतम अदाणी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक विशेष बैठक भी की, जिसमें राज्य के अंदर औद्योगिक प्राथमिकताओं तथा आगामी निवेश योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
वर्ष 2035 तक विभिन्न क्षेत्रों में ₹1 लाख करोड़ का रोडमैप
समारोह को संबोधित करते हुए उद्योगपति गौतम अदाणी ने राज्य के लिए अपने दीर्घकालिक विज़न को साझा किया। उन्होंने घोषणा की कि उनका व्यापारिक समूह वर्ष 2035 तक पश्चिम बंगाल में कुल 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगा। यह भारी-भरकम पूंजी केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक ही सीमित नहीं रहेगी। ग्रुप का लक्ष्य बंदरगाहों यानी पोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, बिजली उत्पादन, सड़क परिवहन तंत्र और अत्याधुनिक डेटा सेंटर जैसे बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत करना है।
कालीघाट मंदिर दर्शन और नेतृत्व पर भरोसा
समारोह के दौरान अपने विचार रखते हुए गौतम अदाणी ने इस संस्थान को आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्य, आशा और मानवीय सम्मान से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संस्था बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री की उपस्थिति के प्रति आभार प्रकट किया। अपने भाषण में उन्होंने सुबह कालीघाट जाकर मां काली से शक्ति की प्रार्थना करने का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने साहस से नेतृत्व करने, बड़े सपने देखने की इच्छा शक्ति और उन्हें साकार करने की कार्य शक्ति मांगी।
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने रेखांकित किया कि जब किसी क्षेत्र में बड़े अवसर उत्पन्न होते हैं, तो उनके साथ उतनी ही बड़ी जवाबदेही भी आती है। उन्होंने कहा कि बंगाल इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और इस परिवर्तन को वास्तविक विकास में बदलने की कमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के हाथों में है। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य आने वाले दिनों में विकास की नई दिशा तय करेगा और उनका समूह इन संभावनाओं को साकार करने में पूर्ण सहयोग देगा।
51 एकड़ में बनेगा परिसर, गरीबों के लिए 50 फीसदी बेड
परियोजना के सामाजिक पक्ष और तकनीकी ब्यौरे को साझा करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि न्यू टाउन इलाके में लगभग 51 एकड़ जमीन पर इस विशाल केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद जब गौतम अदाणी ने उनसे शिष्टाचार भेंट की थी, तब इस अस्पताल के निर्माण की रूपरेखा पर बात हुई थी। इसके महज 2 से 3 महीने के भीतर ही भूमि पूजन का काम पूरा कर लिया गया।
इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए 50 फीसदी बेड आरक्षित रखे जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि देश भर में इस प्रकार की सामाजिक प्रतिबद्धता बहुत कम देखने को मिलती है। यह सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे परिसर में एक उच्च स्तरीय मेडिकल कॉलेज और उन्नत रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना भी की जाएगी।
हेरिटेज संरक्षण और दुर्गा पूजा पर अहम समझौते
स्वास्थ्य क्षेत्र के इस बड़े प्रोजेक्ट के अतिरिक्त राज्य सरकार के साथ दो अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को लेकर सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग के नवीनीकरण और राज्य के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सव दुर्गा पूजा से जुड़े मामलों को लेकर दो अलग-अलग समझौता ज्ञापनों यानी MOU पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं।
समारोह के दौरान राजनीतिक और आर्थिक नीतियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के कामकाज पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों के कार्यकाल के दौरान राज्य औद्योगिक क्षेत्र में वह प्रगति हासिल नहीं कर पाया जो अपेक्षित थी। उन्होंने कहा कि पहले की नीतियों में केवल भत्ते की राजनीति पर जोर दिया गया था, जिससे वास्तविक औद्योगिक आधार मजबूत नहीं हो सका, जबकि अब बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन को केंद्र में रखकर कदम उठाए जा रहे हैं।

















