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लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे 3 हफ्ते में धंसा, निर्माण करने वाली पीएनसी इंफ्राटेक के पुराने रिकॉर्ड पर उठे सवालव्यापार
6 अग॰ 2026, 4:12 pm (46 दिन पहले)· 1

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे 3 हफ्ते में धंसा, निर्माण करने वाली पीएनसी इंफ्राटेक के पुराने रिकॉर्ड पर उठे सवाल

4,700 करोड़ रुपये की लागत से बने 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का 300 मीटर हिस्सा खुलने के कुछ ही दिनों बाद धंस गया। एनएचएआई ने टोल वसूली पर रोक लगा दी है और निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के पुराने विवाद भी सामने आने लगे हैं।

उत्तर प्रदेश में लखनऊ और कानपुर के बीच सफर को आसान बनाने के उद्देश्य से निर्मित 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज तीन सप्ताह बाद सड़क का 300 मीटर का हिस्सा धंस गया। चार साल के इंतजार और लगभग 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च के बाद जुलाई में जनता के लिए खोले गए इस मार्ग पर आवागमन जोखिम भरा हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माण की इस गंभीर गुणवत्ता खामी को देखते हुए टोल वसूली पर तुरंत रोक लगा दी है। इस परियोजना का निर्माण करने वाली कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड का विवादों से पुराना नाता रहा है, जिस पर पूर्व में रिश्वतखोरी और अवैध खनन जैसे मामलों में सीबीआई जांच और अदालती जुर्माने की कार्रवाई हो चुकी है।

पीएनसी इंफ्राटेक का 27 साल का इतिहास और कारोबार

पीएनसी इंफ्राटेक की नींव संस्थापक प्रदीप कुमार जैन ने वर्ष 1989 में रखी थी। हालांकि, एनएचएआई के साथ कंपनी का आधिकारिक कामकाज 27 वर्ष पहले वर्ष 1999 में शुरू हुआ था। शुरुआत में कंपनी का नाम पीएनसी कंस्ट्रक्शन कंपनी था, जिसे अगस्त 2007 में बदलकर पीएनसी इंफ्रा लिमिटेड कर दिया गया। आगरा स्थित यह कंपनी केवल एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग ही नहीं बनाती, बल्कि फ्लाईओवर, पुल, हवाई अड्डे के रनवे, पावर ट्रांसमिशन लाइन, ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं, सिंचाई परियोजनाएं, औद्योगिक विकास क्षेत्र और रेल माल ढुलाई कॉरिडोर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भी काम करती है। कंपनी ने वर्ष 2005 में कोलकाता हवाई अड्डे का रनवे तैयार किया था और उत्तर प्रदेश में 350 किलोमीटर से अधिक की पावर ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाएं पूरी की हैं।

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सड़क धंसने के पुराने मामले और सीबीआई का केस

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की घटना पहली बार नहीं हुई है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का हिस्सा माने जाने वाले लगभग 56 किलोमीटर लंबे आगरा-फिरोजाबाद मार्ग का निर्माण पूरा होने के कुछ ही महीनों बाद उसका एक बड़ा हिस्सा धंस गया था। इसके अलावा, कंपनी द्वारा करीब 6 साल पहले लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए 33 किलोमीटर लंबे न्यू दक्षिणी आगरा बाईपास की सड़क दोनों तरफ से ढह गई थी और वहां 30 से 50 फीट चौड़ा गड्ढा बन गया था।

गुणवत्ता की समस्याओं के अलावा कंपनी कानूनी विवादों में भी घिरी रही है। वर्ष 2024 में सीबीआई ने झांसी-खजुराहो हाईवे निर्माण के दौरान एनएचएआई अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में कंपनी के निदेशक और अन्य कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज किया था। इसी झांसी-खजुराहो हाईवे परियोजना के दौरान अवैध खनन का दोषी पाए जाने पर छतरपुर की अदालत ने कंपनी पर लगभग 104 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। कंपनी ने बिना अनुमति 2.45 करोड़ वर्गमीटर से अधिक मिट्टी और मोरंग का अवैध उत्खनन किया था।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और बोनस से मिली साख

विवादों के बावजूद कंपनी को देश के प्रमुख बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में बड़े ठेके मिलते रहे हैं। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बड़ोदरा सेक्शन में कंपनी ने पैकेज-29 (22.5 किलोमीटर, लागत लगभग 781 करोड़ रुपये) और पैकेज-31 (19.4 किलोमीटर, लागत लगभग 789.4 करोड़ रुपये) का काम 2-2 साल की समयसीमा में पूरा किया था। इसके अलावा, नागपुर-मुंबई सुपर कम्युनिकेशंस एक्सप्रेसवे का निर्माण समय से पहले पूरा करने के लिए एनएचएआई ने वर्ष 2025 में पीएनसी इंफ्राटेक को 56.3 करोड़ रुपये का बोनस भी दिया था।

यूपी और दक्षिण भारत में जारी बड़े प्रोजेक्ट्स

हालिया विवादों के बीच एनएचएआई ने कंपनी को उत्तर प्रदेश में नए प्रोजेक्ट सौंपे हैं। पीएनसी इंफ्राटेक को 80 किलोमीटर लंबे गोरखपुर-सोनौली लिंक मार्ग के निर्माण का 1,608 करोड़ रुपये का ठेका मिला है जिसे 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे पहले कंपनी ने वर्ष 2023 में 60 किलोमीटर लंबे जगदीशपुर-फैजाबाद 4-लेन मार्ग (1,051 करोड़ रुपये) और 60 किलोमीटर लंबे अलीगढ़-कानपुर पैकेज-5 (1,621 करोड़ रुपये) का काम पूरा किया है। दक्षिण भारत में कंपनी की सहायक फर्म अक्कलकोट हाईवे कर्नाटक में 71 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण 1,769.02 करोड़ रुपये की लागत से कर रही है, जबकि चल्लकेरे से हिरियूर तक 55 किलोमीटर सड़क का निर्माण 910 करोड़ रुपये में पूरा किया जा चुका है।

सवाल-जवाब

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली क्यों रोकी गई है?
उद्घाटन के महज 3 सप्ताह बाद एक्सप्रेसवे का 300 मीटर का हिस्सा धंस गया था, जिसके बाद एनएचएआई ने सुरक्षा चिंताओं के कारण टोल वसूली पर रोक लगा दी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण किस कंपनी ने किया है?
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण आगरा स्थित पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड कंपनी ने किया है।
पीएनसी इंफ्राटेक पर सीबीआई ने केस क्यों दर्ज किया था?
वर्ष 2024 में सीबीआई ने झांसी-खजुराहो हाईवे प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान एनएचएआई अधिकारियों को रिश्वत देने के मामले में कंपनी के अधिकारियों पर केस दर्ज किया था।
अवैध खनन के मामले में पीएनसी इंफ्राटेक पर कितना जुर्माना लगा था?
छतरपुर की अदालत ने झांसी-खजुराहो हाईवे निर्माण के दौरान 2.45 करोड़ वर्गमीटर से अधिक मिट्टी और मोरंग के अवैध उत्खनन के लिए कंपनी पर 104 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।
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