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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बिना रुके फर्राटा भरेंगी गाड़ियां: टोल बैरियर से मिलेगी आजादीव्यापार
11 जुल॰ 2026, 1:48 am (45 दिन पहले)· 2

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बिना रुके फर्राटा भरेंगी गाड़ियां: टोल बैरियर से मिलेगी आजादी

उत्तर प्रदेश को जल्द ही अपनी तरह का पहला बैरियर-लेस एक्सप्रेसवे मिलने वाला है। 13 जुलाई को शुरू होने जा रहे इस मार्ग पर टोल के लिए गाड़ियों को कहीं भी रुकना नहीं पड़ेगा।

लखनऊ और कानपुर के बीच सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश भर में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए लगातार एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रही है ताकि नागरिकों का कीमती समय और ईंधन दोनों बचाया जा सके। इस विकास यात्रा में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। आगामी 13 जुलाई को राज्य को एक महत्वपूर्ण सौगात मिलने वाली है, जो परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगी। यह भारत का चुनिंदा और प्रदेश का ऐसा पहला एक्सप्रेसवे होगा जहाँ टोल प्लाजा पर कोई फिजिकल बैरियर नहीं होगा और गाड़ियों को रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

योगी आदित्यनाथ और राजनाथ सिंह करेंगे उद्घाटन

इस आधुनिक एक्सप्रेसवे का आधिकारिक उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। इस मार्ग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बैरियर-लेस टोल प्रणाली है। अब तक दिल्ली और गुजरात जैसे गिने-चुने स्थानों पर ही ऐसी तकनीक का उपयोग होता आया है। अब लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर भी वाहन चालकों को टोल शुल्क के भुगतान या नंबर प्लेट स्कैनिंग के लिए अपना सफर बाधित नहीं करना पड़ेगा, जिससे यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।

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कैसे काम करेगी यह तकनीक?

इस पूरे मार्ग पर टोल वसूली के लिए एनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों और आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) तकनीक को एकीकृत किया गया है। टोल प्वाइंट से ठीक 500 मीटर पहले हाई-डेफिनेशन कैमरे लगे होंगे, जो तेजी से गुजरती हुई गाड़ियों की नंबर प्लेट को तुरंत पढ़ लेंगे। इसके साथ ही, आरएफआईडी रीडर फास्टैग के जरिए डेटा को सिस्टम में भेजेंगे। यह पूरी प्रक्रिया इतनी तेज है कि वाहन की गति कम किए बिना टोल राशि स्वतः ही फास्टैग से जुडे़ बैंक खाते से कट जाएगी।

पांच मुख्य स्थानों पर टोल प्लाजा का जाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 62 किलोमीटर है। एनएचएआई के अनुसार, इस पूरे मार्ग पर टोल शुल्क का निर्धारण इस आधार पर होगा कि वाहन ने कहां से प्रवेश किया है और कहां से बाहर निकला है। इस आधुनिक मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम के तहत पूरे मार्ग पर पांच अलग-अलग स्थानों पर टोल प्लाजा बनाए गए हैं। इनमें लखनऊ के मिरानपुर पिनवट, खांडे देव और बनी के साथ-साथ उन्नाव का लालगंज और कानपुर के आजाद नगर के समीप टोल प्वाइंट प्रमुख हैं।

तकनीक का सटीक समन्वय

एनपीआर एक कैमरा आधारित उन्नत प्रणाली है, जिसमें उच्च क्षमता के कैमरे गतिशील वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़कर उनका एंट्री और एग्जिट रिकॉर्ड डिजिटल रूप से तैयार करते हैं। दूसरी ओर, आरएफआईडी एक रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित तकनीक है जिस पर भारत का फास्टैग तंत्र काम करता है। यह प्रणाली पल भर में बैंक खाते के डेटा तक पहुंच बनाती है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप के बिना सटीक टोल कटौती संभव होती है।

सवाल-जवाब

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कब शुरू होगा?
इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को होने वाला है।
यह एक्सप्रेसवे अन्य मार्गों से कैसे अलग है?
यह एक बैरियर-लेस एक्सप्रेसवे है, जहां टोल के लिए गाड़ियों को रुकने की जरूरत नहीं पड़ती।
टोल टैक्स का भुगतान कैसे होगा?
टोल टैक्स की वसूली ANPR कैमरों और RFID तकनीक के जरिए सीधे फास्टैग से ऑटोमैटिक तरीके से हो जाएगी।
इस एक्सप्रेसवे पर कितने टोल प्वाइंट बनाए गए हैं?
इस पर कुल 5 टोल प्वाइंट बनाए गए हैं।
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