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गोंडा के किसान अखिलेश ने मचान विधि से शुरू की कद्दू की खेती, कमाई जानकर दंग रह जाएंगे आपव्यापार
11 जुल॰ 2026, 1:46 am (45 दिन पहले)· 5

गोंडा के किसान अखिलेश ने मचान विधि से शुरू की कद्दू की खेती, कमाई जानकर दंग रह जाएंगे आप

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक किसान अखिलेश कुमार मौर्य ने मचान तकनीक अपनाकर कद्दू की खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया है। पांचवीं पास इस किसान की कहानी अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बनी है।

गोंडा जिले के रहने वाले एक प्रगतिशील किसान ने खेती के पुराने तौर-तरीकों को छोड़कर मचान विधि को अपनाया है, जिससे न केवल उनकी फसल की गुणवत्ता में सुधार आया है बल्कि आमदनी भी कई गुना बढ़ गई है। गोंडा के रहने वाले अखिलेश कुमार मौर्य ने जब से अपने खेतों में मचान बनाकर कद्दू की बेलों को ऊपर चढ़ाना शुरू किया है, तब से उन्हें बाजार में अपनी उपज के लिए काफी बेहतर दाम मिलने लगे हैं। इस नई पद्धति में कद्दू के फल जमीन को नहीं छूते, जिससे वे सड़ने से बचे रहते हैं और उनकी चमक बनी रहती है।

शिक्षा के बाद किसानी का चुनाव

अखिलेश कुमार मौर्य की पढ़ाई-लिखाई केवल पांचवीं कक्षा तक ही हुई है। घर की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और उन्होंने खेती को ही अपनी आजीविका का जरिया बनाने का फैसला किया। आज वे अपनी मेहनत के दम पर एक से डेढ़ बीघा जमीन पर मचान विधि के जरिए कद्दू उपजा रहे हैं। अखिलेश बताते हैं कि आर्थिक तंगी के दौर में खेती से जुड़ी नई तकनीकें अपनाना उनके लिए एक चुनौतीपूर्ण लेकिन सही फैसला साबित हुआ है, जिसने उनके जीवन स्तर को बदलने में मदद की है।

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लागत और मुनाफे का गणित

मचान तकनीक के आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए अखिलेश ने बताया कि एक से डेढ़ बीघा खेत में मचान तैयार करने में शुरुआती तौर पर लगभग 4 हजार से 5 हजार रुपये का खर्च आता है। वहीं, अगर फसल के उत्पादन की बात करें तो उन्हें इस खेती से 40 हजार से 50 हजार रुपये तक की कुल आय होने की उम्मीद है। हालांकि, वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि कमाई का यह आंकड़ा पूरी तरह से बाजार में चल रहे भाव पर निर्भर करता है, जो घट-बढ़ सकता है।

मचान विधि के फायदे

इस आधुनिक तकनीक के लाभ गिनाते हुए किसान अखिलेश बताते हैं कि मचान पर बेल होने की वजह से पौधे के हर हिस्से तक पर्याप्त धूप और हवा पहुंचती है। इससे कद्दू की बेलों में लगने वाले रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है, जिससे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च भी घटता है। फल जमीन से ऊपर होने के कारण वे पूरी तरह साफ-सुथरे रहते हैं और उन्हें तोड़ना भी काफी आसान हो जाता है। शुरुआत में मचान का ढांचा तैयार करने में जो खर्च आता है, वह एक बार का निवेश होता है क्योंकि इस मचान का इस्तेमाल कई मौसमों तक किया जा सकता है। अखिलेश का मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों का तालमेल बिठाकर कोई भी किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है।

सवाल-जवाब

मचान विधि से कद्दू की खेती करने में कुल कितनी लागत आती है?
एक से डेढ़ बीघा खेत में मचान तैयार करने में शुरुआती तौर पर लगभग 4 से 5 हजार रुपये का खर्च आता है।
इस विधि से किसान को कितना मुनाफा होने की उम्मीद है?
इस तकनीक से एक से डेढ़ बीघा कद्दू की खेती में लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक की आय होने की उम्मीद है।
मचान विधि के मुख्य फायदे क्या हैं?
मचान विधि से फसल में हवा और धूप अच्छी तरह पहुंचती है, जिससे बीमारियों का खतरा कम होता है, फल साफ रहते हैं और तुड़ाई आसान हो जाती है।
क्या मचान बार-बार बनाना पड़ता है?
नहीं, मचान का ढांचा एक बार तैयार करने के बाद इसे कई सीजन तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
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