बिहार के गांव अब खेती के साथ साथ मछली पालन को कमाई का बड़ा जरिया बना रहे हैं, और सरकार इस काम में जमकर मदद कर रही है। अगर आप भी इस कारोबार से जुड़ना चाहते हैं तो गया जिले में आपके लिए कई दरवाजे खुल रहे हैं। राज्य में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं एक साथ चल रही हैं, जिनमें तालाब खुदवाने से लेकर मछली का बीज तैयार करने तक हर स्तर पर आर्थिक सहायता का इंतजाम है।
इन्हीं में से एक है पठारी क्षेत्र तालाब निर्माण आधारित मत्स्य पालन योजना, जो खास तौर पर पठारी इलाके के लोगों के लिए बनाई गई है। इसके तहत अनुसूचित जाति के लोगों को तालाब खुदवाने में मदद दी जाती है। गया जिले में इस योजना के अंतर्गत 15 इकाई तालाब खोदे जाने हैं।
एक इकाई में क्या क्या मिलता है
हर इकाई में आधा एकड़ का तालाब, बोरिंग, सोलर पंप सेट, शेड और इनपुट लागत की राशि शामिल है। एक इकाई पर कुल लागत 10 लाख 34 हजार रुपए आती है, जिसमें से 80% रकम अनुदान के रूप में दी जाती है। यानी किसान को अपनी जेब से बहुत कम पैसा लगाना पड़ता है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी विकास योजना के जरिए सरकार उन्नत मछली बीज तैयार करने में भी सहारा दे रही है। इस योजना के तहत गया जिले में कुल 12 इकाइयां लगाई जाएंगी।
अब तक बीज के लिए दूसरे राज्यों का मुंह ताकना पड़ता था
अभी मछली पालकों को बीज के लिए दूसरे राज्यों, खासकर पश्चिम बंगाल पर निर्भर रहना पड़ता है। बीज उत्पादन शुरू होने के बाद मछली पालक खुद अपने तालाब में मछली तैयार कर सकेंगे और बीज बेचकर अच्छी कमाई भी कर सकेंगे। बीज तैयार करने के लिए तालाब में अलग अलग आकार के मछली बीज डाले जाते हैं।
पश्चिम बंगाल पर यह निर्भरता घटाने के मकसद से राज्य के कई जिलों में आधुनिक हैचरी विकसित की जा रही हैं। इसी कड़ी में गया जिले में बीज उत्पादन के लिए 12 इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
कितनी सब्सिडी, किस वर्ग को
उन्नत मछली बीज उत्पादन के लिए जिले में चार इकाई सामान्य वर्ग, चार इकाई अत्यंत पिछड़ा वर्ग और चार इकाई अनुसूचित जाति के लोगों के लिए तय की गई हैं। हर इकाई की लागत 1 लाख रुपए है। इसमें सामान्य वर्ग के लोगों को 50% सब्सिडी मिलेगी, जबकि अत्यंत पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के लोगों को 70% सब्सिडी दी जा रही है।
इसके साथ ही तालाब मत्स्यिकी विशेष सहायता योजना के तहत गया जिले में कुल 23 इकाइयां लगाई जानी हैं। इनमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए 12 इकाई और अनुसूचित जाति के लोगों के लिए 11 इकाई रखी गई हैं। इस योजना की हर इकाई में आधा एकड़ का तालाब, बोरिंग, शेड, इनपुट लागत और एरियेटर दिया जाता है। एक इकाई की लागत 5 लाख 72 हजार रुपए है, जिस पर 70% सब्सिडी दी जा रही है।
आवेदन कैसे करें
गया जिला मत्स्य विभाग के विस्तार पदाधिकारी नागेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के जो भी इच्छुक किसान मत्स्य पालन में अपना भविष्य तलाश रहे हैं, वे fisheries.bihar.gov.in वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।













