क्रिप्टो कारोबार से डोनाल्ड ट्रंप की मोटी कमाई सामने आने के बाद अमेरिका की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। इसी हफ्ते हुए खुलासे में पता चला कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अपने क्रिप्टो कारोबार से 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा कमाए। इसके बाद न्यूयॉर्क की सीनेटर किर्स्टन गिलिब्रैंड ने एक बार फिर यह मांग तेज कर दी है कि नेताओं और उनके पति या पत्नी को डिजिटल एसेट जारी करने और उनका प्रचार करने से पूरी तरह रोका जाए।
यह प्रस्तावित रोक मीम कॉइन पर भी लागू होगी, जिनसे पिछले साल ट्रंप और उनकी पत्नी, फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप, दोनों को फायदा हुआ था। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति ने अकेले अपने सोलाना पर आधारित मीम कॉइन से ही 635 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई की।
गिलिब्रैंड की दो-टूक बात
गिलिब्रैंड ने अपने बयान में कहा, "यह एक साधारण सी समझदारी वाली शर्त है, जिसे दोनों दलों का व्यापक समर्थन मिलना चाहिए। सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों और उनके जीवनसाथियों को मीम कॉइन जारी नहीं करने चाहिए।"
उन्होंने आगे जोड़ा, "हम अपने फायदे के लिए किए जा रहे इस लेनदेन को उस मौके को बर्बाद नहीं करने दे सकते, जिससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा मजबूत हो, गैरकानूनी वित्त पर लगाम लगे और उन लाखों अमेरिकियों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ें, जिन्हें हमारी वित्तीय व्यवस्था पीछे छोड़ चुकी है।"
पहले भी उठा चुकी हैं आवाज
गिलिब्रैंड डेमोक्रेटिक सीनेटरों में सबसे ज्यादा क्रिप्टो-समर्थक चेहरों में गिनी जाती हैं, और साथ ही वे संसद के कामकाज में नैतिकता को लेकर मुहिम की अगुवाई भी कर रही हैं। इसी साल पहले उन्होंने दोनों दलों के साथ मिलकर एक कोशिश की अगुवाई की थी, जिसका मकसद कांग्रेस के सदस्यों को प्रिडिक्शन मार्केट्स पर दांव लगाने से रोकना था। यह कदम इनसाइडर ट्रेडिंग की बढ़ती आशंकाओं के बीच उठाया गया, जिनमें यह आरोप भी शामिल था कि व्हाइट हाउस के करीबी लोग अंदरूनी जानकारी का गलत फायदा उठाकर कमाई कर सकते हैं।
वे यह मांग भी खुलकर करती रही हैं कि सार्वजनिक पद पर रहने के दौरान अधिकारियों को शेयरों की खरीद-फरोख्त से रोका जाए।
उन्होंने कहा, "कार्रवाई का वक्त अभी है, और इसमें ऐसे नैतिक सुधार भी शामिल होने चाहिए जो कांग्रेस के सदस्यों, राष्ट्रपति और उनके जीवनसाथियों को अपने पद का फायदा उठाकर पैसा कमाने से रोकें।"
क्रिप्टो कानून पर अटकी गाड़ी
नैतिकता से जुड़े ये प्रावधान एक अहम क्रिप्टो कानून, क्लैरिटी एक्ट मार्केट स्ट्रक्चर बिल, को आगे बढ़ाने में भी टकराव की वजह बने हुए हैं। मई में सीनेटर ने कहा था कि जब तक बिल में ऐसा नैतिक प्रावधान नहीं जुड़ता जो राष्ट्रपति ट्रंप के कामकाज पर भी लागू हो, तब तक यह बिल पास नहीं होगा।
लेकिन जब यह बिल सीनेट के एक अहम मतदान से आगे बढ़ा, तब तक सार्वजनिक अधिकारियों के लिए नैतिक बंदिशों को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई थी। इसके बावजूद, गैलेक्सी के शोधकर्ताओं के मुताबिक इस साल बिल के पास होने की संभावना घटकर करीब 50-50 रह गई है। उन्होंने इसकी वजह बिल की विषय-वस्तु नहीं, बल्कि समय की कमी बताई है।













