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100% शुद्धता के दावे पर FSSAI के प्रतिबंध के खिलाफ डाबर को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश पर लगाई रोकव्यापार
7 अग॰ 2026, 2:27 pm (16 घंटे पहले)· 0

100% शुद्धता के दावे पर FSSAI के प्रतिबंध के खिलाफ डाबर को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश पर लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI के उस आदेश पर interim stay लगा दिया है, जिसमें डाबर के उत्पादों पर 100% प्योर, नेचुरल और ऑर्गेनिक जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी।

एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डाबर इंडिया को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा जारी उस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत कंपनी के कई लोकप्रिय खाद्य और पेय उत्पादों की पैकेजिंग पर '100% शुद्ध', '100% प्राकृतिक' और '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावों के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया गया था। जस्टिस अमित महाजन की एकलपीठ ने डाबर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार, FSSAI और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक FSSAI का प्रतिबंधात्मक आदेश प्रभावी नहीं रहेगा और डाबर अपने मौजूदा लेबलिंग और दावों के साथ उत्पादों की बिक्री जारी रख सकेगी।

नियामक के निशाने पर आए डाबर के कौन-कौन से उत्पाद?

FSSAI ने 3 अगस्त को एक आदेश जारी कर डाबर इंडिया को निर्देश दिया था कि वह अपने कई प्रमुख उत्पादों पर 100% Pure, 100% Natural और 100% Organic जैसे विज्ञापनों और लेबल दावों के साथ बिक्री तुरंत बंद करे। नियामक का मानना था कि किसी उत्पाद को '100 प्रतिशत' शुद्ध या प्राकृतिक बताना एक ऐसा अस्पष्ट दावा है जिसका वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ रूप से भौतिक सत्यापन नहीं किया जा सकता। FSSAI के अनुसार, ऐसे दावों में आम उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की क्षमता होती है। इस आदेश के तहत डाबर के जिन प्रमुख उत्पादों को लक्षित किया गया था, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं

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  • डाबर हनी: डाबर हनी, डाबर हनी स्क्वीज़ी, डाबर सुंदरबन्स हनी और डाबर ऑर्गेनिक हनी।
  • सिरका और तेल: डाबर हिमालयन एप्पल साइडर विनेगर और डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल।
  • डेयरी और नारियल उत्पाद: डाबर काउ घी, रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वॉटर और डाबर होममेड कोकोनट मिल्क।

अदालत में डाबर की मुख्य कानूनी दलीलें

FSSAI के इस सख्त रुख के खिलाफ डाबर इंडिया ने तुरंत दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत में डाबर की ओर से पेश हुए वकीलों ने तर्क दिया कि नियामक ने आदेश पारित करते समय तय प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह उल्लंघन किया है। कंपनी ने अदालत को बताया कि Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 के तहत यदि नियामक को किसी दावे पर आपत्ति थी, तो उसे कार्रवाई से पहले कंपनी को कारण बताओ नोटिस या सुधार नोटिस जारी करना चाहिए था। डाबर का पक्ष था कि FSSAI ने उसे अपनी बात रखने, तकनीकी स्पष्टीकरण देने या अपने दावों के पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने का कोई अवसर दिए बिना ही सीधे बिक्री रोकने का कठोर कदम उठा लिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

कारोबार और रिटेल नेटवर्क पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव की दलील

डाबर ने अपनी याचिका में अदालत को यह भी अवगत कराया कि FSSAI के इस अचानक आए आदेश से उसके व्यापारिक संचालन पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ रहा था। यदि इस आदेश को तुरंत पूरी तरह लागू करना पड़ता, तो कंपनी को बाजार से करोड़ों रुपये के उत्पादों को वापस मंगाना पड़ता और उनकी पैकेजिंग व री-लेबलिंग की एक जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता। इससे न केवल भारी वित्तीय नुकसान होता, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हो जाती। डाबर ने यह भी उजागर किया कि FSSAI द्वारा इस आदेश को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक किए जाने के बाद कई ई-कॉमर्स कंपनियों, ऑनलाइन रिटेलर्स और चैनल पार्टनर्स ने प्रभावित उत्पादों की बिक्री और आपूर्ति पर रोक लगाना शुरू कर दिया था, जिससे कंपनी की साख और कारोबारी हितों को झटका लग रहा था।

उत्पाद सुरक्षा बनाम पैकेजिंग दावों का अंतर

सुनवाई के दौरान डाबर की याचिका का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि FSSAI ने अपने पूरे आदेश में कहीं भी डाबर के उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा या शुद्धता पर कोई संदेह नहीं जताया है। नियामक ने उत्पादों को असुरक्षित, हानिकारक या मिलावटी घोषित नहीं किया है। विवाद पूरी तरह से पैकेजिंग लेबल पर लिखे गए शब्दों और विज्ञापनों में किए गए दावों तक सीमित है। डाबर ने स्पष्ट किया कि जब कोई उत्पाद किसी एक ही शुद्ध प्राकृतिक घटक से तैयार किया जाता है या पूरी तरह प्राकृतिक स्रोतों से लिया जाता है, तो उस पर '100% प्योर' या '100% नेचुरल' लिखना अपने आप में भ्रामक नहीं माना जा सकता।

कानूनी शक्तियों के इस्तेमाल पर उठे सवाल और आगे का रुख

कंपनी ने Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 18 का हवाला देते हुए FSSAI अधिकारियों की कार्यप्रणाली को चुनौती दी। डाबर का तर्क था कि अधिनियम की धारा 18 मुख्य रूप से नियामक के लिए नीतिगत और मार्गदर्शक सिद्धांत तय करती है। इसके आधार पर किसी नामित अधिकारी को स्वतंत्र रूप से किसी स्थापित उत्पाद की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सीधा अधिकार प्राप्त नहीं होता, जब तक कि नियमों के विशिष्ट उल्लंघन को सिद्ध न किया गया हो। FSSAI के आदेश में यह स्पष्ट व्याख्या नहीं थी कि डाबर के शब्द किस प्रकार कानून का उल्लंघन करते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित महाजन ने इन सभी दलीलों पर विचार करते हुए FSSAI के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। अब अगली सुनवाई में यह तय होगा कि खाद्य विज्ञापनों में '100%' दावों के निर्धारण और नियमन के लिए क्या कानूनी मानक तय किए जाने चाहिए।

सवाल-जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर मामले में क्या आदेश दिया है?
कोर्ट ने FSSAI के 3 अगस्त के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसने डाबर के कई उत्पादों पर 100% प्योर या ऑर्गेनिक लिखने पर बैन लगाया था।
FSSAI ने डाबर के किन उत्पादों पर आपत्ति जताई थी?
FSSAI ने डाबर हनी, डाबर काउ घी, डाबर विनेगर, रियल एक्टिव टेंडर कोकोनट वॉटर और डाबर होममेड कोकोनट मिल्क समेत कई उत्पादों के दावों पर सवाल उठाया था।
क्या FSSAI ने डाबर के उत्पादों को असुरक्षित या मिलावटी माना है?
नहीं, FSSAI ने उत्पादों को असुरक्षित या मिलावटी नहीं बताया था। विवाद केवल लेबलिंग और विज्ञापनों में '100%' जैसे शब्दों के इस्तेमाल से जुड़ा है।
अदालत में डाबर का मुख्य तर्क क्या था?
डाबर ने दलील दी कि FSSAI ने आदेश जारी करने से पहले शो-कॉज या इम्प्रूवमेंट नोटिस नहीं दिया, जिससे कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला।
इस मामले की सुनवाई किस जज की अदालत में हुई?
इस याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित महाजन की अदालत में सुनवाई हुई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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