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नागौर में मौसम बना किसानों का साथी: चार साल बाद अगेती बारिश ने 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा में करवाई जल्दी बुवाईव्यापार
14 जून 2026, 4:52 pm (90 दिन पहले)· 0

नागौर में मौसम बना किसानों का साथी: चार साल बाद अगेती बारिश ने 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा में करवाई जल्दी बुवाई

नागौर जिले में समय से पहले हुई बारिश ने खरीफ की बुवाई को रफ्तार दे दी है। आधिकारिक सीजन शुरू होने से पहले ही 2.08 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है।

नागौर जिले के किसानों के लिए इस बार आसमान बेहद मेहरबान रहा है। आमतौर पर खरीफ की खेती जून के आखिरी हफ्ते में या मानसून के जोर पकड़ने के बाद ही परवान चढ़ती है, लेकिन इस मर्तबा जून का दूसरा सप्ताह आते-आते खेतों में बड़े पैमाने पर बीज पड़ने लगे। इसकी सबसे बड़ी वजह रही पश्चिमी विक्षोभ और एक के बाद एक सक्रिय हुए चक्रवाती तंत्र, जिनकी बदौलत बारिश तय वक्त से पहले बरस गई और किसानों को खेतों में जल्दी उतरने का सुनहरा मौका मिल गया।

चार साल बाद लौटा यह नजारा

पिछले चार वर्षों में यह पहला मौका है जब किसान प्री-मानसून और आधिकारिक बुवाई सीजन की शुरुआत से पहले ही बड़े स्तर पर खेती का काम निपटा रहे हैं। आधिकारिक खरीफ बुवाई सीजन 15 जून से शुरू होता है, मगर उससे पहले ही जिले में 25 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में बुवाई का काम पूरा हो चुका है। यानी समय से पहले हुई बरसात का सीधा और साफ असर खेतों पर दिखाई देने लगा है।

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आंकड़े क्या कहते हैं

कृषि विभाग के मुताबिक नागौर जिले की औसत वार्षिक वर्षा 351 मिलीमीटर है। इसके मुकाबले 13 जून तक जिले की नौ प्रमुख तहसीलों में औसतन 136 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। खास बात यह रही कि अकेले 1 जून से 13 जून के बीच ही करीब 51 मिलीमीटर पानी बरसा, जो जिले की सालाना औसत बारिश का लगभग 15 प्रतिशत है। इतनी जल्दी और इतनी अच्छी नमी मिलने से ही बुवाई ने रफ्तार पकड़ी।

2.08 लाख हेक्टेयर से अधिक में बुवाई

कृषि विभाग ने इस साल जिले में खरीफ फसलों की बुवाई का कुल लक्ष्य 8.32 लाख हेक्टेयर रखा है। इसमें से अब तक 2.08 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है। यदि मौसम इसी तरह साथ देता रहा तो 20 जून तक जिले के आधे से अधिक हिस्से में बुवाई पूरी होने की उम्मीद है।

किस फसल में कितनी बुवाई

फसलवार तस्वीर देखें तो दलहन में मूंग सबसे आगे चल रही है। मूंग के 4.10 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 90,200 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है, जबकि मोठ की बुवाई अपने निर्धारित लक्ष्य का 18 प्रतिशत आंकड़ा पार कर चुकी है। अनाज वर्ग में बाजरा सबसे प्रमुख है, जिसके 1.55 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के बदले 32,550 हेक्टेयर में बीज डाले जा चुके हैं। सबसे तेज रफ्तार कपास की अगेती बुवाई की रही है, जहां लक्ष्य का करीब 60 प्रतिशत क्षेत्र पहले ही कवर हो चुका है। इसके साथ ग्वार की बुवाई भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

मानसून की बारिश बनेगी वरदान

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग चौधरी का कहना है कि नागौर में आमतौर पर खरीफ की बुवाई 15 जून के बाद ही गति पकड़ती है, मगर इस बार पश्चिमी विक्षोभ की वजह से किसानों को अगेती बुवाई का बड़ा फायदा मिला है। उनके मुताबिक इस शुरुआती बढ़त के दम पर अनाज और दलहनी फसलों का रकबा तय लक्ष्य से भी आगे निकल सकता है। खास तौर पर बाजरे का रकबा इस बार 10 से 15 हजार हेक्टेयर तक बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अगेती बुवाई होने के कारण आने वाली मानसूनी बारिश इन फसलों के लिए वरदान साबित होगी, जिससे जिले में इस बार बेहतर पैदावार की प्रबल संभावना बन रही है।

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