नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बहुप्रतीक्षित IPO
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को लाने के लिए SEBI के पास आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए हैं। इस खबर से शेयर बाजार के निवेशकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। IPO से पहले, NSE ने अपना संभावित बाजार पूंजीकरण लगभग 4.75 लाख करोड़ रुपये बताया है। यह घोषणा निवेशकों को लगभग 9 साल पहले के उस समय की याद दिला रही है, जब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने अपना IPO लॉन्च किया था। निवेशक उत्सुक हैं कि इन दोनों प्रमुख एक्सचेंजों में से कौन सा बेहतर निवेश का अवसर प्रस्तुत करता है।
NSE की IPO योजनाएं
हाल ही में, NSE ने बताया है कि उसने अपने IPO के लिए 20 से अधिक बैंकरों को नियुक्त किया है, और विस्तृत रिपोर्ट पहले ही SEBI को सौंप दी गई है। BSE की तरह, NSE भी एक कंपनी के रूप में खुद को सूचीबद्ध करना चाहता है। जबकि BSE 2017 में ही सूचीबद्ध हो चुका है, NSE की लिस्टिंग अभी बाकी है। दोनों एक्सचेंज एक-दूसरे के सीधे प्रतिस्पर्धी हैं, और निवेशक विभिन्न आंकड़ों के आधार पर उनकी तुलना कर रहे हैं।
BSE के पिछले IPO का विश्लेषण
BSE ने 2017 में अपना IPO पेश किया था, जिसकी प्रति शेयर कीमत 805 से 806 रुपये के बीच थी। इस IPO के माध्यम से बाजार से कुल 1,241 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। तुलनात्मक रूप से, NSE के आगामी IPO की ग्रे मार्केट में कीमत 2,055 रुपये प्रति शेयर बताई जा रही है, जो हाल ही में सूचीबद्ध हुए कई शेयरों के भाव से काफी अधिक है। NSE अपने IPO को ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत 14.89 करोड़ शेयरों के साथ लाएगा, जिसमें कंपनी के शेयरधारक अपनी 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे। इन शेयरों की फेस वैल्यू 1 रुपये होगी। इस पेशकश में SBI भी 2.47 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। NSE के IPO की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है, जबकि BSE के शेयरों की बुकिंग 23 जनवरी, 2017 को शुरू हुई थी, जिसमें 2 रुपये की फेस वैल्यू पर शेयर धारकों की हिस्सेदारी लॉन्च की गई थी।
बाजार मूल्यांकन की तुलना
दोनों एक्सचेंजों के मूल्यांकन की बात करें तो, NSE के 2,055 रुपये के अनुमानित मूल्य बैंड के आधार पर, इसका बाजार पूंजीकरण लगभग 5.1 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। इस मूल्यांकन के साथ, NSE भारत का सबसे महंगा एक्सचेंज बन जाएगा। दूसरी ओर, BSE का शेयर वर्तमान में लगभग 4,000 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा है, जिससे इसका मूल्यांकन लगभग 1.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच जाता है। NSE ने अपने IPO में कुल 247.5 करोड़ शेयर उतारने की बात कही है, जबकि BSE 40.6 करोड़ शेयरों के साथ कारोबार कर रहा है।
मूल्यांकन के विभिन्न मापदंडों के अनुसार, BSE कुछ क्षेत्रों में NSE से आगे दिख रहा है। BSE का प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेशियो 66 गुना है, जबकि NSE का 49 गुना है। इसी तरह, BSE का प्राइस-टू-बुक रेशियो 24 गुना है, जो NSE के 16 गुना से अधिक है। प्राइस-टू-सेल्स रेशियो में भी BSE 34 गुना के साथ NSE के 27 गुना से आगे है।
राजस्व और लाभ में कौन आगे?
वित्तीय प्रदर्शन के मोर्चे पर, NSE का राजस्व वित्तवर्ष 2022 में 8,313 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्तवर्ष 2026 में 16,601 करोड़ रुपये हो गया है, जो सालाना आधार पर लगभग 18.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। हालांकि, BSE ने इस अवधि में और भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। कंपनी का राजस्व 2022 में 743 करोड़ रुपये था, जो 2026 तक बढ़कर 4,834 करोड़ रुपये हो गया, जो सालाना 59.7 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है।
लाभप्रदता के संदर्भ में भी, BSE ने बेहतर वृद्धि दर्ज की है। NSE का कर-पूर्व लाभ (PBT) 2022 में 5,198 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026 में 10,302 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 18.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई। इसके विपरीत, BSE का PBT 2022 में 245 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026 में 2,487 करोड़ रुपये हो गया, जो सालाना 78.5 प्रतिशत की शानदार वृद्धि को दर्शाता है। ये आंकड़े बताते हैं कि जहां NSE का आकार और कुल लाभ अधिक है, वहीं BSE ने हाल के वर्षों में वृद्धि दर के मामले में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।













