भारत के औद्योगिक परिदृश्य में कुछ कारोबारी फैसले ऐसे साबित हुए हैं जिन्होंने केवल एक समूह का दायरा नहीं बढ़ाया, बल्कि समूचे देश के आर्थिक ढांचे और जनजीवन को एक नई दिशा दी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की कारोबारी यात्रा इसी दूरगामी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करती है। पारंपरिक पेट्रोकेमिकल और ऊर्जा क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब खड़ा करने से लेकर करोड़ों भारतीयों की जेब तक सस्ता 4G डेटा पहुंचाने तक, रिलायंस ने हर बड़े मोड़ पर अपनी अभूतपूर्व निर्माण क्षमता का परिचय दिया है। इन दोनों ऐतिहासिक पहलों ने कंपनी को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के साथ-साथ देश की बुनियादी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस किया।
धीरूभाई अंबानी की सोच और जामनगर रिफाइनरी का रिकॉर्ड निर्माण
रिलायंस इंडस्ट्रीज की आधारशिला संस्थापक धीरूभाई अंबानी ने इस दृष्टिकोण के साथ रखी थी कि भारत में वैश्विक स्तर के विशालकाय औद्योगिक प्रोजेक्ट्स साकार किए जा सकते हैं। अपने पिता के इस व्यापक विजन को हकीकत में बदलने की जिम्मेदारी मुकेश अंबानी ने अपने कंधों पर ली। इस बड़े मिशन को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के दौरान स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और स्वदेश लौटकर समूह के विस्तार में पूरी ताकत झोंक दी।
गुजरात के जामनगर में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती उसका आकार और समयबद्धता थी। जटिल इंजीनियरिंग, विशाल वित्तीय निवेश, उन्नत तकनीक और अनुशासित कार्यप्रणाली के समन्वय से इस पूरे प्रोजेक्ट को महज 36 महीनों के भीतर खड़ा कर दिया गया। दुनिया भर में अपनी तरह के इस सबसे बड़े रिफाइनिंग परिसर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह साबित कर दिया कि भारतीय उद्योगपति सबसे कठिन और बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण को तय समयसीमा में पूरा करने में सक्षम हैं।
साल 2016 में जियो का आगमन और देश का डिजिटल कायाकल्प
ऊर्जा क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करने के बाद रिलायंस ने भारतीय दूरसंचार बाजार में कदम रखने का साहसिक निर्णय लिया। साल 2016 में रिलायंस ने जियो की औपचारिक शुरुआत की, जिसने देश के दूरसंचार सेक्टर की पूरी तस्वीर बदल दी। मुफ्त वॉयस कॉलिंग और अत्यधिक किफायती हाई-स्पीड इंटरनेट डेटा की पेशकश करके जियो ने डेटा को आम नागरिकों की दैनिक आवश्यकता बना दिया।
बाजार में उतरते ही जियो ने अभूतपूर्व तेजी दिखाते हुए सिर्फ 170 दिनों के भीतर 10 करोड़ ग्राहकों को अपने नेटवर्क से जोड़ लिया। इस डिजिटल क्रांति का असर तुरंत देखने को मिला। भारत में ऑनलाइन पढ़ाई, वीडियो कॉलिंग, डिजिटल पेमेंट और इंटरनेट आधारित सेवाओं के इस्तेमाल में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। मोबाइल डेटा उपयोग के मामले में वैश्विक पायदान पर भारत की स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हुआ।
जियो की इस कनेक्टिविटी ने सिर्फ महानगरों तक अपनी मौजूदगी सीमित नहीं रखी। देश के सुदूर गांवों, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और आदिवासी अंचलों तक हाई-स्पीड नेटवर्क पहुंचने से दूरदराज के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं और ऑनलाइन रोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए।
ऊर्जा से तकनीक तक रिलायंस का नया आयाम
वैश्विक कोरोना महामारी के संकट काल में जब दफ्तर, स्कूल, व्यापार और सरकारी सेवाएं घरों से संचालित होने लगीं, तब डिजिटल कनेक्टिविटी ने देश की अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाए रखने में रीढ़ की हड्डी का काम किया। इस मुश्किल समय ने यह प्रमाणित कर दिया कि हाई-स्पीड इंटरनेट अब विलासिता नहीं बल्कि बुनियादी नागरिक जरूरत बन चुका है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ऊर्जा और रिफाइनिंग की अपनी मजबूत नींव पर खड़े होकर आधुनिक दूरसंचार, क्लाउड प्लेटफॉर्म और उभरती डिजिटल तकनीकों में व्यापक निवेश जारी रखा है। समूह की मूल रणनीति हमेशा से यह रही है कि भारत के घरेलू बाजार में व्यापक पैमाने पर टिकाऊ कारोबार खड़े किए जाएं, जो विश्वस्तरीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों को हर मोर्चे पर कड़ी टक्कर दे सकें।


















