कम पानी में ज्यादा पैदावार: यूपी की माइक्रो इरीगेशन योजना में 90% तक सब्सिडी, जानिए पूरा गणितव्यापार
3 घंटे पहले· 2

कम पानी में ज्यादा पैदावार: यूपी की माइक्रो इरीगेशन योजना में 90% तक सब्सिडी, जानिए पूरा गणित

उत्तर प्रदेश माइक्रो इरीगेशन प्रोजेक्ट के तहत किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर लगाने पर 90 प्रतिशत तक का अनुदान मिल रहा है, जिससे करीब 70 प्रतिशत पानी की बचत और बेहतर पैदावार संभव है।

खेती में पानी की बढ़ती किल्लत के बीच उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के लिए एक ऐसी राह लेकर आई है जिसमें कम पानी से ज्यादा खेत सींचे जा सकते हैं और जेब पर बोझ भी न के बराबर पड़ता है। उत्तर प्रदेश माइक्रो इरीगेशन प्रोजेक्ट के नाम से चल रही यह योजना दरअसल पुरानी, पानी बहाने वाली सिंचाई के तौर तरीकों को छोड़कर आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ने की कोशिश है।

आखिर यह योजना है क्यों

इस योजना का असली मकसद सिंचाई के दौरान होने वाली पानी की बर्बादी पर रोक लगाना है, ताकि उतने ही पानी में पहले से कहीं बड़े रकबे की सिंचाई हो सके। सरकार चाहती है कि किसान परंपरागत तरीकों की जगह आधुनिक तकनीक अपनाएं। इसका सीधा फायदा यह होगा कि जमीन से बेहिसाब भूजल खींचने पर लगाम लगेगी और आने वाली पीढ़ियों के सामने मंडरा रहे जल संकट का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाएगा।

किस तकनीक के लिए कितना लक्ष्य

जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक ने TrendKia को बताया कि योजना के तहत अलग-अलग तकनीकों के लिए फसलों के हिसाब से भौतिक लक्ष्य तय किए गए हैं। इसमें ड्रिप सिंचाई तकनीक के लिए कुल 663 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही मिनी स्प्रिंकलर तकनीक के लिए 332 हेक्टेयर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर तकनीक के लिए 924 हेक्टेयर जमीन को कवर करने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

किन फसलों को होगा सबसे ज्यादा फायदा

यह योजना गन्ने, गेहूं, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के लिए बेहद लाभकारी मानी जा रही है। इन्हीं फसलों में ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीक लगाने को खास तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उन्नत तकनीकों की खूबी यह है कि पौधे को ठीक उतना ही पानी मिलता है जितनी उसे जरूरत होती है, और इसी सटीकपन से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों में जबरदस्त सुधार देखने को मिलता है।

सब्सिडी का पूरा गणित

इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका भारी भरकम अनुदान है। लघु और सीमांत किसानों को ड्रिप तथा मिनी स्प्रिंकलर लगवाने पर कुल लागत का 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए यह अनुदान 80 प्रतिशत तय किया गया है। इतना ही नहीं, रेनगन और पोर्टेबल स्प्रिंकलर उपकरण खरीदने पर हर वर्ग के किसान को 65 से 75 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है।

सूक्ष्म सिंचाई के फायदे एक नजर में

इस तकनीक को अपनाने पर किसान को एक साथ कई मोर्चों पर फायदा होता है। सबसे बड़ा फायदा पानी की बचत का है, जो करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, यानी उतने ही पानी में कहीं बड़े खेत की सिंचाई आसानी से हो जाती है। पानी के साथ साथ सिंचाई पर लगने वाली लागत और मेहनत भी काफी घट जाती है। सटीक सिंचाई से जहां फसल का उत्पादन बढ़ता है, वहीं खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी लंबे समय तक बनी रहती है।

आवेदन कैसे करें

योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया को सरकार ने जानबूझकर बेहद आसान और पारदर्शी रखा है। इच्छुक किसान विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। पूरी प्रणाली ऑनलाइन होने की वजह से किसान घर बैठे या फिर नजदीकी जनसेवा केंद्र से फॉर्म भर सकते हैं। इस डिजिटल तरीके से एक ओर पारदर्शिता बनी रहती है और दूसरी ओर किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

जरूरी दस्तावेज और पात्रता

आवेदन के समय किसान के पास कुछ अहम कागजात होना जरूरी है। इनमें भूमि के अभिलेख यानी खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति और हाल में खिंची पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं। साथ ही एक चालू मोबाइल नंबर होना भी अनिवार्य है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों को योजना में विशेष लाभ और अपनी पात्रता साबित करने के लिए वैध जाति प्रमाण पत्र भी जरूर लगाना होगा।

एक अहम शर्त यह भी है कि योजना का फायदा सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनके पास सिंचाई के लिए अपना खुद का नलकूप या कुआं हो। योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी, मदद या समस्या के समाधान के लिए किसान सीधे जिला उद्यान अधिकारी के मोबाइल नंबर 9151066860 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी कार्य दिवस पर विकास भवन स्थित कार्यालय में जाकर भी जानकारी ली जा सकती है।

सवाल-जवाब

इस योजना के तहत किसानों को कितनी सब्सिडी मिलती है?
लघु और सीमांत किसानों को ड्रिप तथा मिनी स्प्रिंकलर पर 90 प्रतिशत और सामान्य किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान मिलता है, जबकि रेनगन और पोर्टेबल स्प्रिंकलर पर सभी को 65 से 75 प्रतिशत छूट मिलती है।
योजना का लाभ किन किसानों को मिलेगा?
इसका लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिनके पास सिंचाई के लिए अपना खुद का नलकूप या कुआं हो।
आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, पासपोर्ट साइज फोटो और चालू मोबाइल नंबर जरूरी है, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को जाति प्रमाण पत्र भी देना होगा।
योजना से जुड़ी जानकारी कहां से मिलेगी?
किसान जिला उद्यान अधिकारी के मोबाइल नंबर 9151066860 पर संपर्क कर सकते हैं या किसी कार्य दिवस पर विकास भवन स्थित कार्यालय जा सकते हैं।
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