कच्चे तेल के दामों में आई नरमी और वैश्विक बाजार की लगातार हिचकोले खाती चाल के बीच केंद्र सरकार ने देश की तेल कंपनियों से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है। मंगलवार को जारी एक ताजा सरकारी नोटिफिकेशन के जरिए सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन यानी एटीएफ (ATF) के निर्यात पर वसूले जाने वाले विंडफॉल टैक्स में जोरदार कमी कर दी है। दूसरी ओर, देश के अंदर ईंधन की कोई कमी न हो, यह पक्का करने के लिए पेट्रोल के निर्यात पर ड्यूटी को बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्रालय की मानें तो ये नई दरें 1 जुलाई, 2026 से अमल में आ जाएंगी।
हर पखवाड़े होने वाली समीक्षा के तहत वित्त मंत्रालय ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) के ढांचे में ये बदलाव किए हैं:
- डीजल का निर्यात: अब डीजल बाहर भेजने पर ₹14 प्रति लीटर के बजाय सिर्फ ₹8.5 प्रति लीटर टैक्स लगेगा।
- हवाई ईंधन (एटीएफ): इस पर लगने वाली ड्यूटी को ₹12.5 प्रति लीटर से घटाकर ₹7.5 प्रति लीटर कर दिया गया है।
- पेट्रोल का निर्यात: इसके उलट, पेट्रोल एक्सपोर्ट पर ड्यूटी ₹1.5 प्रति लीटर से बढ़कर सीधे ₹4 प्रति लीटर हो गई है।
आखिर सरकार ने यह कदम क्यों उठाया
पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और हालात की अनिश्चितता को देखते हुए सरकार चाहती है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कोई किल्लत न पड़े। होता यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम तेजी से चढ़ते हैं, तो तेल कंपनियां घर के बाजार में बेचने के बजाय ईंधन को बाहर भेजकर मोटा मुनाफा बटोरने लगती हैं। ड्यूटी का यह नया गणित कंपनियों को हद से ज्यादा निर्यात करने से रोकेगा, ताकि देश के भीतर तेल का संकट न खड़ा हो। साथ ही सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि घरेलू खपत के लिए बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी में कोई फेरबदल नहीं किया गया है, यानी आम लोगों की जेब पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
इन देशों को टैक्स से मिली खास रियायत
सरकार ने अपने दोस्त देशों को भी इस नीति में बड़ी राहत दी है। मार्च में जब यह एक्सपोर्ट लेवी लागू हुई थी, तब सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSU) की ओर से नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को भेजे जाने वाले ईंधन को इस टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया था। अब इस छूट का घेरा और बड़ा करते हुए इसमें मॉरीशस और मालदीव को भी जोड़ दिया गया है।













