बरसात के सीजन में खेतों में हरियाली बढ़ने के साथ ही विभिन्न प्रकार के कीट सक्रिय हो जाते हैं। यदि आपके क्षेत्र में भी टिड्डियों की हलचल नजर आने लगे, तो किसानों को बिना देर किए सावधानी बरतनी चाहिए। टिड्डियों का दल यदि खेतों तक पहुंच जाए, तो वह हरी-भरी फसलों को बहुत कम समय में भारी नुकसान पहुंचा सकता है। विशेष रूप से जिन फसलों की पत्तियां काफी कोमल होती हैं, उन पर इन कीटों का प्रभाव बहुत अधिक देखने को मिलता है। इसलिए अपने खेत के आसपास अचानक टिड्डियां दिखाई दें, तो उन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें और तुरंत बचाव के उपाय अपनाना शुरू कर दें।
शुरुआती बचाव के लिए अपनाएं तेज आवाज का तरीका
यदि सुबह या शाम के वक्त खेत के आसपास टिड्डियों का झुंड मंडराता दिखे, तो शुरुआत में ही उन्हें फसल पर बैठने से रोक देना सबसे बेहतर रहता है। इस1 मकसद के लिए किसान खेत के चारों तरफ टीन के डिब्बे, थाली या अन्य घरेलू सामान बजाकर तेज आवाज उत्पन्न कर सकते हैं। कई बार अचानक होने वाली तेज आवाज और इंसानी हलचल से टिड्डियां डरकर वहां से उड़ जाती हैं। यह बेहद आसान तरीका खासकर शुरुआती स्थिति में काफी असरदार साबित हो सकता है। यदि आसपास के सभी किसान मिलकर अपने खेतों की सामूहिक निगरानी करें, तो इस दल को समय रहते रोका जा सकता है।
शाम के समय खेतों की निगरानी है बेहद जरूरी
टिड्डियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिहाज से शाम का वक्त बहुत महत्वपूर्ण होता है। सूरज ढलने के बाद ये कीट कई अलग-अलग जगहों पर टिक जाते हैं और फिर सुबह होते ही दोबारा सक्रिय होकर उड़ने लगते हैं। इसीलिए किसानों को शाम ढलते वक्त खेत का एक चक्कर अवश्य लगा लेना चाहिए। यदि पौधों की पत्तियों पर बड़ी मात्रा में टिड्डियां बैठी हुई दिखाई दें, तो तुरंत सुरक्षा की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। यदि रात के समय इनकी मौजूदगी का अंदाजा लग जाए, तो सुबह होने का इंतजार करने के बजाय स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करके उचित नियंत्रण के उपायों की जानकारी लेना ज्यादा बुद्धिमानी होती है।
कीटनाशकों का इस्तेमाल और सुरक्षा सावधानियां
जब टिड्डियों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाए और पूरी फसल पर बड़े नुकसान का खतरा मंडराने लगे, तब कीटनाशक दवाओं का छिड़काव ही एकमात्र विकल्प बचता है। ऐसी स्थिति में मेलाथियान, क्विनालफोस और क्लोरपाइरिफोस जैसी दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है, लेकिन दवा का चयन हमेशा फसल की किस्म और स्थानीय स्तर पर स्वीकृत उपयोग के नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। इसलिए हमेशा दवा के पैकेट पर छपी जानकारी को ध्यान से पढ़कर ही उसकी मात्रा तय करें और यदि जरूरत महसूस हो तो कृषि विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। छिड़काव का काम करते समय चेहरे पर मास्क, हाथों में दस्ताने और पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े पहनना सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद आवश्यक है।
घर के अंदर टिड्डियों से निपटने के घरेलू नुस्खे
यदि टिड्डियां खेतों से निकलकर आपके घर के अंदर तक पहुंच गई हैं, तो रसोई में आसानी से मिलने वाले लहसुन से तैयार घरेलू स्प्रे को आजमाया जा सकता है। इसके लिए लहसुन की कुछ कलियों को अच्छी तरह पीसकर पानी में भिगोकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। इसके बाद इस पानी को छानकर किसी स्प्रे बोतल में भर लें और घर के उन हिस्सों में इसका हल्का छिड़काव करें जहां इन कीटों की आवाजाही सबसे ज्यादा हो। लहसुन की तीखी गंध इन कीटों को दूर भगाने में काफी मददगार साबित होती है। इसके अलावा घर की खिड़कियों और दरवाजों के आसपास नियमित सफाई रखने से भी घर को व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है।
नीम का तेल और मेश स्क्रीन का उपयोगी उपाय
घर के आसपास यदि टिड्डियों की हलचल लगातार बनी हुई है, तो नीम के तेल से तैयार पानी एक बेहद सरल घरेलू विकल्प साबित हो सकता है। थोड़े से पानी में नीम के तेल को अच्छी तरह मिलाकर घर के गमलों, गार्डन और बाहरी दीवारों पर हल्का स्प्रे किया जा सकता है। नीम की महक कई तरह के कीटों को अपने पास फटकने नहीं देती। हालांकि घर के अंदर पौधों पर इसका इस्तेमाल करने से पहले किसी छोटे हिस्से पर इसका परीक्षण कर लेना ज्यादा बेहतर रहता है। इसके अलावा खिड़कियों पर मेश स्क्रीन लगवा देने से टिड्डियों के घर के अंदर प्रवेश करने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।
सामूहिक सहयोग और समय पर सूचना का महत्व
टिड्डियों का यह झुंड किसी एक खेत तक ही सीमित रहेगा, ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है। यदि आपके खेत के आसपास बड़ी संख्या में ये कीट नजर आ रहे हैं, तो बिना देर किए अपने पड़ोसी किसानों को भी इसकी सूचना दें। क्षेत्र के सभी लोग मिलकर खेतों की संयुक्त निगरानी करें और जहां भी इनकी गतिविधि ज्यादा दिखाई दे, वहां समय रहते उचित कदम उठाए जाएं। किसी भी कीटनाशक का प्रयोग स्थानीय कृषि विभाग या विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के लेबल के निर्देशों के बगैर कभी न करें। सही समय पर जानकारी साझा करने से फसल को बड़े नुकसान से पहले ही सुरक्षित बचाया जा सकता है।



















