अमेरिकी आर्थिक नीतियों और प्रतिबंधों के बीच वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। माइकल वान ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिकी आर्थिक दंड की चेतावनियों और 60 से अधिक संस्थाओं पर लगाए गए नए प्रतिबंधों का गहराई से विश्लेषण किया है। उनका तर्क है कि लगातार बढ़ता भू-आर्थिक विखंडन दुनिया भर के देशों को इस बात के लिए प्रेरित कर रहा है कि वे अपनी आर्थिकी, व्यापारिक संपर्कों और विदेशी मुद्रा भंडार को किसी एक ही तंत्र पर आधारित रखने के बजाय विविधतापूर्ण बनाएं। इस प्रक्रिया में वर्तमान डॉलर-आधारित व्यवस्था से मोहभंग होने की स्थिति साफ नजर आ रही है, क्योंकि देश खुद को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखना चाहते हैं।
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के बयान और अमेरिकी ऋण प्रबंधन
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अमेरिकी ऋण प्रबंधन में बदलाव को लेकर किसी भी तरह के नए संकेत देने से पूरी तरह परहेज किया है। अमेरिकी ट्रेजरी ने स्पष्ट किया है कि वह पिछली तिमाही रिफंडिंग में घोषित अपनी नियमित ऋण नीलामी के कार्यक्रम को उसी प्रकार आगे बढ़ाती रहेगी। इसके साथ ही, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को अलग-थलग करने के लिए एक आक्रामक आर्थिक डी-डे अभियान की रूपरेखा तैयार की है, जिसके तहत ईरान से संबंध रखने वाले देशों को एक निश्चित समयसीमा के भीतर अपने व्यापारिक रिश्तों को समाप्त करना होगा, अन्यथा उन्हें एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
कनाडा के साथ व्यापारिक तनाव और एशिया का नजरिया
इन तमाम कदमों के बीच अमेरिका और कनाडा के बीच जारी व्यापारिक तनाव भी किसी से छिपा नहीं है, जहां नीतिगत अनिश्चितताओं का साया लगातार मंडरा रहा है। एशियाई क्षेत्र में भी व्यापार समझौतों को लेकर एक शांत और अनकहा अहसास बना हुआ है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते पेन के बजाय पेंसिल से लिखे गए प्रतीत होते हैं, जैसा कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इशारा किया था। जानकारों का मानना है कि इन कूटनीतिक और आर्थिक असहजताओं के कारण ही वैश्विक स्तर पर देश अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए विवश हो रहे हैं।
लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक और ट्रेजरी का नया कदम
दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने तय कैलेंडर से हटकर एक ऐसा कदम उठाया जिस पर निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की गहरी नजर टिकी हुई है। ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की कि वह 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष के सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशंस के आकार को कम से कम दोगुना कर देगा। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक संचालित होगी, जो बाजार में नकदी के प्रवाह को नियंत्रित करने का एक बड़ा प्रयास है।
प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों की बाजार चाल
इन व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच वैश्विक बाजारों में मुद्रा और जिंसों की चाल में उतार-चढ़ाव जारी है। यूरोपीय सत्र के दौरान GBP/USD में थोड़ी तेजी दर्ज की गई और यह 1.3650 के आसपास कारोबार करता दिखा। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद डॉलर की रिकवरी में सुस्ती आई है, जिसकी मुख्य वजह पाकिस्तान द्वारा लाई गई उस कूटनीतिक पहल को माना जा रहा है जिसके तहत ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और घेराबंदी रोकने की संभावनाओं पर विचार चल रहा है। दूसरी ओर, EUR/USD में रिकवरी का दम अभी पूरी तरह नहीं बन पाया है और यह 1.1700 के नीचे संघर्ष कर रहा है, जबकि निवेशक मध्य पूर्व के घटनाक्रमों का आकलन कर रहे हैं। सोने की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है और यह 4,650 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है, हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कम से कम एक और बढ़ोतरी की उम्मीदें अभी भी बाजार में बनी हुई हैं। इसके अलावा, बिटकॉइन ने अपनी जबरदस्त तेजी का सिलसिला जारी रखते हुए 80,000 डॉलर के स्तर को पार कर लिया है, जिसे संस्थागत निवेशकों से मिल रहे मजबूत समर्थन और स्पॉट एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में लगातार आ रहे पॉजिटिव इनफ्लो का बल मिल रहा है।



















