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जगतपुर की बंजर जमीन बनी मखाने का खजाना, किसानों की तकदीर बदलने लगीव्यापार
2 घंटे पहले· 2

जगतपुर की बंजर जमीन बनी मखाने का खजाना, किसानों की तकदीर बदलने लगी

जगतपुर इलाके में करीब 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अब मखाने की खेती हो रही है, जिससे किसानों की कमाई दोगुनी होने की उम्मीद जगी है.

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 2 मिनट पढ़ें AI के लिए
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जगतपुर इलाके में खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. यहां करीब 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अब मखाने की खेती लहलहा रही है, जिस जमीन को कभी सिर्फ पानी भरा रहने की वजह से बेकार समझा जाता था. लोग अब इसी जमीन से मोटी कमाई कर रहे हैं.

पहले क्या उगाते थे किसान

स्थानीय किसान बताते हैं कि इस इलाके में पहले वे थोड़ी-बहुत सब्जियां लगाते थे, जबकि ज्यादातर किसान केले की खेती पर निर्भर थे. मुनाफा सीमित था क्योंकि यहां की जमीन ज्यादातर मौसम में जलजमाव की शिकार रहती थी और पारंपरिक फसलें ठीक से टिक नहीं पाती थीं.

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सबौर कृषि विश्वविद्यालय ने दिखाया रास्ता

जगतपुर के इस हिस्से में साल के 7 महीने से ज्यादा समय तक पानी जमा रहता है. यही वजह थी कि यहां पारंपरिक खेती फायदे का सौदा नहीं बन पा रही थी. इस बीच सबौर कृषि विश्वविद्यालय से कुछ विशेषज्ञ यहां पहुंचे और किसानों को मखाने की खेती के बारे में जानकारी दी. विशेषज्ञों ने समझाया कि जलजमाव वाली यही जमीन मखाने की खेती के लिए सबसे मुफीद है.

पहली बार में ही अच्छा मुनाफा, लेकिन दिक्कतें भी आईं

किसानों ने पहली बार मखाने की खेती शुरू की तो अच्छा-खासा मुनाफा हुआ. हालांकि शुरुआत में कई दिक्कतें भी सामने आईं, क्योंकि यह तरीका किसानों के लिए बिल्कुल नया था और उन्हें इसका कोई पुराना अनुभव नहीं था. अब वे शुरुआती दिक्कतें दूर हो चुकी हैं और किसानों को भरोसा है कि आने वाले समय में वे बड़े पैमाने पर मखाने की खेती कर पाएंगे.

अब बागवानी की तरफ भी बढ़ रहे किसान, आय हो रही दोगुनी

मखाने की सफलता के बाद इलाके के किसान पुरानी खेती छोड़कर नई फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं. इससे उनकी आय दोगुनी होने लगी है. अब यहां सेब, नारंगी, अनानास, एपल बेर और अमरूद जैसे फलों की बागवानी भी शुरू हो चुकी है, जिससे किसानों को पहले से कहीं ज्यादा मुनाफा मिल रहा है.

इलाके की बदलती तस्वीर

कुल मिलाकर जगतपुर इलाके की खेती और किसानों की माली हालत, दोनों में बड़ा बदलाव आया है. जो जमीन कभी सिर्फ जलजमाव की वजह से जानी जाती थी, वही अब मखाने और बागवानी की फसलों से किसानों के लिए कमाई का जरिया बन गई है. आने वाले समय में हालात और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है.

इसका आप पर असर

  • किसानों के लिए: जगतपुर जैसे जलजमाव वाले इलाकों के किसान अब मखाने और बागवानी की फसलों से अपनी आय दोगुनी कर पा रहे हैं.
  • अन्य इलाकों के लिए सीख: जिन इलाकों में जलजमाव के चलते पारंपरिक खेती फायदेमंद नहीं है, वहां भी कृषि विश्वविद्यालयों की सलाह से मखाने जैसी फसलें अपनाई जा सकती हैं.

प्रेरणा और सीख

जगतपुर के किसानों की कहानी बताती है कि सही जानकारी और सही फसल का चुनाव किसी भी बंजर नजर आने वाली जमीन को कमाई का जरिया बना सकता है.

  • जमीन की सीमा को मौका मानें: जिस जलजमाव को किसान पहले नुकसान मानते थे, उसी को मखाने की खेती के लिए फायदे में बदल दिया गया.
  • विशेषज्ञों की सलाह लेने से न हिचकें: सबौर कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की मदद से किसानों को नई फसल के बारे में सही जानकारी मिली.
  • पहली असफलताओं से घबराएं नहीं: पहली बार में आई दिक्कतों के बावजूद किसानों ने खेती जारी रखी और अनुभव से उन दिक्कतों को दूर किया.
  • एक फसल की सफलता पर न रुकें: मखाने में मुनाफा देखकर किसानों ने सेब, नारंगी, अनानास, एपल बेर और अमरूद जैसी बागवानी फसलों की तरफ भी कदम बढ़ाया, जिससे आय के कई जरिए बन गए.

सवाल-जवाब

जगतपुर इलाके में कितनी जमीन पर मखाने की खेती हो रही है?
करीब 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर मखाने की खेती हो रही है.
पहले इस इलाके में किसान कौन सी फसल उगाते थे?
किसान थोड़ी-बहुत सब्जियां लगाते थे और ज्यादातर लोग केले की खेती करते थे.
इस इलाके में मखाने की खेती की सलाह किसने दी?
सबौर कृषि विश्वविद्यालय से आए विशेषज्ञों ने किसानों को मखाने की खेती के बारे में बताया.
जगतपुर का यह इलाका साल में कितने महीने पानी में डूबा रहता है?
यह इलाका साल के 7 महीने से ज्यादा समय तक पानी में डूबा रहता है.
पहली बार मखाने की खेती में किसानों को क्या दिक्कतें आईं?
यह पहला अनुभव होने के कारण शुरुआत में कई दिक्कतें आईं, लेकिन अब वे दूर हो चुकी हैं.
मखाने के अलावा अब यहां कौन सी फसलें उगाई जा रही हैं?
अब यहां सेब, नारंगी, अनानास, एपल बेर और अमरूद जैसी बागवानी फसलें भी उगाई जा रही हैं.
किसानों की आय पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
नई फसलों की वजह से किसानों की आय दोगुनी हो रही है.
आगे किसानों की क्या योजना है?
किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में वे बड़े पैमाने पर मखाने की खेती कर पाएंगे.
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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