प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार के सेक्रेटरीज के साथ की हाई-लेवल बैठक, सुशासन और AI के इस्तेमाल पर दिया जोरराष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सभी छंदों पर संसद के कानून और कांग्रेस के दो स्टैंजा प्रस्ताव पर छिड़ी सियासी जंग, जानिए 1937 के निर्णय का पूरा इतिहासगोंडा में 10 हजार मुर्गियों की यूनिट पर मिलेगी 7% सब्सिडी, जानिए लागत, जमीन और आवेदन की पूरी प्रक्रियापूर्णिया के बाजारों में छाई सोने-चांदी की राखियां, 500 रुपये के बजट से शुरू हो रही खरीदारीराज्य मंत्री अजीत सिंह पाल के जन्मदिन पर योगी आदित्यनाथ ने दी शुभकामनाएं, उत्तम स्वास्थ्य की कामना कीराजस्थान के भीलवाड़ा में चारा काटते समय निकला 9 फीट लंबा अजगर, वन विभाग की टीम ने सुरक्षित जंगल में छोड़ाउत्तर प्रदेश के गोंडा में किसान विनोद कुमार उपाध्याय का प्रयोग, 0218 प्रजाति गन्ने की एक बार रोपाई से 10 वर्ष तक कटाई की योजनाग्रेटर नोएडा में पनीर सैंपल फेल, शवगृह में इस्तेमाल होने वाला खतरनाक फॉर्मलीन रसायन मिलने से मचा हड़कंपदैनिक राशिफल 21 अगस्त 2026: जानिए मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों का आज का विस्तृत भविष्यफल और सटीक उपायउत्तराखंड में मूसलाधार बारिश का तांडव, बदरीनाथ हाईवे पर भूस्खलन से आवाजाही ठप और उधम सिंह नगर में स्कूल बंद
जगतपुर की बंजर जमीन बनी मखाने का खजाना, किसानों की तकदीर बदलने लगीव्यापार
6 जुल॰ 2026, 11:04 pm (45 दिन पहले)· 2

जगतपुर की बंजर जमीन बनी मखाने का खजाना, किसानों की तकदीर बदलने लगी

जगतपुर इलाके में करीब 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अब मखाने की खेती हो रही है, जिससे किसानों की कमाई दोगुनी होने की उम्मीद जगी है.

जगतपुर इलाके में खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. यहां करीब 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अब मखाने की खेती लहलहा रही है, जिस जमीन को कभी सिर्फ पानी भरा रहने की वजह से बेकार समझा जाता था. लोग अब इसी जमीन से मोटी कमाई कर रहे हैं.

पहले क्या उगाते थे किसान

स्थानीय किसान बताते हैं कि इस इलाके में पहले वे थोड़ी-बहुत सब्जियां लगाते थे, जबकि ज्यादातर किसान केले की खेती पर निर्भर थे. मुनाफा सीमित था क्योंकि यहां की जमीन ज्यादातर मौसम में जलजमाव की शिकार रहती थी और पारंपरिक फसलें ठीक से टिक नहीं पाती थीं.

ये भी पढ़ें

सबौर कृषि विश्वविद्यालय ने दिखाया रास्ता

जगतपुर के इस हिस्से में साल के 7 महीने से ज्यादा समय तक पानी जमा रहता है. यही वजह थी कि यहां पारंपरिक खेती फायदे का सौदा नहीं बन पा रही थी. इस बीच सबौर कृषि विश्वविद्यालय से कुछ विशेषज्ञ यहां पहुंचे और किसानों को मखाने की खेती के बारे में जानकारी दी. विशेषज्ञों ने समझाया कि जलजमाव वाली यही जमीन मखाने की खेती के लिए सबसे मुफीद है.

पहली बार में ही अच्छा मुनाफा, लेकिन दिक्कतें भी आईं

किसानों ने पहली बार मखाने की खेती शुरू की तो अच्छा-खासा मुनाफा हुआ. हालांकि शुरुआत में कई दिक्कतें भी सामने आईं, क्योंकि यह तरीका किसानों के लिए बिल्कुल नया था और उन्हें इसका कोई पुराना अनुभव नहीं था. अब वे शुरुआती दिक्कतें दूर हो चुकी हैं और किसानों को भरोसा है कि आने वाले समय में वे बड़े पैमाने पर मखाने की खेती कर पाएंगे.

अब बागवानी की तरफ भी बढ़ रहे किसान, आय हो रही दोगुनी

मखाने की सफलता के बाद इलाके के किसान पुरानी खेती छोड़कर नई फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं. इससे उनकी आय दोगुनी होने लगी है. अब यहां सेब, नारंगी, अनानास, एपल बेर और अमरूद जैसे फलों की बागवानी भी शुरू हो चुकी है, जिससे किसानों को पहले से कहीं ज्यादा मुनाफा मिल रहा है.

इलाके की बदलती तस्वीर

कुल मिलाकर जगतपुर इलाके की खेती और किसानों की माली हालत, दोनों में बड़ा बदलाव आया है. जो जमीन कभी सिर्फ जलजमाव की वजह से जानी जाती थी, वही अब मखाने और बागवानी की फसलों से किसानों के लिए कमाई का जरिया बन गई है. आने वाले समय में हालात और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है.

सवाल-जवाब

जगतपुर इलाके में कितनी जमीन पर मखाने की खेती हो रही है?
करीब 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर मखाने की खेती हो रही है.
पहले इस इलाके में किसान कौन सी फसल उगाते थे?
किसान थोड़ी-बहुत सब्जियां लगाते थे और ज्यादातर लोग केले की खेती करते थे.
इस इलाके में मखाने की खेती की सलाह किसने दी?
सबौर कृषि विश्वविद्यालय से आए विशेषज्ञों ने किसानों को मखाने की खेती के बारे में बताया.
जगतपुर का यह इलाका साल में कितने महीने पानी में डूबा रहता है?
यह इलाका साल के 7 महीने से ज्यादा समय तक पानी में डूबा रहता है.
पहली बार मखाने की खेती में किसानों को क्या दिक्कतें आईं?
यह पहला अनुभव होने के कारण शुरुआत में कई दिक्कतें आईं, लेकिन अब वे दूर हो चुकी हैं.
मखाने के अलावा अब यहां कौन सी फसलें उगाई जा रही हैं?
अब यहां सेब, नारंगी, अनानास, एपल बेर और अमरूद जैसी बागवानी फसलें भी उगाई जा रही हैं.
किसानों की आय पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
नई फसलों की वजह से किसानों की आय दोगुनी हो रही है.
आगे किसानों की क्या योजना है?
किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में वे बड़े पैमाने पर मखाने की खेती कर पाएंगे.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR