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राजस्थान के किसानों का स्मार्ट कदम: स्मार्टफोन के जरिए मिलेगी खेती की भारी मशीनरीव्यापार
12 घंटे पहले· 2

राजस्थान के किसानों का स्मार्ट कदम: स्मार्टफोन के जरिए मिलेगी खेती की भारी मशीनरी

राजस्थान सरकार ने राज किसान साथी पोर्टल के साथ जेफार्म को जोड़कर एक नई डिजिटल पहल शुरू की है, जिससे किसान बिना खरीदे भारी कृषि मशीनरी किराए पर ले सकेंगे।

राजस्थान भर के छोटे और सीमांत किसानों के लिए कृषि मशीनों तक पहुंच की प्रक्रिया अब पूरी तरह से बदलने वाली है, जिससे उन्हें एक बड़ी ऐतिहासिक राहत मिलेगी। राज्य सरकार ने इस बात को गहराई से समझा है कि आधुनिक कृषि उपकरणों को खरीदने की भारी लागत अक्सर किसानों को कर्ज और कम उत्पादकता के जाल में फंसा देती है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने एक बेहद सुलभ मोबाइल आधारित रेंटल इकोसिस्टम की शुरुआत की है। इस बड़े तकनीकी बदलाव का सीधा अर्थ यह है कि अब किसानों को महंगे उपकरण खरीदने के लिए अपनी जीवन भर की जमा पूंजी खर्च करने या भारी भरकम कर्ज लेने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बजाय, वे अब बड़ी आसानी से सीधे अपने स्मार्टफोन से भारी ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और खेती के अन्य सभी जरूरी उपकरण किराए पर बुक कर सकेंगे। स्वामित्व से हटकर पहुंच पर आधारित यह नया मॉडल यह सुनिश्चित करेगा कि आर्थिक रूप से सबसे कमजोर किसानों को भी सही समय पर सही उपकरण मिलें, जिससे पूरे राज्य में खेती के पारंपरिक तरीकों को आधुनिक रूप दिया जा सके।

टैफे-जेफार्म सर्विसेज के साथ रणनीतिक साझेदारी

इस व्यापक और महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य आधार राजस्थान के कृषि विभाग और जानी-मानी संस्था टैफे-जेफार्म सर्विसेज के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित एक अहम समझौता ज्ञापन है। इस रणनीतिक करार के माध्यम से, जेफार्म द्वारा वर्तमान में संचालित किए जा रहे एक मजबूत और स्थापित डिजिटल प्लेटफॉर्म को राज्य सरकार के आधिकारिक किसान पोर्टल, राज किसान साथी के साथ पूरी तरह से एकीकृत किया जाएगा। यह तकनीकी एकीकरण विशेष रूप से प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए तैयार किया गया है। अब किसानों को अलग-अलग अकाउंट बनाने, कई पासवर्ड याद रखने या विभिन्न वेबसाइटों पर भटकने की परेशानी से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। इन सभी सेवाओं को एक जगह लाकर, एक सिंगल और एकीकृत डिजिटल पोर्टल बनाया गया है जो कृषि मशीनरी से जुड़ी हर जरूरत को पूरा करेगा। यहां मशीन की रीयल-टाइम उपलब्धता, उसकी क्षमता और तुरंत बुकिंग जैसी हर सुविधा एक ही मंच पर उपलब्ध होगी।

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इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध मशीनों का दायरा खेती की शुरुआत से लेकर अंत तक की हर जरूरत को कवर करता है। चाहे किसान को शुरुआती जुताई के लिए खेत तैयार करना हो, सटीक तरीके से बीजों की बुवाई करनी हो, फसल के बीच में निराई-गुड़ाई का काम हो, या फिर अंतिम कटाई और उसके बाद के प्रबंधन का भारी काम हो, हर काम के लिए उपयुक्त भारी मशीनरी अब बस मोबाइल स्क्रीन पर कुछ टैप की दूरी पर होगी। इसे ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस डिजिटल बुकिंग गेटवे का उपयोग करने के एवज में किसानों से कोई भी अतिरिक्त सर्विस चार्ज या छिपा हुआ शुल्क बिल्कुल नहीं लिया जाएगा। यह जीरो-फीस संरचना यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगी कि अत्याधुनिक कृषि तकनीक उन छोटे किसानों के बजट में बनी रहे, जो अन्यथा पैसों की कमी के कारण मशीनों के इस्तेमाल से वंचित रह जाते हैं।

एक पारदर्शी और प्रभावी नेटवर्क की स्थापना

इस संपूर्ण डिजिटलीकरण से आने वाले व्यवस्थागत सुधार काफी गहरे और प्रभावशाली हैं। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक शिवजीराम कटारिया ने इस प्रणाली के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जैसे ही जेफार्म प्लेटफॉर्म का राज किसान साथी पोर्टल के साथ पूरी तरह से जुड़ाव हो जाएगा, सभी कृषि मशीनों का अनिवार्य पंजीकरण भी इसी केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से होने लगेगा। इस नए नियम के लागू होने से प्लेटफॉर्म पर एक सत्यापित और भौगोलिक रूप से सटीक डेटाबेस तैयार होगा। इससे किसानों को अपने बिल्कुल नजदीकी क्षेत्र में मौजूद सभी उपलब्ध ट्रैक्टरों और आधुनिक उपकरणों की एकदम स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी मिल सकेगी, जो पहले कभी संभव नहीं था। इस तकनीकी सुधार से उपकरणों की कालाबाजारी और मनमाने किराये की समस्या पर भी काफी हद तक लगाम लगेगी।

मशीनों की उपलब्धता और बुकिंग की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाकर, यह डिजिटल कायाकल्प किसान समुदाय का बहुत सारा कीमती समय बचाने वाला है। किराए की मशीन की तलाश में एक गांव से दूसरे गांव तक शारीरिक रूप से भटकने के पारंपरिक और थकाऊ तरीके अब इतिहास बन जाएंगे। इसके बजाय, किसानों को अपनी महत्वपूर्ण मौसमी कृषि गतिविधियों की योजना बहुत पहले से बनाने की सुविधा मिलेगी, ताकि वे मौसम और मिट्टी की अनुकूल स्थिति के ठीक समय पर अपने उपकरण प्राप्त कर सकें। यह व्यापक डिजिटल नेटवर्क पूरे राज्य में फैले हुए मौजूदा कस्टम हायरिंग सेंटरों, स्वतंत्र निजी ट्रैक्टर मालिकों और औपचारिक किसान उत्पादक संगठनों को आपस में जोड़कर एक मजबूत कृषि ग्रिड में बदल देगा, जिससे संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।

ग्रामीण आय में वृद्धि और स्थानीय बुनियादी ढांचे का विस्तार

यह साझा आर्थिक बुनियादी ढांचा जानबूझकर इस तरह से तैयार किया गया है कि इससे पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा हो। जिन किसानों के पास अपनी भारी मशीनरी खरीदने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है, वे अपनी परिचालन लागत को काफी हद तक कम करते हुए, आस-पास के स्रोतों से आसानी से मशीनें किराए पर ले सकते हैं। इसके विपरीत, जो लोग निजी उपकरणों के मालिक हैं और जो स्थानीय सहकारी समितियां हैं, उन्हें अपनी खाली खड़ी मशीनों से कमाई करने का एक बेहद सुव्यवस्थित चैनल मिल जाएगा। इससे मशीनों को किराए पर देकर अतिरिक्त आय का एक बहुत ही विश्वसनीय स्रोत तैयार होगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस सेवा का लाभ राजस्थान के हर दूर-दराज के कोने तक पहुंचे, कृषि विभाग ने उन क्षेत्रों के लिए एक विशेष विस्तार रणनीति बनाई है जहां अभी यह सुविधा नहीं है। जिन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में वर्तमान में कस्टम हायरिंग सेंटर नहीं हैं, वहां नए सिरे से बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। सहकारी संस्थाओं और विभिन्न निजी कंपनियों के सक्रिय सहयोग से इन स्थानीय क्षेत्रों में तेजी से नए रेंटल हब स्थापित किए जाएंगे। गांव के स्तर पर बनने वाले इन केंद्रों में खेती से जुड़ी हर अहम मशीन रखी जाएगी, जिनमें शक्तिशाली ट्रैक्टर, सटीक बुवाई करने वाले सीड ड्रिल, भारी क्षमता वाले रोटावेटर, फसल काटने वाले रीपर और बड़े हार्वेस्टर शामिल हैं। मशीनों की इस स्थानीय उपलब्धता से किसानों को बड़े और दूर-दराज के शहरों से भारी उपकरण ढोकर लाने की बड़ी और महंगी रसद समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा।

इस पूरे बदलाव की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हुए, कृषि एवं उद्यानिकी आयुक्त मंजू राजपाल ने विभाग के सभी अधिकारियों को आधिकारिक तौर पर निर्देश दिया है कि वे इस परियोजना की विस्तृत परिचालन गाइडलाइन को तेजी से अंतिम रूप दें और इसे जल्द से जल्द लागू करें। प्रशासन की इस सक्रियता से यह उम्मीद की जा रही है कि पूरे राजस्थान में कृषि यंत्रीकरण की गति में अभूतपूर्व तेजी आएगी। मशीनों तक पहुंच को आसान बनाकर, खेती के समय को अनुकूलित करके और तकनीक को अपनाने की लागत को कम करके, राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य फसल की पैदावार को संरचनात्मक रूप से बढ़ाना और छोटे तथा सीमांत किसान समुदायों की शुद्ध आय को स्थायी रूप से ऊपर उठाना है।

सवाल-जवाब

किसानों को कृषि उपकरण किराए पर लेने के लिए किस पोर्टल का उपयोग करना होगा?
किसानों को उपकरणों की बुकिंग के लिए राजस्थान सरकार के राज किसान साथी पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा, जिसे जेफार्म के साथ जोड़ा जा रहा है।
क्या मशीनों की डिजिटल बुकिंग के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क देना होगा?
नहीं, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस डिजिटल बुकिंग सेवा का उपयोग करने के लिए किसानों से कोई भी अतिरिक्त सर्विस चार्ज नहीं लिया जाएगा।
इस नई डिजिटल व्यवस्था से किन किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
इस योजना से मुख्य रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों को फायदा होगा जिनके पास महंगी कृषि मशीनरी खरीदने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है।
जिन गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर नहीं हैं, वहां क्या व्यवस्था की जाएगी?
जिन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में अभी तक कस्टम हायरिंग सेंटर नहीं हैं, वहां सहकारी संस्थाओं और निजी कंपनियों की मदद से नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
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