राजस्थान के कृषि विभाग ने राज्य के किसानों और पशुपालकों की मेहनत तथा नए प्रयोगों को सराहने का बड़ा फैसला लिया है। कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम यानी आत्मा योजना के अंतर्गत उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपनी खेती में पारंपरिक पद्धतियों के साथ आधुनिक तकनीक का सामंजस्य स्थापित किया है। यह सम्मान पंचायत समिति, जिला और राज्य स्तर पर दिया जाएगा, जिसमें चुनिंदा किसानों को नकद पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने का प्रावधान किया गया है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक किसान 31 अगस्त तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
तीन स्तरों पर नकद पुरस्कार और सम्मान की व्यवस्था
किसानों को नवाचार की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से आत्मा योजना के तहत पुरस्कारों को तीन प्रशासनिक श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पंचायत समिति स्तर पर चयनित होने वाले प्रत्येक किसान को 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। जिला स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी। इसके अतिरिक्त, राज्य स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले किसानों को 50 हजार रुपये की नकद राशि से नवाजा जाएगा। विभाग का मानना है कि नकद प्रोत्साहन और सरकारी पहचान मिलने से किसान अधिक उत्साह के साथ अपनी खेती में नए प्रयोग करेंगे तथा अन्य ग्रामीण भी उनसे सीख लेंगे।
फसलों, उद्यानिकी और टिकाऊ खेती में नवाचार के मानदंड
यह योजना केवल एक सीमित क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न प्रकार की कृषि गतिविधियों को शामिल किया गया है। खाद्यान्न फसलों और व्यावसायिक फसलों में उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादन हासिल करने वाले किसान इस सम्मान के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। इसके साथ ही फल, फूल और सब्जियों की आधुनिक तकनीकों से खेती करने वाले उद्यानिकी किसानों को भी चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। जो किसान उन्नत तकनीकों के बल पर उत्पादन लागत घटाकर प्रति हेक्टेयर उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ा रहे हैं, उनकी उपलब्धियों को चयन का मुख्य आधार बनाया जाएगा।
जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान
वर्तमान दौर में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों की आवश्यकता बढ़ रही है। इसे ध्यान में रखते हुए आत्मा योजना में उन किसानों को विशेष महत्व दिया जाएगा जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और रासायनिक उर्वरकों के न्यूनतम प्रयोग पर बल दे रहे हैं। जैविक खेती अपनाने वाले, कम लागत में रसायन मुक्त फसल उगाने वाले और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने वाले किसान अपने कार्यों का ब्योरा देकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा खेत में जल संरक्षण, ड्रिप या स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई पद्धतियों के कुशल प्रयोग, कृषि यंत्रीकरण और नई उत्पादन तकनीकों का सफल क्रियान्वयन करने वाले किसानों के नवाचारों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
पशुपालन, नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन के लिए प्रोत्साहन
आत्मा योजना का दायरा फसल उत्पादन से आगे बढ़कर पशुपालन क्षेत्र तक फैला हुआ है। डेयरी उद्योग और पशु प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशुपालक भी इस सम्मान के हकदार बन सकते हैं। यदि किसी किसान या पशुपालक ने पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं, दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि की है या पशु प्रबंधन के नए वैज्ञानिक तरीके अपनाए हैं, तो वे अपनी सफलता के आधार पर आवेदन जमा कर सकते हैं। सरकार की इस पहल से कृषि के साथ-साथ सहायक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।
आवेदन की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी
पुरस्कार प्राप्त करने के इच्छुक किसानों को अपने खेत या डेयरी फार्म में किए गए उत्कृष्ट कार्यों से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। इसके लिए नवाचार की स्पष्ट फोटो, उपलब्धि का विस्तृत ब्योरा और तकनीकी विवरण तैयार रखना आवश्यक है। योजना से जुड़ी पात्रता, दिशा-निर्देशों और आवेदन पत्र की जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी या संबंधित ब्लॉक और जिला कृषि कार्यालय में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इसके अलावा जिला कृषि विभाग कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाकर भी जानकारी ली जा सकती है। ध्यान रहे कि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित है।



















