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राजस्थान में पहली वंदे भारत कार्गो ट्रेन का सफल ट्रायल, 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी 16 कोच वाली रेकव्यापार
30 जुल॰ 2026, 9:12 pm (45 दिन पहले)· 0

राजस्थान में पहली वंदे भारत कार्गो ट्रेन का सफल ट्रायल, 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी 16 कोच वाली रेक

भारतीय रेलवे ने कोटा-नागदा-सवाई माधोपुर मार्ग पर देश की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन का सफल परीक्षण किया, जिसमें ट्रेन ने 145 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार दर्ज की।

भारतीय रेलवे ने यात्री सेवाओं की रफ्तार बढ़ाने के बाद अब माल ढुलाई के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाया है। देश की पहली वंदे भारत कार्गो ट्रेन का राजस्थान के कोटा-नागदा-सवाई माधोपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर पर सफल परीक्षण किया गया। इस 16 कोच वाली फ्रेट ट्रेन ने अपनी पहली ही आजमाइश के दौरान 145 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति हासिल की। इस नई ट्रेन के शुरू होने से देश में ई-कॉमर्स, पार्सल और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स जैसी सेवाओं को अधिक तेज और समयबद्ध तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

उच्च गति परीक्षण और एक महीने की जांच प्रक्रिया

चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में निर्मित इस 16 कोच वाले प्रोटोटाइप का परीक्षण राजस्थान के कोटा मंडल के अंतर्गत किया गया। शुरुआती दौर में ट्रेन को 120 किमी प्रति घंटे और 135 किमी प्रति घंटे की गति से चलाकर जांचा गया। इसके बाद वापसी की यात्रा के दौरान ट्रेन ने 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार छू ली, जो परीक्षण के पहले दिन का सबसे बड़ा कीर्तिमान रहा।

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रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेन की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए करीब एक महीने तक विभिन्न परिस्थितियों में व्यापक परीक्षण किए जाएंगे। इस दौरान रोजाना कम से कम दो राउंड ट्रायल आयोजित होंगे, जिनमें ट्रेन को खाली और पूरी तरह लोडेड दोनों स्थितियों में चलाकर देखा जाएगा। इन परीक्षणों में ट्रेन की ब्रेकिंग क्षमता, मोड़ों पर संतुलन, ट्रैक्शन शक्ति, बिजली की खपत, सुरक्षा प्रणालियों, सिग्नलिंग व्यवस्था और ऑटोमैटिक डोर लॉकिंग जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी मानकों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा।

विशेष डिजाइन और पेलोड उठाने की क्षमता

तेज गति से माल की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए इस फ्रेट ईएमयू को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। 16 कोच वाली इस पूरी ट्रेन में 12 पार्सल कोच, 2 रेफ्रीजरेटेड कोच और 2 ट्रेलर कोच जोड़े गए हैं। यह संरचना कुल 397 टन से अधिक का पेलोड एक साथ ले जाने में सक्षम है। इसके साथ ही, तेज रफ्तार में भारी वजन को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए ट्रेन के प्रत्येक एक्सल को 20 टन से अधिक भार उठाने की क्षमता के अनुसार तैयार किया गया है।

आधुनिक सुरक्षा तकनीक और ऑटोमैटिक सिस्टम

कार्गो वंदे भारत में स्वदेशी कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम जैसी अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक शामिल की गई है। जल्द खराब होने वाले सामानों और तापमान के प्रति संवेदनशील वस्तुओं की सुरक्षा के लिए ट्रेन में रेफ्रीजरेटेड पार्सल स्टोरेज और उन्नत वेंटिलेशन प्रणाली की व्यवस्था है। ट्रेन की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इसमें ऑटोमैटिक डोर लॉकिंग की सुविधा दी गई है। जैसे ही ट्रेन 5 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार पकड़ती है, इसके सभी दरवाजे अपने आप लॉक हो जाते हैं। जब तक सभी दरवाजे पूरी तरह बंद और सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक ट्रेन आगे नहीं बढ़ती है।

सवाल-जवाब

वंदे भारत कार्गो ट्रेन ने ट्रायल में अधिकतम कितनी स्पीड हासिल की?
राजस्थान के कोटा मंडल में आयोजित ट्रायल के दौरान वंदे भारत कार्गो ट्रेन ने 145 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार हासिल की।
इस कार्गो ट्रेन का निर्माण कहां किया गया है?
इस 16 कोच वाली फ्रेट ट्रेन के प्रोटोटाइप को चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में तैयार किया गया है।
वंदे भारत कार्गो ट्रेन में कुल कितने कोच हैं और उनकी भार क्षमता क्या है?
ट्रेन में कुल 16 कोच हैं, जिनमें 12 पार्सल कोच, 2 रेफ्रीजरेटेड कोच और 2 ट्रेलर कोच शामिल हैं। इसकी कुल पेलोड क्षमता 397 टन से अधिक है।
ट्रेन की सुरक्षा के लिए कौन सा सिस्टम इस्तेमाल किया गया है और दरवाजे कब लॉक होते हैं?
ट्रेन में स्वदेशी कवच सुरक्षा प्रणाली लगी है। 5 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार होते ही इसके सभी दरवाजे अपने आप लॉक हो जाते हैं और दरवाजे बंद हुए बिना ट्रेन आगे नहीं बढ़ती।
वंदे भारत कार्गो ट्रेन के ट्रायल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य ई-कॉमर्स, पार्सल और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स के लिए तेज और समयबद्ध माल परिवहन सुनिश्चित करना है।
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